Ked

Ked (केड) (Ker) is a village in Udaipurwati tahsil of Jhunjhunu district in Rajasthan. Ked is a Gotra of the Anjana Jats in Gujarat.
Jat Gotras
History
According to Thakur Deshraj[1], during the period of Anangpal Garhwals were the rulers of Garhmukteshwar. When Garhwals lost Garhmukteshwar, they came to Rajasthan and occupied Ker, Bhatiwar, Chhawsari etc near Jhunjhunu in 13th century. As per their bards when these people came to this place, Johiya, Mohiya Jats were the rulers of this area. Bhats have mentioned them as Tomars. When Muslim influence increased in this area they had wars with them as a result they moved from here to there. One of these groups moved to ‘Kuloth’, which was ruled by Chauhans.[2] After a war they occupied Kuloth. Sardar Kurdaram who was a descendant of Garhwals of Kuloth had been tehsildar of Nawalgarh.
गढ़वाल इतिहास
गढ़वाल (c.13 ई.): गढ़मुक्तेश्वर का राज्य जब इनके हाथ से निकल गया, तो झंझवन (झुंझनूं) के निकटवर्ती-प्रदेश मे आकर केड़, भाटीवाड़, छावसरी पर अपना अधिकार जमाया। यह घटना तेरहवीं सदी की है। भाट लोग कहते हैं जिस समय केड़ और छावसरी में इन्होंने अधिकार जमाया था, उस समय झुंझनूं में जोहिया, माहिया जाट राज्य करते थे। जिस समय मुसलमान नवाबों का दौर-दौरा इधर बढ़ने लगा, उस समय इनकी उनसे लड़ाई हुई, जिसके फलस्वरूप इनको इधर-उधर तितर-बितर होना पड़ा। इनमें से एक दल कुलोठ पहुंचा, जहां चौहानों का अधिकार था। लड़ाई के पश्चात कुलोठ पर इन्होंने अपरा अधिकार जमा लिया। सरदार कुरडराम जो कि कुलोठ के गढ़वाल वंश-संभूत हैं नवलगढ़ के तहसीलदार हैं। यह भी कहा जाता है कि गढ़ के अन्दर वीरतापूर्वक लड़ने के कारण गढ़वाल नाम इनका पड़ा है। इसी भांति इनके साथियों में जो गढ़ के बाहर डटकर लड़े वे बाहरौला अथवा बरोला, जो दरवाजे पर लड़े वे, फलसा (उधर दरवाजे को फलसा कहते हैं) कहलाये। इस कथन से मालूम होता है, ये गोत्र उपाधिवाची है। बहुत संभव है इससे पहले यह पांडुवंशी अथवा कुन्तल कहलाते हों। क्योंकि भाट ग्रन्थों में इन्हें तोमर लिखा है और तोमर भी पांडुवंशी बताये जाते हैं। (जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृ.599-600)
कायमखानी इतिहास
रतन लाल मिश्र[3] ने लिखा है: [पृ.116]: अलफखां (1570-1626) कायमखानियों का सबसे प्रबल नवाब था. जिसने अपने भूभाग को शेखावाटी में काफी विस्तृत कर लिया. उसने फतेहपुर के अतिरिक्त पाटोदा, रसूलपुर, उदयपुर, बारवा शेखावतों से छीन लिए और नरहड़ पठानों से छीन ली.
शेखावाटी में झुंझुनू एवं फतेहपुर के अतिरिक्त और भी कायमखानियों के राज्य थे जिनका निर्देश पहले किया जा चुका है. केड नामक स्थान शेखावाटी के उदयपुर से 38 किलोमीटर उत्तर में कटली नदी के किनारे बसा हुआ है. कायमखां के साथ उसका भाई जबरूद्दीन भी मुसलमान हो गया . उसका चरखी, दादरी, कल्याणपुर पर अधिकार था जहां उसने वाक्यात के अनुसार संवत 1440 तक शासन किया और फिर अपने भतीजे के पास नागौर चला आया. आपस में रंजिश की शबब से उसने केड़ को अपनी राजधानी बनाया. उन दिनों इधर भयंकर जंगल था. जोड़ों से उसका मुकाबला हुआ जिसमें वह विजई हुआ. उसने यहां एक किले का निर्माण भी किया.
उसकी मौत होने पर फिरोजखां गद्दी पर बैठा. इसके संबंध में विशेष वृत्त ज्ञात नहीं है. उसके बाद दाऊदखां, मोहनखां, मुजफ्फरखां, हामिदखां, फतेहखां और
[पृ.117]: महावतखां ने क्रमश: शासन किया. वाकया निगारों के अनुसार संवत 1778 में केड़ कयाम्खानियों के कब्जे से निकल गई. जबरदी की औलाद जवबानी कहलाती है.
Population
Notable persons
External links
References
- ↑ Thakur Deshraj: Jat Itihas (Hindi), Maharaja Suraj Mal Smarak Shiksha Sansthan, Delhi, 1934, p.599
- ↑ Thakur Deshraj: Jat Itihas (Hindi), Maharaja Suraj Mal Smarak Shiksha Sansthan, Delhi, 1934, p.599
- ↑ रतन लाल मिश्र:शेखावाटी का नवीन इतिहास, मंडावा, 1998, पृ.116-117
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