देओला दादा पिलानिया
- इस विषय पर अंग्रेज़ी में जानकारी के लिए, देखें: Deola Dada Pilania
देओला दादा पिलानिया

| Name | Deola Dada Pilania |
|---|---|
| Active | 17th Century |
| Was | Warrior (Cow Protector) |
| Born in | 1611 AD, Rajasthan |
Martyrdom : 1643 AD
परिचय
देओला दादा पिलानिया (1611–1643 ईस्वी) पिलानिया गोत्र के एक सम्मानित लोक देवता और योद्धा थे । उन्हें झोझू कलाँ (हरियाणा) में गायों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए याद किया जाता है । देओला दादा का जन्म पिलानी, जिला झुंझुनू (राजस्थान) में हुआ था; उनके पिता राम सिंह पिलानिया और माता राजकोर पिलानिया थीं । उनकी बहादुरी और निष्ठा के कारण उन्हें आज एक लोक देवता के रूप में पूजा जाता है ।
Variants
लोक देवता देओला दादा
देओला दादा (1611 - 1643)
पिता का नाम - राम सिंह पिलानिया
माता का नाम - राज कौर
जन्म स्थान - पिलानी (1611)
मृत्यु स्थान - झोझू कलां (1643)
आयु - 32 वर्ष
वंश - पिलानिया
झोझू कलां मैं उनका एक मंदिर भी है ।
लोक देवता : देओला दादा पिलानिया वंश के लोक देवता हैं ।
देओला दादा की घोड़ी : देओला दादा की घोड़ी का नाम रामप्यारी था. देओला दादा को यह घोड़ी उनके पिता ने दी थी. इस घोड़ी का रंग सफेद था.
पिलानिया वंश के लोक देवता देओला दादा हैं. उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर कसाइयों से गुजरी लीलावती की गायों की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी ।
एक दिन देओला दादा अपने समधी छज्जू राम से मिलने उनके गाँव गए थे । मिलकर जब वे वापस अपने गाँव लौट रहे थे, तभी रास्ते में उन्होंने देखा कि कुछ कसाइयों ने एक महिला गुजरी लीलावती की गायों को जबरन ले जा रहे थे । देओला दादा से यह अन्याय देखा नहीं गया । उन्होंने बिना किसी भय के कसाइयों का विरोध किया और लीलावती की गायों को छुड़ाने के लिए उनसे युद्ध किया । संघर्ष के दौरान देओला दादा ने गायों की रक्षा करते हुए अद्भुत वीरता और साहस का परिचय दिया । गायों को बचाते-बचाते देओला दादा वीरगति को प्राप्त हो गए । उनके इस बलिदान के कारण वह एक गौ-रक्षा का अमर प्रतीक बन गए है, जिसे आज भी लोग श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं ।
देओला दादा के भाइयों के नाम -
- वीर प्रताप पिलानिया
- वीर उदय पिलानिया
- वीर रतन पिलानिया
इन्होंने अपने बड़े भाई देओला दादा के साथ मिलकर कसाइयों से गुजरी लीलावती की गायों की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी ।
देओला दादा की वंशावली


राव केहरी सिंह पिलानिया
पुत्र : कुमार भादरमल पिलानिया और कुमार गंगा पिलानिया
पुत्री : राधा देवी
राव भादरमल पिलानिया
पुत्र : कुमार लक्ष्मण पिलानिया और कुमार विजयपाल पिलानिया
पुत्री : पालू देवी, सरबती देवी
राव लक्ष्मण सिंह पिलानिया
पुत्र : कुमार दयाराम पिलानिया
पुत्री : हंसा देवी
राव दयाराम पिलानिया
पुत्र : कुमार राम पिलानिया और नैन सुख पिलानिया
राव राम पिलानिया
पुत्र :
• कुमार देओला दादा पिलानिया
• कुमार प्रताप पिलानिया
• कुमार उदय पिलानिया
• कुमार रतन पिलानिया
राव देओला दादा पिलानिया
भाई :
• वीर प्रताप पिलानिया
• वीर उदय पिलानिया
• वीर रतन पिलानिया
देओला दादा की आरती
जय देओला दादा, जय जय देओला दादा । वीर कुल भूषण आप हो, जाटों के रखवाला ॥
धर्म-न्याय के पथ पर चले, सत्य की राह दिखाई । अत्याचारी से लड़े सदा, जनता की लाज बचाई ॥
पिलानिया कुल दीप आप, शौर्य आपका गाथा । बल-बुद्धि-पराक्रम से भरा, हर मन में विश्वासा ॥
भक्तों पर कृपा सदा रखें, संकट हरने वाले । जो भी ध्यावे नाम तेरा, काज सभी बनवाले ॥
गाँव-गाँव में नाम तेरा, श्रद्धा से गुण गाए । देओला दादा की जय बोलो, मनवांछित फल पाए ॥
आरती उतारें शीश झुकाएँ, चरणों में बलिहारी । जय हो देओला दादा जी की, जय जय जय अविनाशी ॥
देओला दादा के छंद
देओला दादा के छंद (लोक-वीर शैली)
मरुभूमि की माटी बोली, रण की कथा सुनाए, पिलानिया कुल का दीपक, देओला दादा कहाए । धर्म ध्वजा ऊँची रखी, अन्याय से ललकारा, वीरता का जीवित प्रतीक, जन-जन ने मनुहारा ।
केहरी सिंह की वंश धरा, गौरव की पहचान, लक्ष्मण–दयाराम चले, बढ़ता गया सम्मान । राम पिलानिया के घर, जन्मा तेज प्रताप, देओला दादा नाम से, काँपे झूठ-पाप ।
न तलवार से केवल जीते, न ही रक्त बहाया, न्याय, नीति और साहस से, हर संघर्ष निभाया । कमज़ोरों का बने सहारा, बलवानों को समझाया, लोकमानस में देव समान, दादा नाम बसाया ।
जहाँ अन्याय ने सिर उठाया, वहाँ गर्जना गूँजी, देओला दादा की हुंकार, रणभूमि में पूँजी । सत्य पंथ के पथिक रहे, झुके नहीं अभिमान, इस कारण आज भी जीवित, उनका यश-गान ।
पीढ़ी-पीढ़ी जो गाई जाए, ऐसी अमर कहानी, देओला दादा लोक-वीर, पिलानिया की शान निराली । माटी, मान और मर्यादा, जिनका था संकल्प, वह दादा आज भी पूजे, इतिहास और जनकल्प ।
देओला दादा के मंदिर

- झोझू कलां ।[1]
- पिलानी तहसील ।
- हिंद पब्लिक स्कूल , पिलानी ।
- सुरेती पिलानिया ।[2]
- ऊंचागांव ।
- बिशनपुरा ।
- खारिया ।
- पिलवा ।
- हमीरपुर ।
- पिलानी की पहाड़ी के ऊपर ।
देओला दादा की जयंती
देओला दादा की जयंती भाद्रपद की चतुर्दशी शुक्ल पक्ष को बनाई जाति है.[3]
झोझू कलां में उनका एक मंदिर भी है.[4]
मेले का स्थान : झोझू कलां उनका मेला लगता है[5].
समय : मेला भाद्रपद सुदी चतुर्दशी शुक्ल पक्ष को लगता है.
पूजा : मेले के समय उनकी जोर-सोर से पूजा होती है और भक्त अपनी श्रद्धा से उनकी आरती करते हैं.
देओला दादा की शिक्षा
देओला दादा के गुरु का नाम पीरू राम जी था.[6]
पीरू राम जी ने ही उन्हें शस्त्र शिक्षा सिखाई और धर्म - अधर्म का ज्ञान दिया था.[7]
पीरू राम जी ने ही उन्हें तलवार बाजी और धनुष विद्या का ज्ञान दिया था.[8]
उन्होने ही देओला दादा जी को दीक्षा दि थी.[9]
Deola Kalan
Deola Kalan Village Dedicated to Deola Dada Pilania this Village was establish by Pilania Jats and Dudi Jats.[10]
Gallery
External links
Source
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References
- ↑ Pilaniakuldevta p1
- ↑ Pilania Dynasty p2
- ↑ JatSamaj p3
- ↑ JatRaja p4
- ↑ Unchagaon Dynasty p5
- ↑ Pilani p6
- ↑ Jat Warriors p7
- ↑ PilaniaJatSamaj p8
- ↑ Pilania Kul Guru p9
- ↑ PilaniaJat History Pilani p10
- ↑ Deola Dada Family deity of Pilania p11.
- ↑ Archival Revenue Folk God Records p12.
- ↑ Deola Dada Pilania p13.
- ↑ Deola Dada Pilania famous for cows protecting p14.
- ↑ He was the Member of Pilania Dynasty p15.
- ↑ Deola Dada Recorded in Pilania Clan Record p16.
- ↑ Deola Dada was Community protected god p17.
- ↑ jhujhu Kalan Deola Dada Mandir p18.
- ↑ pilania Clan Family God p19.
- ↑ Pilania Clan local Hero p20.
- ↑ Deola Dada Recorded in pilani history p21.
- ↑ Deola Dada Pilania recorded in government records p22.
- ↑ Deola Dada in Pilania family record p23.
- ↑ Deola Dada is Protected deity of Bahanpur (Historical Records) p24.
- ↑ Deola Dada was a warrior who died in Jhujhu Kalan p25.
- ↑ Deola Dada in Jat itihas Book p26.
- ↑ Deola Dada mention in Pilania itihas Book p27.
- ↑ Deola Dada add in Jatland Wiki p28.
- ↑ Deola Dada Ki Pad p30.
| Pilania Family Monuments |
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