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Harsha Parvata

From Jatland Wiki
(Redirected from Unchapahar)
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Map of villages around Harsh
Harsh - Harshnath Parvat - Khori Doongar - Mandawara - Kadma Ka Bas - Kashi Ka Bas - Raiwasa in Sikar, Rajasthan

Harsha Parvata (हर्ष पर्वत), also called Unchapahar or 'the High Hill,' is about five miles N.E. of Sikar in Rajasthan.

Variants

Description

"The surface of the top of the hill is about one mile long, by 100 yards average breadth, and shews many bare spots, where the secondary sandstone, coming to the surface, checks vegetation ; there are also large masses of felspar scattered in an unconnected manner over it. The whole surface of the hill, both sides and top, is covered with jungle of Dhau and Soldri, fifteen to twenty-five feet high, and thickly studded with clumps of cactus.[1]

हर्षनाथ-हर्षगिरि-हर्षनगरी

विजयेन्द्र कुमार माथुर[2] ने लेख किया है ...[p.1011]: हर्षनाथ प्राचीन नगर के अवशेष राजस्थान राज्य में सीकर के निकट स्थित हैं। स्थानीय अनुश्रुति के अनुसार यह स्थान पूर्वकाल में 36 मील के घेरे में बसा हुआ था। एक प्राचीन कहावत भी प्रचलित है-- जगमालपुरा हर्षनगरी, जीमै हाठ हजार मढ़ै गुदड़ी, [p.1012]: बमै तालाब बड़ी छतरी। वर्तमान में हर्षनाथ नामक ग्राम हर्षगिरि पहाड़ी की तलहटी में बसा हुआ है और सीकर से प्रायः आठ मील दक्षिण-पूर्व में हैं। हर्षगिरि ग्राम के पास हर्षगिरि नामक पहाड़ी है, जो 3,000 फुट ऊँची है और इस पर लगभग 900 वर्ष से अधिक प्राचीन मंदिरों के खण्डहर हैं। इन मंदिरों में एक काले पत्थर पर उत्कीर्ण लेख प्राप्त हुआ है, जो शिवस्तुति से प्रारम्भ होता है और जो पौराणिक कथा के रूप में लिखा गया है। लेख में हर्षगिरि और मन्दिर का वर्णन है और इसमें कहा गया है कि मन्दिर के निर्माण का कार्य आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी, सोमवार 1013 विक्रम सम्वत् (956 ई.) को प्रारम्भ होकर विग्रहराज चौहान के समय में आषाढ़ कृष्ण 15, 1030 विक्रम सम्वत (973 ई.) को पूरा हुआ था। यह लेख संस्कृत में है और इसे रामचन्द्र नामक कवि ने लेखबद्ध किया था। मंदिर के भग्नावशेषों में अनेक सुंदर कलापूर्ण मूर्तियाँ तथा स्तंभ आदि प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश सीकर के संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

हर्षगिरि पहाड़ी

हर्षनाथ राजस्थान राज्य में सीकर जिले के निकट स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। वर्तमान में हर्षनाथ नामक ग्राम हर्षगिरि पहाड़ी की तलहटी में बसा हुआ है और सीकर से प्रायः 14 किमी दक्षिण-पूर्व में है. स्थानीय अनुश्रुति के अनुसार यह स्थान पूर्वकाल में 36 मील के घेरे में बसा हुआ था।

हर्ष ग्राम के पास हर्षगिरि नामक पहाड़ी है, जो 3,000 फुट ऊँची है और इस पर लगभग 900 वर्ष से अधिक प्राचीन मंदिरों के खण्डहर हैं। इन मंदिरों में एक काले पत्थर पर उत्कीर्ण लेख प्राप्त हुआ है, जो शिवस्तुति से प्रारम्भ होता है और जो पौराणिक कथा के रूप में लिखा गया है। लेख में हर्षगिरि और मन्दिर का वर्णन है और इसमें कहा गया है कि मन्दिर के निर्माण का कार्य आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी, सोमवार 1030 विक्रम सम्वत् (956 ई.) को प्रारम्भ होकर विग्रहराज चौहान के समय में 1030 विक्रम सम्वत (973 ई.) को पूरा हुआ था। यह लेख संस्कृत में है और इसे रामचन्द्र नामक कवि ने लेखबद्ध किया था। मंदिर के भग्नावशेषों में अनेक सुंदर कलापूर्ण मूर्तियाँ तथा स्तंभ आदि प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश सीकर के संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

चाहमान शासकों के कुल देवता – हर्षदेव का यह मंदिर हर्षगिरी पर स्थित हैं तथा महामेरु शैली में निर्मित है। विक्रम संवत 1030 (973 ई.) के एक अभिलेख के अनुसार इस मंदिर का निर्माण चौहान शासक विग्रहराज चौहान के शासनकाल में एक शैव संत भावरक्त द्वारा करवाया गया था। मन्दिर में एक गर्भगृह, अंतराल, कक्षासन युक्त रंग मंडप एवं अर्द्धमंडप के साथ एक अलग नदी मंडप भी है। अपनी मौलिक अवस्था में यह मन्दिर एक शिखर से परिपूर्ण था जिसे क्रूर शासक औरंगजेब द्वारा तोड़ा गया और लूटा गया और मूर्तियां खंडित करी गई । वर्तमान खंडित अवस्था में भी यह मन्दिर अपनी स्थापत्य विशिष्टताओं एवं देवी-देवताओं की प्रतिमाओं सहित नर्तकों, संगीतज्ञों, योद्धाओं व कीर्तिमुख के प्रारूप वाली सजावटी दृश्यावलियों के उत्कृष्ट शिल्प कौशल हेतु उल्लेखनीय है। इस मन्दिर से संलग्न एक ऊंचे अधिष्ठान पर स्थित दूसरा मन्दिर उत्तर मध्यकालीन है, तथा शिव को समर्पित है। कुछ दूरी पर स्थित एक अन्य मन्दिर भैरव को समर्पित है।

External links

See also

References