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Net Ram Lohchab

From Jatland Wiki
Author: Laxman Burdak, IFS (R)

Net Ram of Chhuchhakwas, INA

Net Ram Lohchab was from village Chhuchhakwas in Matanhail tahsil of Jhajjar district in Haryana. He was a soldier in 2/9 Jat Regiment of British-India Army. During Second World War his Battalion was sent on Malaya Front. After fall of British Army in Singapore in February 1942 he joined Indian National Army on call of Subhash Chandra Bose. He became martyr on 23.03.1944 during Imphal-Kohima Campaign on Burma Front. His story could be revealed after great search by his grandson Harbir Lohchab of Indian Army.

शहीद नेत राम लोहचब

शहीद नेत राम - 84 साल बाद सामने आई झज्जर के गुमनाम शहीद नेतराम की कहानी. शहीद नेतराम के दस्तावेज तीन राज्यों के सेना कार्यालयों में जाकर पता लगाने पर मिल सके. ऐसा ऐतिहासिक सच सामने आया है जिससे 84 वर्षों से गुमनाम एक महानायक के बलिदान को फिर से देश के सामने ला दिया है. आजाद हिंद फौज के शहीद सिपाही नेतराम के सैन्य रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेज परिवार ने खोजें. इनकी अधिकारी पुष्टि हुई है. परिवार के अनुसार शहीद नेतराम के पोते सुरेंद्र उर्फ मटरू ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार और जाट रेजीमेंट सेंटर बरेली से ऐसे दस्तावेज प्राप्त किए हैं जो साबित करते हैं कि नेतराम ने ब्रिटिश भारतीय सेना छोड़कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर आजाद हिंद फौज में शामिल हुए. नेतराम ब्रिटिश भारतीय सेना की 2/9 जाट रेजीमेंट में सैनिक थे. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी बटालियन को मलाया मौर्चे पर भेजा गया. फरवरी 1942 में सिंगापुर के पतन के बाद जापानी सेना के युद्ध बंदी बन गए. परिवार को मिले रिकॉर्ड के अनुसार नेतराम ने भारत वर्मा सीमा पर इंफाल-कोहिमा अभियान के दौरान 23 मार्च 1944 को बर्मा मोर्चे पर शहीद हो गए. भारतीय सेना में सिपाही और नेतराम के पड़पौते हरवीर लोहचब ने बताया कि 84 वर्ष बाद प्रकाश में आई यह कहानी न केवल झज्जर बल्कि पूरे हरयाणा के लिए गौरव का विषय है.

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