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Swami Sachchidanand Dharkundi

From Jatland Wiki
Author:Laxman Burdak, IFS (R)
स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज, धारकुंडी आश्रम

स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज का परिचय

परमहंस आश्रम धारकुंडी - बीरसिंहपुर से 20 किलोमीटर उत्तर की ओर धारकुंडी नमक अत्यंत प्राचीन तीर्थ स्थल और तपस्थली है जहां पर पत्थरों की गुफा से 10 हॉर्स पावर का पानी बारहों माह बहता रहता है. वर्तमान में यहां पर परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी विराजमान हैं. स्वामी सच्चिदानंद जी धारकुंडी महाराज 1 जनवरी 2024 को 100 वर्ष के थे अब 102 वे वर्ष की आयु के हैं। स्वामी जी परमहंसः हैं जिन्हें दिव्य आध्यात्मिक अनुभव है। स्वामीजी हमेशा लोगों को सत्कर्म करने और सच्चरित्रता से जीवन निर्वाह करने, ईश्वर को ध्यान से प्राप्त करने की शिक्षा देते हैं। हृदय में स्वास प्रस्वास में ईस्वर को जपा जाता है। स्वामीजी के प्रवचनों को पुस्तक रूप में मानस नाम से प्रकाशित किया गया है। इनके गुरुभाई स्वामी अड़गड़ानंद जी ने यथार्थ गीता लिखी है जिसमें उनके गुरु परमानंद जी तथा धारकुंडी सरकार का भी बहुमूल्य योगदान है। अड़गड़ानंद जी ने एक और पुस्तक जीवनादर्श एवं आत्मानुभूति नाम से लिखी है जिसमें परमानंद जी के जीवन और साधक रूप में वृत्ति तथा धारकुंडी महाराज के ब्रह्मचारी जीवन पर प्रकाश डाला है।[1]

स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज का स्वर्गवास

07.02.2026 दोपहर 12 बजे पूज्य सच्चिदानंद जी महाराज धारकुंडी सरकार 102 वर्ष की आयु में मुंबई में ब्रह्मलीन हो गए। 09.02.2026 को उनकी समाधि परमहंस आश्रम धारकुंडी धारकुंडी में.[2]

श्रद्धांजलि

महान संत परामहंसः स्वामी सच्चिदानंद धारकुंडी महाराज समर्थ सद्गुरु है जिन्होंने ने 102 वर्ष की अवस्था मे कल 7.2.2026 को ब्रह्मलीन हो गए । 1 जनवरी 1925 में जन्मे और समर्थ गुरु परमानंद परामहंसः महाराज के शिष्य बनकर घोर तपस्या कर नवम्बर 1956 में धारकुंडी आश्रम के निर्जन गुफा में आये और अपनी तपश्या से उस स्थल को पुनः जाग्रत कर दिया। करोड़ो उनके शिष्य बने जिनको उन्होंने हमेशा सन्मार्ग सिखाया और उनकी सीख में कही कोई ढोंग ढपोसला नही । कर्म करने सच्चरित्र रहने और अपने इष्ट के नाम जप का ही मंत्र बताते थे।

मेरा उनसे मिलना 1974 में हुआ और उनसे लगातार संपर्क बना रहा । उनकी ही कृपा और मार्गदर्शन में एक छोटे गाव का गरीब लड़का शिक्षक से रेंजर और भारतीय वन सेवा में जाकर उच्च पद प्राप्त किया। यह भौतिक उपलब्धि थी । लेकिन उनके द्वारा जो संस्कार के बीज डाले गए कि गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए भी आप ईश्वर के मार्ग में चल सकते है समसज सेवा के साथ ही ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकते हो । धारकुंडी के सरकार अनंत विभूषित श्री श्री 1008 श्री सच्चिदानंद स्वामी जी के बारे में बोलनेकी मेरी सामर्थ्य नही है । वो कृपा की मूर्ति देश के अग्रगण्य संत थे ।उनकी शक्ति और आध्यात्मिक सक्ति अनंत होते हुए भी कभी भी चमत्कार नही दिखाया । जबकि उनके दर्शन मात्र से हम पवित्र हो जाते थे । पाप कट जाते और मन निर्मल हो जाता।

भले वो ब्रह्मलीन हो गए हो लेकिन उनकी तपोस्थली आज भी उसी ऊर्जा से ओत प्रोत है। धारकुंडी आश्रम निर्मल परम सुंदर आश्रम है जिस जगह जाकर आपको स्वतः वैराग्य हो जाएगा। दर्शनीय स्थल , आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र है अवश्य देखने लायक है जो सतना जिले मुख्यालय सेलगभग 70 किलोमीटर दूर है । माणिक पुर उत्तर प्रदेश से 10 किलोमीटर गहन वन में स्थित है जहां गुफा से 10 हॉर्स पावर से अधिक ताकत से पानी सदा निकलता है।

रामगोपाल सोनी, IFS (R)

गैलरी

यह भी देखो

बाहरी कड़ियाँ

सन्दर्भ

  1. ↑ पुस्तक: राम वन गमन (पुनरावलोकन), लेखक: डॉ. रामगोपाल सोनी IFS: , प्रकाशक: ऋषिमुनि प्रकाशन, उज्जैन, प्रथम संस्करण: 2021, ISBN: 9788794990338, पृष्ठ-103
  2. ↑ धारकुंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज 102 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन

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