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Mavikalan

From Jatland Wiki
(Redirected from Mawi Kalan)

Mavikalan (Mawi Kalan) (मावी कलां) or Chor Mau is a large village in Baraut tahsil in district Baghpat in Uttar Pradesh.

Location

This village is 8 km. south of Aminagar sarai and 25 km. North of Delhi. Pincode of the village is 250606. It is situated 22km away from Baraut town and 31km away from Baghpat city. Mawi Kalan village has got its own gram panchayat. Hazurabad Garhi, Pura Mahadev, Muzaffarpur Kambala and Hazurabad Garhi are some of the nearby villages.

Origin

The Founders

History

मऊ से चोर का नाम पढ़ने की दास्ताँ

मऊ से चोर का नाम पढ़ने की दास्ताँ: अग्रेंजो का नया-2 उदय व मुगल साम्राज्य का पस्त होता राज 1767 विधवा वोलटर सुमरू जो पहले चावडी बाजार दिल्ली की नगरवधु (आस पास ) जो कही गई बेगम सुमरू की जांगीरदारी। कहते हैं। 1780 के आस पास भयंकर सुखा पडा व अकाल पडा जिससे मऊ ग्राम जिला मेरठ के निवासी लगान देने मे असमर्थ थे। फिर भी उनकी संपति कुर्क करने अपने हाथी पर पहुंची बेगम सुमरू ने अपना कैम्प गाँव के बाहर हिंडन नदी के किनारे लगाया व गाँव में मुनादी करादी कि जो भी लगान नही देगा उसकी संपति कुर्क कर ली जाएगी ।

मऊ गाँव मे उज्जवल / (औजलान) गोत्र के जाट रहते है, सबने मिलकर पंचायत की व आपस में विचार विमर्श किया। उसी रात को बेगम सुमरू जिस हाथी पर बैठकर आई थी कैम्प से हाथी चोरी हो गया। कमाल यह कि कैम्प से बाहर जाने के किसी भी दिशा में रेतीली जमीन पर हाथी के पैर के कोई निशान तक नही। चारों तरफ घना जंगल रेतीली जमीन पर कोई निशान नहीं। काफी दिन गुजर गए और हाथी के साथ-2 बेगम सुमरू का रुतबा भी दांव पर था।

आस पास के गाँव के बासिनदो से पूछा गया और उनहोंने सलाह दी कि मऊ गाँव के लोगों को विश्वास में लेकर सौदा किया जाए। गाँव के प्रमुख-2 लोगों को बुलाया और प्रस्ताव रखा कि अगर आप लोग हांथी ढूंढ कर ला देंगे तो पूरे गांव का लगान नहीं वसूला जाएगा। मऊ गाँव के लोगों ने कहा वो इस शर्त पर पूरी कोशिश करेंगे । और 2 दिनों में हाथी तलाश कर ला दिया। बेगम सुमरू अपने प्यारे हाथी को पाकर बहुत प्रशन्न हुईं व गाँव वासियों का पूरा लगान माफ कर दिया।

तब बेगम ने गाँव वालों को विश्वास में लेकर पूँछा हाथी के कैम्प से बाहर जाने के किसी भी दिशा में पैरों के निशान तो थे नहीं हांथी गया कैसे। गाँव के प्रमुख लोगों ने बताया पल के ऊपर हांथी चलाया (पल मोटे सूत से बनाया गया बडे आकार का तिरपाल) इससे कोई पैर का निशान नही बना। आस पास के गाँव में बात फैल गई व मऊ को आस पास के गाँव के लोग चोर मऊ कहने लगे।

सोभाग्य से मेरा डीएनए भी उसी गाँव का है मेरे 4 पीढी पूर्वज दादा स्वर्गीय जसवंत सिंह का जन्म भी चोर मऊ में हुआ व शादी के कई सालों बाद मेरी पडदादी के अकेली संतान होने के कारण जानी गाँव में आ गये। मगर मुझे कभी भी मऊ जाने का अवसर आजतक नही मिला।

एक और मेरे साथ घटित घटना: जब मैं मेरठ में पढाई कर रहा था तो मेरा पार्टनर जो कि अच्छा दोस्त भी था मुझे अपने गाँव घुमाने ले गया। सुबह-सुबह अपने खेत दिखाने ले गया जो कि हिंडन नदी के किनारे किनारे तक फैले थे। मैंने पूछा नदी के दूसरे किनारे पर पेडों के झरमुट मे गाँव दिखाई दिया। मैंने जिज्ञासा वस पूछ लिया कि यह कौन सा गाँव दिखाई देता है । उसने कहा चोर मऊ। मुझे आश्चर्य हुआ और कहा यह तो मेरे पूर्वजों का गाँव है। उसने कहा चोर मऊ तो बहुत खतरनाक गाँव उसके इलाके का मैंने कहा कैसे तो उसने कहा घर पर उसके दादा जी बताएँगे। उन्होंने बताया कि हमारे गाँव में (रसूलपुर किनोनी जिला मेरठ) जब कोई किसी को सताता है तो वह अपनी लडकी की शादी चौर मऊ में करता है व उनसे अपनी आप बीती साझा कर बदला लेने की प्रार्थना करता हैं। वे उसको न्याय हक दिलाते हैं। मेरा सीना गर्व से चौड़ा होता है और भी कई चोर मऊ की न्याय प्रिय कहावते बताई। मेरा सीना भी गर्व से चौडा होता महसूस हुआ कि में भी एक संघर्ष रत इतिहास के डीएनए से हुॅ।

लेखक: सत्यपाल सिंह ऑन फेसबुक

Jat Gotras

Population

Population of Mawi Kalan according to Census 2011, stood at 4997 (Males: 2729, Females: 2268).[1]

Notable Persons

Anurag Dodwal - adodwal@yahoo.co.in

Rajkumar Chaudhary (Ujlayan)- chaudharyc@aol.com

Vijay Pal Singh Ujjawal -

Yogesh Dhama MLA Baghpat 2017, 2022

Dr Kuldeep Ujjwal - Minister of State Chairman of the Liquor Prohibition Council - National Secretary RLD, President CCS Uni Chairman Remote Sensing Dept

एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी, वीएम (फ्लाइंग)

एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी: बागपत मवी कला के गौरव एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी को मिला उत्तम युद्ध सेवा मेडल, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित. भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी, वीएम (फ्लाइंग) को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उत्कृष्ट नेतृत्व, वीरता और विशिष्ट सैन्य सेवाओं के लिए देश के प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरण 'उत्तम युद्ध सेवा मेडल' से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्वारा उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खुशी की लहर है। 17 दिसंबर 1994 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त करने वाले एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी वर्तमान में वेस्टर्न एयर कमांड के एक महत्वपूर्ण फाइटर एयरबेस पर एयर ऑफिसर कमांडिंग (AOC) के रूप में तैनात हैं। अपने तीन दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण अभियानों का सफल नेतृत्व किया है। कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उन्होंने थॉइस के उच्च हिमालयी एयरफील्ड से MiG-29 लड़ाकू विमानों के संचालन की शुरुआत कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। वहीं, एयर मुख्यालय में ग्रुप कैप्टन पर्सनल ऑफिसर-3 के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने वर्ष 2020 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 144वें कोर्स से ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच के अधिकारियों को शामिल कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के रूप में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान उन्होंने एयर डिफेंस मिशनों को समय पर लॉन्च कराया तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में फाइटर एयरक्राफ्ट की त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए नई परिचालन प्रक्रिया विकसित की। बाद में एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में उन्होंने लेह एयरफील्ड पर MiG-29 के नाइट ऑपरेशन की क्षमता विकसित कराई और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संयुक्त कॉम्बैट ट्रेनिंग के लिए एयरस्पेस के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित किया।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनका एयरबेस दुश्मन के प्रमुख निशानों में शामिल था। विपरीत परिस्थितियों में एयर कमोडोर चौधरी ने अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व किया। उनके त्वरित, सटीक और साहसिक निर्णयों से न केवल एयरबेस पूरी तरह सुरक्षित रहा, बल्कि दुश्मन को भी भारी क्षति उठानी पड़ी। उनके इसी उत्कृष्ट नेतृत्व और विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 'उत्तम युद्ध सेवा मेडल' से सम्मानित किया गया।

इससे पहले वर्ष 1998 में उन्हें वायुसेनाध्यक्ष प्रशस्ति और वर्ष 2017 में वायु सेना मेडल (VM) से सम्मानित किया जा चुका है। वह एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं तथा कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर के पूर्व छात्र भी रहे हैं।

एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी के पिता चौधरी रामपाल सिंह उत्तर प्रदेश के आर.एस.के. इंटर कॉलेज, सिंभावली के पूर्व प्रधानाचार्य रहे हैं। उनकी माता श्रीमती विमला देवी गृहिणी हैं। परिवार वर्तमान में मेरठ के बी-208, डिफेंस एन्क्लेव, सरधना रोड पर निवास करता है, जबकि उनका पैतृक गांव चोरमऊ, पुरा महादेव है।

एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी को मिले इस प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान पर उनके परिजनों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है। (Source - Brahm Pal Singh Tomar's Post,01.07.2026)

External Links

References


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