Singhpur Tal
| Author:Laxman Burdak, IFS (R) |




Singhpur Tal (सिंहपुर ताल) is a village in Chanderi tahsil of Ashoknagar district in Madhya Pradesh.
Origin
Variants
Location
Singhpur Tal is a small Village/hamlet in Chanderi Tehsil in Ashoknagar District of Madhya Pradesh State, India. It comes under Singhpur Tal Panchayath. It belongs to Gwalior Division . It is located 53 KM towards East from District head quarters Ashoknagar. 13 KM from Bamori Chanderi. Singhpur Tal Pin code is 473446 and postal head office is Chanderi. Pranpura ( 4 KM ) , Muradpur ( 5 KM ) , Hirawal ( 6 KM ) , Godhan ( 7 KM ) , Badera ( 8 KM ) are the nearby Villages to Singhpur Tal. Singhpur Tal is surrounded by Jakhaura Tehsil towards East , Lalitpur Tehsil towards East , Khaniadhana Tehsil towards North , Isagarh Tehsil towards west.[1]
Visit by Author
Author (Laxman Burdak) visited it on 06.05.1997.
History
इतिहास
[पृ.38]: सन 1526 ई. में बादशाह जहाँगीर ने महाराज रामसी को चंदेरी दे दी. इस पर बुंदेलों का शासन बना रहा. बुंदेला वंश के 11 राजाओं ने 225 वर्ष तक चंदेरी में राज्य किया. बुंदेलों के शासनकाल में अनेक निर्माण कार्य हुए. उनके राज्य काल में चंदेरी की उन्नति हुई. सिंहपुर महल, पंचम नगर और रामनगर महल इसी काल में बनवाए गए थे.[2]
सिंहपुर महल

[3] ने लिखा है....[पृ.54]: चंदेरी के दिल्ली दरवाजे से उत्तर की ओर लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर यह सुंदर महल है. जाने के लिए अच्छी सड़क बनी हुई है. समस्त मार्ग प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर घने वन से आच्छादित है.
[पृ.55]: सिंहपुर के समीप एक भग्नावशेष द्वार मिलता है. इसके पश्चात ढलान है जो दाहिनी और सिंहपुर ताल के तट से होता हुआ ऊपर पहाड़ी पर पहुंचता है. यहां पर यह कलाकृति से विहीन छोटा सा महल है. इसे बुंदेला शासकों ने बनवाया था. इसका निर्माण लगभग 1713 ईस्वी में देवी सिंह बुंदेला द्वारा किया गया था. इसी राजा ने सिंहपुर ग्राम बसाया. कहा जाता है कि देवी सिंह ने 'निदान' और 'आयुर्वेदिक विलास' नामक वैद्यक के दो ग्रंथ लिखे. उसके पुत्र राजा दुर्गा सिंह ने चंदेरी से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर अपनी प्रिय रानी कुमारी के नाम पर पंचम नगर बनवाया था. इस महल में सुंदर फव्वारों का निर्माण किया गया था, परंतु अब यह राजघाट बांध के डूब में आ गया है.
इस सिंहपुर महल के अंदर दो छोटे और बड़े आंगन (चौक) हैं. इसके दो तरफ बरामदे और कमरे हैं. ऊपर की मंजिल भी है. छत पर पहुंचने पर चारों ओर का दृश्य अत्यधिक नयनाभिराम है. बरसात में सोने के लिए कमरे हैं, जिन में चारों ओर पत्थर की जाली लगी हुई है. वर्षा ऋतु में रात्रि के समय इन कमरों में लेट कर वर्षा की नन्ही-नहीं गुहारों का आनंद लिया जा सकता है. वर्तमान समय के बने हुए कमरों की घुटन इन कमरों में नहीं है.
जैसे ही इस घाटी पर चढ़कर इस महल के द्वार पर पहुंचते हैं, तो हमारा मन प्रसन्नता से नाच उठता है. द्वार से लगे हुए ऊंचे-ऊंचे घने वृक्षों के कारण यहां की शोभा में एक विचित्र ढंग का आकर्षण उत्पन्न हो जाता है. चारों ओर से सघन वृक्षों के मध्य में यह महल अप्सरा लोक जैसा लगता है. जैसे ही वर्षा ऋतु का आगमन होता है, तो चारों तरफ प्रकृति हरित परिधान पहनकर तथा भांति भांति के रंग-बिरंगे पुष्पों से सज जाती है. मंद-मंद पवन, जूही और कदम की भीनी भीनी सुगंध लिए, शांत भाव से बहती हुई जीवन में एक अनोखी नूतन शक्ति का संचार करती है. इस महल के चारों ओर पर्याप्त बेला (मोगरे) के फूल खिलते रहते हैं. पश्चिम दिशा में विंध्याचल की हरी-भरी पहाड़ी है. प्रकृति के चारों ओर अनिर्वचनी हरियाली हमारे हृदय को अनायासी आकर्षित करके मन को मोहित कर लेती है. इस महल के ठीक नीचे पूर्व दिशा की ओर सुंदर सरोवर है, जिसके तट पर बेलपत्र तथा अन्य बड़े वृक्ष लगे हैं. इस सरोवर पर नीचे जल की सतह तक
[पृ.56]: पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है परंतु वह कुछ टूटी हुई और अव्यवस्थित हैं. स्वतंत्रता पश्चात शासन ने इनकी देखरेख की ओर ध्यान देना उचित न समझा. सरोवर में मनमोहक कमल पुष्प खिलते रहते हैं. पवन का तीव्र झोंका , खिलते हुए कमल-पुष्पों की पंखुड़ियां को, जल सतह पर बिखेर देता है और यह बिखरी हुई पंखुड़िया अत्यधिक सुंदर लगती हैं. कमल की बेलों के बड़े-बड़े पत्तों पर जल के बिंदु मोती के सदस्य चमकते रहते हैं. इस ताल के उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर वृक्षों की सघन छाया है.
प्रकृति अपने रंगीन आवरण में इस महल को ढंके हुए है. समस्त वातावरण में प्रकृति का साम्राज्य छाया हुआ है. इंग्लैंड के प्रसिद्ध कवि कीट्वस , टेनीसन आदि ने भारत के संबंध में जो कुछ भी अपनी कल्पना शक्ति से चित्रित किया और इसकी प्रशंसा के गीत गए- वह सब कुछ इस महल के चारों ओर फैला हुआ है. भांति-भांति के पक्षियों के गीत हमारे मन को प्रसन्नता से भर देते हैं. कोठी (दुर्ग) के विशाल गृह का रूप-सौंदर्य आधुनिक नारी के कृत्रिम श्रृंगार के सदृश है और सिंहपुर महल का सौंदर्य एक ग्राम्य बाला के अनुपम सौंदर्य के समान है, प्राकृतिक साधनों से ओतप्रोत है.
विन्ध्याचल की गोद में बसे हुए सुंदर महल और घने वृक्षों से आच्छादित शैलमालाओं की शोभा अवर्णनीय है. स्कॉटलैंड में वन के मध्य में बनी हुई रानी की विला (कैसिल) के अनुपम सौंदर्य की छटा आनंद यहां पर लिया जा सकता है. जब ग्वालियर स्टेट में सिंधिया का शासन काल था उस समय अंग्रेजों के लिए इस स्थान का विशेष आकर्षण था. 25 दिसंबर के अवसर पर ग्वालियर के रेजीडेंट तो बहुधा यहां पर आया ही करते थे. कहा जाता है कि एक बार कमांडर-इन-चीफ भी चंदेरी के इस महल में ठहरे थे. उनके स्वागत में चंदेरी के सिंहपुर महल के मार्ग को झाड़ियों से सजाया गया था और एक बाजार का भी आयोजन किया गया था.
इस महल ने दिसंबर के महीने में, विदेशी महिलाओं के गुनगुनाते गीत का आनंद लिया है. समय परिवर्तनशील है. प्रकृति में भी परिवर्तन का क्रम बना हुआ है. वर्तमान समय के राजनीतिकों तथा अधिकारियों के प्रभाव से, महल के सौंदर्य का ह्नास हुआ. प्रकृति भी कुछ
[पृ.57]:अन्यमनस्क हो गई है. अपने विगत वैभव तथा आनंद को समेटे हुए यह महल इस सरोवर में खिलते हुए पुष्पों को निर्निमेश उदासी भरे नेत्रों से निहारता रहता है.
निस्संदेह चंदेरी का यह महल प्राकृतिक सौंदर्य-सुषमा से भरपूर सुंदरतम स्थान रहा है. अब तो यहां पर केवल स्थापत्य विभाग का एक छोटा सा संग्रहालय रह गया है.
Notable persons
External links
References
- ↑ http://www.onefivenine.com/india/villages/Ashoknagar/Chanderi/Singhpur-Tal
- ↑ शिवपुरी-नरवर-चंदेरी का दिग्दर्शन, लेखक: डॉ. संजय मजूपुरिया, सुधा प्रकाशन ग्वालियर, 1992. p.38
- ↑ शिवपुरी-नरवर-चंदेरी का दिग्दर्शन, लेखक: डॉ. संजय मजूपुरिया, सुधा प्रकाशन ग्वालियर, 1992. p.54-57