Nihaldevi
| Author:Laxman Burdak, IFS (R) |


Nihaldevi (निहाल देवी) is site of temple in village in Nihalgarh of Guna tahsil in Guna district in Madhya Pradesh.
Variants
- Nihalgarh (निहालगढ़)
Location
Nihalgarh is a village located in Guna tehsil of Guna district in Madhya Pradesh, India. It is situated 65km away from Guna.
Jat Gotras Namesake
- Nihala (निहाला) (Jat clan) → Nihaldevi (निहाल देवी) is a village in Bamori tahsil of Guna district in Madhya Pradesh. Author (Laxman Burdak) visited it on 27.04.1999 .
Visit by Author
Author (Laxman Burdak) visited it on 27.04.1999
History

Nihalgarh Fort is said to have been founded by Raja Nihal Singh about 300 years back. Not much historical details are available.
निहाल देवी


गुना (बमोरी). जिले में मातारानी के दो प्रमुख स्थलों में से निहाल देवी की अपनी खास जगह है. ये मंदिर जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर बमोरी तहसील के गांव सिरसी के पास है. निहालदेवी मंदिर 150 फीट ऊंची पहाड़ी पर सीमावर्ती गुणा जिले की सीमा पहाड़ी पर घने जंगल के बीच विराजमान है. यहाँ पर सालभर होते हैं भंडारे. 1700 वर्गफीट में बना हुआ है यह मंदिर जो 4983 हैक्टे. जंगल से घिरा हुआ है. सिरसी से निहालदेवी मंदिर तक वन विभाग द्वारा सड़क बनाई गयी है. इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल इससे जुड़े किस्से भी खासे रोमांचक रहे हैं।
निहाल देवी मंदिर ऐसी जगह है, जहां से चंबल का इलाका बहुत ज्यादा दूर नहीं रहता। चारों ओर घना जंगल भी है। करीब 20 साल पहले तक इस मंदिर में डकैतों की आवाजाही के किस्से खूब चलते थे। नवरात्र के दौरान वे हर हालत में आकर माता रानी के सामने सिर नवाते थे। जाहिर है कि उनकी टोह लेने के लिए पुलिस भी रहती थी। हालांकि मंदिर से कभी कोई डकैत पकड़ा गया हो, ऐसा कोई किस्सा सुनने में नहीं मिलता। मंदिर में घंटे समर्पित किए डकैतों ने इस मंदिर के बाहर एक बड़ा घंटा लगा हुआ। यह दस्यु इमरत लाल ने मातारानी का समर्पित किया था। उनके नाम का बाकायदा उल्लेख भी किया गया है। उनके अलावा कुख्यात डकैत रमेश सिकरवार के भी यहां आने के कई किस्से सुने व सुनाए जाते हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि उन दिनों माताजी का मंदिर बड़ा नहीं था। यह एक मढ़िया जैसा था। यहां आने वाले दर्जनों घंटों को बाद में बेच दिया जाता था, जिससे मिलने वाली राशि से मंदिर का निर्माण किया जाता रहा। बाद में शासन-प्रशासन ने भी यहां काम करवाए। चार पीढ़ियों से पूजा कर रहा है गोस्वामी परिवार वर्तमान में मंदिर के मुख्य पुजारी विद्याराम गोस्वामी हैं। उनके बेटे अशोक भी उनका सहयोग करते हैं। पं. विद्याराम ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां इसी मंदिर की सेवा करती हुई आ रही हैं। यह कम से कम 300 साल पुराना है। उनके मुताबिक इसकी स्थापना राजा निहाल सिंह ने की थी, जिनके नाम से इसे जाना जाने लगा। देवी की प्रतिमा उन्हें जंगल में ही मिली थी।