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Pataura

From Jatland Wiki
(Redirected from Patora)
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

District map of Satna
Pataura - Jiganhat - Satna - Satna River

Pataura (पतौरा) is an ancient historical village in Unchehara tehsil in Satna district in Madhya Pradesh. Pataura is the site of the Patiyandai Temple near Sinduriya Hill. Alexander Cunningham has identified Patiyandai with the goddess Pishtapurika (पिष्टपुरिका देवी) of the Gupta period mentioned in the Khoh Copper-plate Inscription of Maharaja Samkshobha (528-529 CE).[1] [2]

Variants

Location

Pataura is a village in Sohawal tehsil in the Satna district of Madhya Pradesh state, India. It belongs to the Rewa Division. It is located 8 km towards the south from the district headquarters Satna and 17 km from Sohawal. Piprokhar (3 km), Dhawari (4 km), Gangapuram (4 km), Dharmdas Colony (4 km), and South Pateri (5 km) are the nearby villages to Pataura.[3]

Origin

History

Pataura (पतौरा) is an ancient historical village in Unchehara tehsil in Satna district in Madhya Pradesh. Pataura is the site of the Patiyandai Temple near Sinduriya Hill. Alexander Cunningham has identified Patiyandai with the goddess Pishtapurika (पिष्टपुरिका देवी) of the Gupta period mentioned in the Khoh Copper-plate Inscription of Maharaja Samkshobha (528-529 CE).[4] [5]

Jat Gotras Namesake

नागौद रियासत की गढ़ी

नागौद राज्य में 18 गढ़ियां थीं। इनमें से एक प्रतिहार कालीन गढ़ी अब भी यहाँ विद्यमान है किंतु उसकी अवस्था जर्जर है। [11] [12]

नागौद के पहाड़

सिंदुरिया: सिंदुरिया पहाड़ सतना-पतौरा मार्ग पर पतौरा के समीप स्थित है। पहाड़ के चारों ओर धौरा, मौहार, गुढुवा, तथा पतौरा ग्राम स्थित हैं। इसी पहाड़ पर पतियानदाई का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। [13]

नागौद में प्राचीन स्थल: पतौरा

डॉ. अनुपम सिंह[14] ने उल्लेख किया है... 6. पतौरा- [पृ.120]: उचेहरा से 16 किलोमीटर उत्तर, पिथोराबाद से 6 किलोमीटर और सतना से 14 किलोमीटर की दूरी पर सतना-पौड़ी मार्ग पर पतौरा का ऐतिहासिक ग्राम सिंदुरिया पहाड़ी की तलहटी में स्थित है। यहाँ हटवा नामक स्थान को देखने से प्रतीत होता है कि यहाँ पर कभी एक सुव्यवस्थित बाजार लगता रहा होगा।

[पृ.121]: सिंदुरिया पहाड़ी के तल पर एक छोटा मंदिर है जिसे वर्तमान में प्रतियान दाई का मंदिर कहा जाता है। कनिंघम का अनुमान है कि यह गुप्तकालीन मंदिर है और इसका अभिज्ञान उच्चकल्प शासकों के ताम्रपत्रों में उल्लेखित पिष्टपुरिका देवी के मंदिर से किया जा सकता है। महाराज संक्षोभ (528-529 ई.) के ताम्रपत्र में वर्णित पिष्टपुरिका देवी विष्णु-प्रिया लक्ष्मी का एक स्थानीय रूप है। दुर्भाग्यवश पिष्टपुरिका देवी की मूर्ति अब मंदिर में नहीं है। अंबिका के चतुर्दिक 23 अन्य शासन देवियों का सुरुचिपूर्ण अंकन है तथा सभी देवियों के नाम भी प्रारंभिक नागरी लिपि में लिख दिए गए हैं। नागौद राज्य के दीवान साहब लाल भार्गवेंद्र प्रताप सिंह की सहमति से यह मूर्ति श्री ब्रजमोहन व्यास के द्वारा इलाहाबाद संग्रहालय ले जाई गई थी और अब भी वहीं सुरक्षित है।

पतौरा पुराने नागौद राज्य के प्रथम श्रेणी के उबारीदारों का मुख्यालय था। यह इलाका राजा शिवराज सिंह (1780-1818) ने अपने अनुज लाल महिपाल सिंह को 1788 ई. में प्रदान किया था।

कचलोहा के परिहारों की वंशावली

ग्राम कचलोहा (लहुरी पट्टी) के परिहार: मुख्य ठिकाना पतवारा जिन्होंने नाबालिक राजकुमार को मऊ सहानिया से लाकर नागौद राज्य की स्थापना में सहायता की। बाद में राज्य से विवाद सुपिया (बघेल) में एक पुत्र की शादी के समय राज्य द्वारा पतवारा गढ़ी में हमला हुआ। पुत्र सुपिया में रह गए। शेष लोग राज्य के सैनिकों से लड़ते हुए पतवारा में मारे गए। बाद में सुपियों के तीन पुत्र हुए। एक सुपिया में रह गए (जाalim सिंह), दो को मनाकर वापस नागौद लाया गया। एक को टीकर का आधा गाँव मिला, दूसरे को कचलोहा मिला।[15]

Population

Notable Persons

External Links

References

  1. Fleet, John F. Corpus Inscriptionum Indicarum: Inscriptions of the Early Guptas. Vol. III. Calcutta: Government of India, Central Publications Branch, 1888, 115-116.
  2. Dr Anupam Singh - Vindhyakshetra Ke Pratihar Vansh Ka Itihas, 2006, p.121
  3. https://www.onefivenine.com/india/villages/Satna/Sohawal/Pataura
  4. Fleet, John F. Corpus Inscriptionum Indicarum: Inscriptions of the Early Guptas. Vol. III. Calcutta: Government of India, Central Publications Branch, 1888, 115-116.
  5. Dr Anupam Singh - Vindhyakshetra Ke Pratihar Vansh Ka Itihas, 2006, p.121
  6. Fleet, John F. Corpus Inscriptionum Indicarum: Inscriptions of the Early Guptas. Vol. III. Calcutta: Government of India, Central Publications Branch, 1888, 115-116.
  7. Dr Anupam Singh - Vindhyakshetra Ke Pratihar Vansh Ka Itihas, 2006, p.121
  8. Fleet, John F. Corpus Inscriptionum Indicarum: Inscriptions of the Early Guptas. Vol. III. Calcutta: Government of India, Central Publications Branch, 1888, 115-116.
  9. Dr Anupam Singh - Vindhyakshetra Ke Pratihar Vansh Ka Itihas, 2006, p.121
  10. डॉ. अनुपम सिंह - विंध्य क्षेत्र के प्रतिहार वंश का इतिहास (9वीं शताब्दी से वर्तमान तक), गुढुवा, जिला सतना (मध्य प्रदेश), प्रकाशक: अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, प्रथम संस्करण: 2006, पृ.112
  11. डॉ. अनुपम सिंह - विंध्य क्षेत्र के प्रतिहार वंश का इतिहास (9वीं शताब्दी से वर्तमान तक), गुढुवा, जिला सतना (मध्य प्रदेश), प्रकाशक: अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, प्रथम संस्करण: 2006, पृ.116
  12. प्रतिहार राजपूतों का इतिहास, p.47
  13. डॉ. अनुपम सिंह - विंध्य क्षेत्र के प्रतिहार वंश का इतिहास (9वीं शताब्दी से वर्तमान तक), गुढुवा, जिला सतना (मध्य प्रदेश), प्रकाशक: अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, प्रथम संस्करण: 2006, पृ.112
  14. डॉ. अनुपम सिंह - विंध्य क्षेत्र के प्रतिहार वंश का इतिहास (9वीं शताब्दी से वर्तमान तक), गुढुवा, जिला सतना (मध्य प्रदेश), प्रकाशक: अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, प्रथम संस्करण: 2006, पृ.120-121
  15. डॉ. अनुपम सिंह - विंध्य क्षेत्र के प्रतिहार वंश का इतिहास (9वीं शताब्दी से वर्तमान तक), गुढुवा, जिला सतना (मध्य प्रदेश), प्रकाशक: अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, प्रथम संस्करण: 2006, पृ.351

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