Tarpura Didwana
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Tarpura (तारपुरा), is a medium-size village in Didwana tehsil of Nagaur district in Rajasthan.
Variants
- Tahirpura (ताहिरपुरा)
Location
It is situated 22km away from Didwana town and 122km away from Nagaur city. Khakholi is the gram panchayat of Tarpura village. Bugaliyon Ki Dhani is the neighbouring village. PIN Code of Tarpura is: 341506.
Origin
The Founders
History
Daulat Khan II (1626-1653 AD) - After death of Alaph Khan in 1626 AD his son Daulat Khan II got the nawabi. He founded village Daulatpura, now in Nagaur district. Daulat Khan II had 3 sons:1. Tahar Khan, 2. Mahar Khan, 3. Asad Khan. Eldest son Tahar Khan died during lifetime of Daulat Khan II. Village Tarpura Didwana was founded after Tahir Khan. Tahir Khan had 2 sons - 1. Sardar Khan and 2. Dindar Khan. [1]
इतिहास
रतन लाल मिश्र[2] ने लिखा है ....[पृ.155]: अल्फखां की मृत्यु के बाद उसका पुत्र दौलतखां (द्वितीय) (1626-1653) नवाब हुआ. बादशाह जहांगीर ने इसे मनसब देकर कांगड़ा में नियुक्त किया. यहां दीवान ने पहाड़ियों को मार भगाया और अपने थाने अविचल रूप से स्थिर रहा. उधर जहांगीर की मृत्यु के बाद शाहजहां दिल्ली गद्दी पर बैठा.
दौलतखां (द्वितीय) (1626-1653) 14 वर्षों तक कांगड़ा में रहा और फिर उसकी नियुक्ति काबुल और पेशावर में की गई. [3] दौलत खान का पुत्र ताहिरखां भी बादशाह का मनसबदार बन गया था. दौलतखां ने फतेहपुर के किले का जीर्णोद्धार करवाया था. इस समय किले के चारों ओर एक गहरी खाई भी बनवाई गई जिसे जल से पूर्ण किया गया. इसने अपनी देखरेख में अपने पिता के राज्य काल में एक सुंदर और विशाल बावड़ी फतेहपुर में बनवाई थी. इसे नागौर के शेख महमूद ने 1024 हिजरी में बनाई थी. यह बात बावड़ी पर लगे शिलालेख से ज्ञात होती है.
फूल महल से मगरिब की तरफ जनाना महलात का सदर दरवाजा है. उस पर अंदरूनी हिस्से में पूर्वी कोने में एक कुत्बा कुंदा है जिसे पता चलता है कि 1014 हिजरी में इस महल को दौलतखां द्वारा बनाया गया था. फूल महल भी दौलतखां द्वारा बनाया गया था. इस पर एक लेख भी खुदा हुआ था.
शाहजहां के यहां जोधपुर का अमरसिंह राठौड़ मनसबदार था. बादशाह के मीर मुंशी सलावतखान से झगड़ा होने पर भरे दरबार में उसने सलावत खान को मार डाला. गौड़ विट्ठल दास के लड़के अर्जुन ने धोखे से वार कर उसे गिराया तथा
[पृ.156]: गुर्जबदारों ने आकर उसका काम तमाम किया. यह घटना संवत 1701 (1644 ई.) श्रावण शुक्ल द्वितीया की है. [4]
अमरसिंह राठौड़ नागौर का अधिपति था. बादशाह ने नागौर खालसा करने के लिए ताहरखां को भेजा. वह सेना सजा कर गया. उधर बादशाह ने फरमान लिखकर दौलत खान को बुला भेजा. वह उस समय काबूल मुहीम पर था. ताहिरखां ने नागौर पहुंचकर वहां से राठौर को निकाल दिया और जयगढ़ में अपने डेरे कर लिए. ताहिरखां ने सं. 1703 (1646 ई.) में नागौर पर कब्जा किया था. [5] इसी समय दौलतखां भी आकर ताहिरखां के सम्मिलित हो गया.
इसके बाद दौलतखां को शहजादा मुराद के साथ बलखबुखारा की लड़ाई में भेजा गया. अपने आप अर्ज कर ताहिरखां भी पिता के साथ हो गया. यह लड़ाई सं. 1710 (1653 ई.) में हुई थी.[6] वहां से दौलतखां कंधार चला गया और ताहिर खां शाहजादे के पास रहा. यहां बीमारी से ताहिरखां का प्राणांत हो गया. इस दुख को सहने में असमर्थ होकर दौलतखां भी सं. 1710 (1653 ई.) में लड़ाई में अपने को बलिदान कर दिया. दौलतखां ने अपने नाम पर दौलतपुरा नामक गांव बसाया था.
ताहिरखां ने अपने नागौर शासन के काल में एक मस्जिद बनवाई थी जो किले के पास ही उत्तर में स्थित है. इस मस्जिद पर लगे एक अभिलेख के अनुसार इसका निर्माण हिजरी 1056 सन 1646 (1703 विक्रम) में किया गया था. [7] ताहिरखां ने अपने नाम से ताहिरपुरा गांव बसाया था. [8]
Jat Gotras
Population
According to Census-2011 information:
- With total 288 families residing, Tarpura village has the population of 1572 (of which 806 are males while 766 are females).[9]
Notable Persons
External Links
References
- ↑ Dinmani: Fatehpur parichay, page-45
- ↑ रतन लाल मिश्र - शेखावाटी का नवीन इतिहास, कुटीर प्रकाशन, मंडावा, झुंझुनू, राजस्थान, 1998, पृ.155-156
- ↑ कायम खां रासो भूमिका भाग पृ.30 फखरू तवारीख फारूखी पृ. 14
- ↑ कायमखां रासो टिपण्णी पृ.127 फखरू तवारीख फारूखी पृ. 14
- ↑ फतेहपुर परिचय पृ. 46 फुटनोट - सुन्दर ग्रंथावली पृ. 36
- ↑ वाही पृ. 47
- ↑ डॉ चागताई द्वारा सम्पादित ए. ई. मु. 1949-50 पृ.49
- ↑ कायम खां रासो भूमिका
- ↑ Web-page of Tarpura village at Census-2011 website
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