Matili
Matili () is a village in tehsil ... in District Hanumangarh in the Indian state of Rajasthan.
Jat Gotras
History
दुल्ला राम जी खीचड़
सन् १९२७ को आज ही के दिन बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी के भागीरथी प्रयास, दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय से सुतलज दरिया से ११५ किलोमीटर लम्बी ईंट व पेटा सीमेंट से नहर बना कर इस रेगिस्तान में पानी लाया गया तो कालांतर में ये इलाक़ा राजस्थान का अन्न का कटोरा बन गया। [Bahawalpur|बहावलपुर]] रियासत (अब पाकिस्तान), पंजाब (पूर्वी और पश्चिमी)और बीकानेर रियासत के बीच ब्रिटिश हुकूमत के साथ मिलकर महाराजा साहब ने कलयुग में वो कर दिखाया, जिसे असंभव माना गया । रियासत के महाराजा ने देश और राज्य के समृद्ध व्यक्तियों और आम जन से धन का सहयोग लिया ।
मेरे दादा जी चौधरी दुल्ला राम जी खीचड ने भी मुक्तहस्त से इस अलौकिक कार्य में आर्थिक सहयोग दिया, जिससे महाराजा साहब व्यक्तिगत रूप से अभिभूत हुए । महाराजा गंगा सिंह जी के मेरे दादा जी के साथ बहुत ही आत्मीय सम्बन्ध थे । उसी दौरान १९२७ मे वे मेरे दादा जी के निवास माटीली खिचडान मे भी पधारे व रात्रि विश्राम भी किया। १८९९ मे पड़े छप्पन के भयानक अकाल मे जब गाँव वासी पलायन को विवश हुए तो दादा जी ने कर्ज व लगान माफी मे अहम भूमिका निभाते हुए आम जन को राहत दिलवाई। गंग नहर, समाज सेवा, अकाल राहत कार्य, बाल विवाह रोक कानून को समाज के हित मे लागू करने के लिए, रेल सेवा को वाय मटीली खीचडान करवाने मे, कृषि मंडी को स्थापित करवा पंजाब के व्यापारियों को आमंत्रित किया व समय-समय पर महाराजा जी के साथ ईलाके के विकास मे उत्कृष्ट सहयोग दिया। इसी से अभिभुत होकर बीकानेर राज की तरफ से मेरे दादा जी चौधरी दुल्ला राम जी खीचड को मांगलवार तारीख १ जनवरी १९४६ को कड़ा और पाग से सम्मानित किया गया। इसके उपरांत सम्मान स्वरूप दादा जी के सुझाव पर मटीली खीचडान का नाम तत्काली महाराजा सादुल सिंह जी के नाम पर सादुल शहर रखा गया। उनके इसी सरल स्वभाव के कारण उन्हे आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
१८९९ के छप्पन के अकाल ने राजस्थान को झकझोर दिया।अकाल से आई वेदनाओं को देखते हुए महाराजा गंगा सिंह जी ने एक स्थायी समाधान निकाला प्राय बीकानेर रियासत को फिर से मुख्य धारा में लाने हेतु व प्रजा की समस्याओं के शीघ्र निदान हेतु महाराजा गंगा सिंह जी द्वारा १९१३ में एक सभा बनाई गई। यह सभा थी प्रजा प्रतिनिधि सभा। सभा में मुख्य सदस्य रियासत के कुछ अहम सामंतों को बनाया गया। (रियासत काल में राजा के अधीन रहने वाला वह ऊंचे औहदे वाला सरदार जो अपने क्षेत्र में राजा जैसा ही व्यवहार करता था।) इसी प्रजा प्रतिनिधि सभा में महाराजा ने मेरे दादा जी चौधरी दुल्ला राम जी खीचड़ को भी स्थान दिया। यही वह सभा थी जिसने गंग नहर को सतलज नदी से ला रियासत को अकाल से स्थाई समाधान देना ही उचित विचार समझा। इन्हीं अहम पलों के शाक्षी बने मेरे दादा जी की तस्वीर सांझा करते हुए।
सबसे बीच में बेठे हुये , छड़ी वाले विनोद खीचड, सादुलशहर के दादाजी
लेखक: विनोद खीचड, [Sadulshahar|सादुलशहर]]
Notable persons
References
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