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Malaketu

From Jatland Wiki
(Redirected from Malket)
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Malaketu (मालकेतु) is the name Aravalli hills near Udaipurwati in Jhunjhunu district of Rajasthan.

Origin

Variants

History

मालकेतु

मालकेतु (AS, p.738): महाभारत तथा पद्मपुराण में उल्लिखित एक पर्वत जो अर्वली पहाड़ राजस्थान का ही कोई भाग जान पड़ता है. [1]

शेखावाटी की पहाड़ी श्रेणियां

रतन लाल मिश्र[2] ने लिखा है: [पृ.2]:शेखावाटी गौरी बालुका राशि के उन्नति टीलों से भरा-पूरा भूभाग है जहां केवल दक्षिणी भाग सघन वनावली से छाई गिरिपंक्तियों से आवृत्त है. यह पंक्ति


[पृ.3]: सिंघाना से सांभर तक फैली हुई है तथा इसे राज्य के और भागों से अलग कर देती. [3] कुछ दूर उत्तर की तरफ लोहार्गल के पहाड़ हैं जिनके सबसे ऊंचे शिखर को मालकेतु कहते हैं.[4] यह पहाड़ी श्रृंखला सिंघाना से खंडेला, उदयपुर, शाकंभरी, लोहार्गल, रघुनाथगढ़, सांगरवा, रेवासा, हर्ष आदि स्थानों से निकलती हुई सांभर झील तक चली जाती है. इस पहाड़ी श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी रघुनाथगढ़ की चोटी है जो 3450 फीट ऊंची है. हर्ष पर्वत शिखर 2998 फीट तथा लोहार्गल की बरखंडी की चोटी लगभग 3000 फीट ऊंची है. [5]

मालकेतु परिचय

राजस्थान के शेखावाटी अंचल में मालकेतु पर्वत की एक विस्तृत, मनोरम घाटी में विभिन्न पेड़-पौधों, लता-गुल्मों के बीच एक पहाड़ी नदी शंकरा या शक्रधारा के किनारेमां शाकंभरी देवी का भव्य मंदिर है. यह चारों ओर से आम और कनेर के वृक्षों से घिरा है. पहाड़ों से घिरी यह हरी-भरी घाटी और जल के स्रोत (नदी और कुंड) प्राचीनकाल से ही तपस्वियों और साधकों को आकर्षित करतेरहे हैं. मालकेतु पर्वत का जिक्र महाभारत के सभा पर्व एवं वन पर्व, पद्म पुराण, वायु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी है.[6]

अरावली पर्वत शृंखलाओं को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है. झुंझुनूं जिला के उदयपुरवाटी के पास इसे मालकेतु पर्वत के नाम से जाना जाता है.यहां यह पर्वत काफी चौड़ाई लिये हुए है. मालकेतु पर्वत की अन्य घाटियां भी बेहद मनोरम हैं. तपस्या और साधना के लिए उपयुक्त होने के कारण ये घाटियां नाथ संप्रदाय के साधु-संन्यासियों के आकर्षण का केंद्र रही हैं. इस क्षेत्र में साधु-संतों ने कई जगहों पर अपनी गद्दियां कायम कीहै. नाथ संप्रदाय के मुख्य ईष्ट भगवान शंकर हैं. वे शक्ति की भी उपासना करते हैं. इसलिए इस क्षेत्र में बहने वाली छोटी-छोटी जलधाराओं और कुंडों को पवित्र तीर्थ माना जाता है.[7]

External links

References

  1. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.738
  2. Shekhawati Ka Navin Itihas/1.Prakritik Parivesh Evam Sima Vistar, p.2
  3. जयपुर राज्य का भूगोल - अनंत लाल मुखर्जी पृ.45
  4. वही पृ.47; शास्त्री पृ.5
  5. शेखावाटी का भूगोल-नारायण सिंह, पृ.9
  6. प्रभात खबर, 11.11.2018, लेखक हरि प्रसाद लाटा
  7. प्रभात खबर, 11.11.2018, लेखक हरि प्रसाद लाटा