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Sahajarao Ranwa

From Jatland Wiki

Sahajarao Ranwa or Sahaja founded Saamikhera in 1055 AD.

Variants

History

According to the records of Bard of Ranwa clan, This village was founded by Ranwa Jats. Sahajarao was the ancestor of Ranwa gotra who left Nagaur in vikram samvat 1111 (1055 AD) and founded village Saamikhera and constructed fort and Shiva temple there.

Later on 12 sons of Sahaja founded the villages 1. Jachas, 2. Bhikhanwasi, 3. Khanadi, 4. Karkedi, 5. Maulasar, 6. Makrana, 7. Bai, 8. Buchyasi, 9. Bhurbhura, 10. Jabdinagar, 11. Chausal and 12. Hirani.

इतिहास

नागौर के शासक पीपादेव दहिया ने 1027-1065 ई. तक शासन किया। पीपा देव दहिया का विवाह राजा मैहण जाखड़ की पुत्री देऊ जाखड़ से सम्पन्न हुआ। राव पीपादेव व देऊ जाखड़ के चार पुत्र हुए। जिनमें सहज राव, मंडदेव (मानदेव), गंगदेव, राजदेव हुए। सहज राव के वंशज रणवा, मंडदेव (मानदेव) के वंशज मण्डीवाल, गंगदेव के वंशज गुगल, राजदेव के वंशज रोजा (राज) बने।

मलेसी रणवां शिलालेख 1501 AD, संवत 1558 वर्ष चैत बदी 5 सोमवार

सहज राव ने नागौर से प्रस्थान कर विक्रमी सम्वत 1111 (1054 ई.) में वर्तमान खूड के पास माघ सुदी बृहस्पत पंचमी को सामी खेड़ा (बड़ा प्रशासनिक क्षेत्र) बसाया। सामी के पश्चिम में डूंगरी (पहाडी) पर गढ़ बनवाया। गढ़ के उत्तर दिशा में डूंगरी पर शिव मंदिर बनवाया। रणवा गढ़ की बुर्ज व शिव मंदिर आज भी विद्यमान है। रणवा वंश के झुंझार वीर मलेसी रणवां देव स्थल, झुंझार वीर भीम सिंह रणवां व सती माता सन्ध्या की देवली (देवस्थली) व दर्जनों शिलालेख मौजूद है। सामी गाँव में रणवा वंश की कोलडी भी मौजूद है। सामी गाँव में रणवा वंश के प्राप्त शिलालेखों के आधार पर लगभग सेंकड़ों वर्ष तक रणवा वंश का शासन रहा।

शिव मंदिर की पूजा-अर्चना हेतु 200 बीघा जमीन मंदिर के वास्ते रखी गई जो सरकारी रिकॉर्ड में है। - सामी में गोचर भूमि 400 बीघा जमीन छोड़ी गई है जो वर्तमान में भी है।

सामी खेड़ा के अलावा रणवा वंश के वंशजों ने 12 खेड़े और बसाए जिनमें जाचास, भीखणवासी, करकेड़ी, खानड़ी, मौलासर, बाय, बुच्चासी, हीराणी, चौसला, मकराना, भूरभूरा, जाबदी नगर इस तरह 12 खेड़ी से ही रणवा वंश पूरे भारत वर्ष में फैला। [1]

शास्त्रों में कहा भी गया है कि अच्छे काम के लिए विस्तार हो बहुत जरूरी है। इस प्रकार यहाँ से सम्पूर्ण भारत वर्ष में रणवा वंश का विस्तार हुआ है।

रणवा वंश के बही-भाट के रिकॉर्ड के आधार पर सम्पूर्ण भारत वर्ष में लगभग 70 हजार रणवा परिवार निवास करते है। सभी रणवा परिवारों में भावनात्मक जुड़ाव है।

सन 2000 में मनसुख रणवा के नेतृत्व में रणवा परिवार की एक कमेटी गठित की गयी। जिसका उद्देश्य रणवा वंश की जन्मस्थली सामी गाँव अपने पूर्वजों की धरोहर का जीर्णोद्वार कर संजोकर रखना था। सामी गाँव का रणवा शिव मंदिर, धधीमती माता का मंदिर, गढ़ की बुर्ज, मोक्षधाम के समीप स्थित शाही कुँआ, झुंझार वीर मलेसी रणवां देव स्थली, झुंझार वीर भीम सिंह रणवा व सती सन्ध्या माता की देव स्थली आदि का संरक्षण करने हेतु कमेटी को साथ लेकर रणवा परिवारों से सहयोग राशि लेकर जीर्णोद्वार का कार्य करवाया गया था। राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, मध्यदेश के रणवा परिवारों ने सहयोग राशि आहूत की गई थी।

In Rajatarangini

Rajatarangini[2] mentions that during the rule of king Kalasha in Kashmir there was Sahajapala king of Rajapuri who died and was succeeded by his son Sanggramapala. Sahaja was Kalasha's relative, who perished in the affray.[3]


Rajatarangini[4] mentions thatUdaya and Dhanyaka, Kshatriyas, born of Ichchhita family, and Udayabrahma and Jajjala, lords of Champa and Vallapura; Tejahsalhana, the chief of the Hamsa family, who lived at Harihaḍa, and Savyaraja and others of Kshatrikabhinjika ; Nila and others, sons of Viḍāla, born of the family of Bhāvuka ; Ramapala of Sahaja and his young son ; — these and other warriors of renowned families were eager for the well contested battle, and opposed on all sides the enemies who besieged the city. (VIII,p.92-93)

Malashi Ranwa Inscription of the year s.v.1485 (1428 AD)

There is an inscription of the year s.v.1485 (1428 AD) of a Ranwa warrior named Malashi in village Sami at Shiva temple.

The book Arabic, Persian and Urdu Inscriptions of West India by Dr. Ziyaud-Din Abdul-Hayy Desai provides a comprehensive list of more than 2,000 inscriptions from West Indian states. This book mentions about the Inscription of Sami at At S.No. 254.[5]

External links

References


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