Kolayat
| Author:Mukanda Ram Nehra, Principal (R) |

Kolayat (कोलायत) is a town and tehsil of Bikaner district in Rajasthan. Kolayat is an historical centre of pilgrimage where the Vedic sage, Kapila is believed to have shed his body under a Peepul tree.
Jat Dharmshala Kolayat, Bikaner, Rajasthan - built in 1946 on the initiative of Chaudhary Netram Takhar of Netewala and Ch. Chetram Sai of Givindpura in Ganganagar, having 415 rooms, is one of the biggest Jat Dharmshalas.
Variants
- Kaulayata (कौलायत) = Kapilayatana (कपिलायतन) (AS, p.243)
- Kapilayatana (कपिलायतन) = Kaulayata (कौलायत) (जिला बीकानेर, राज.) (AS, p.135)
- Kapil Sarovar (कपिल सरोवर)
Location
Kolayat town is 51 kilometres from Bikaner on National Highway 11 to Jaisalmer.
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Bikaner district map
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Location of Kolayat in Bikaner District
Jat Gotras
- Bana बाना (2)
- Beniwal बेनीवाल (3)
- Godara गोदारा (10)
- Moond
- Sanyee
- Saran सारण (20)
- Siyag सियाग (15)
- Sinwar
- Thalod थालोड़ (60) यह साजनवासी (नोखा) से यहां लगभग 40 वर्ष पहले रोजगार के लिए आये थे
Villages in Kolayat tahsil
21 C.W.B, Akasar, Akhoosar, Angneu, Araji Jitoosingh, Araji Nala, Bajju Khalsa, Bajju Tej Pura, Bala Ka Gol, Balala, Bangarsar, Barsalpur, Basti Chauhanan, Beekampur, Beethnokh, Bera Dedawatan, Berasar, Bhaloori, Bhandhli, Bhane Ka Gaon, Bhatiyon Ki Dhani, Bhayala, Bheloo, Bholasar Budhan, Bholasar Chauhanan, Bhom Akhesingh, Bhom Hemsingh, Bhom Naharsingh, Bhoorasar, Bijeri, Bikendri, Burj Chobdaran, Chak Bandha No.1, Chak Bandha No.2, Chak Bandha No.3, Chak Bandha No.4, Chak Beethnokh, Chak Bhatiya Bandh, Chak Chani, Chak Dadar, Chak Gujarsinghwala, Chak Kanya Bandh, Chak Khuddi, Chak Madhogarh, Chak Mandal Bandh, Chak No. 4, Chak No. 5, Chak No. 7, Chak Saliya, Chak Vijaisinghpura, Chandasar, Chani, Charanwala, Chhaneri, Chheela Kashmeer, Dabli, Dadoo Ka Gaon, Dand Khurd, Dandkalan, Dasori, Deh, Dewdo Ki Dhani, Diyatara, Gajjewala, Gajner, Gangapura, Gariyala, Girajsar, Godoo, Gogariyawala, Gokal, Govindsar, Goyalri, Grandhi, Gulamwala, Gura, Hadan, Hadla Bhatiyan, Hadla Rawalotan, Hanuman Nagar, Hirai Ki Dhani, Inda Ka Bala, Jagasar, Jetugo Ki Dhani, Jhajhoo, Jhajhoobas Nathotan, Kabrawala, Kandharli, Karnisar, Keharli, Khajora, Khakhoosar, Khara Lohan, Khari Charnan, Khariya Malinath, Khariya Patawatan, Khariyabas, Kheendasar, Khetolai Budhan, Khetolai Burj, Khetolai Mulwan, Khetolai Shimbhoo, Khikhniya Kundaliyan, Khikhniya Patta , Kodam Desar, Kolasar (West), Kolayat, Kotra, Kotri, Kudaratiwali Dhani, Kumharo Ki Dhani, Ladkhan @ Nayagaon, Lakhasar, Lambana Bhatiyan, Lambana Moolwan, Lohiya, Loombasar, Madh, Maganwala, Mandal Bhatiyan, Mandal Charnan, Mandal Rawalotan, Mankasar, Meghji Ka Tala, Miranwala, Mithriya, Miyakor, Miyawala, Modayat, Modiya, Modiya, Modiya Mansar, Mokha Charnan, Mokha Khalsa, Motasar, Motawatai, Musewala, Nagrasar, Naiyon Ki Basti, Nandra, Narayansar, Nasooma, Neniya, Nokha @ Daiya, Nokhra, Pabusar (West), Pabusar Sindooka, Panchpeeth Ki Dhani, Panwarwala, Pethado Ki Dhani, Phulasar Bara, Phulasar Chhota, Prithviraj Ka Bera, Puranwala, Ranasar, Randheesar, Ranjeetpura, Raoneri, Raowala, Rawalotan Ka Tala, Rekh Ranasar, Sadolai, Salasar, Samorkhi, Seora, Sharah Adwayat, Sharah Ambayat, Sharah Bhiyanimani, Sharah Bokolai, Sharah Ekaliya, Sharah Gageri, Sharah Gujarayat, Sharah Karnet, Sharah Kiklet, Sharah Kishnayat, Sharah Kumbholai, Sharah Lavayat, Sharah Punolao, Sharah Sandayat, Sharah Thoomli, Shastri Nagar, Sheeshan, Sheroowala, Shimbhoo Ka Burj, Siyana Bhatiyan, Siyana Charnan, Siyana Jodhasar, Siyana Kabadiyan, Siyana Kundaliyan, Siyana Sakhlan, Siyana Sutharan, Solankiyo Ki Dhani, Surjara, Tanwarawala, Tokla, Udat,
History
Kolayat is an historical centre of pilgrimage where the Vedic sage, Kapila is believed to have shed his body under a Peepul tree. Kolayat has a number of marble temples, sandstone pavilions and 52 ghats (bathing places) built around a large artificial lake.
A temple dedicated to Kapila is the venue for an annual fair held in the month of Kartik (October - November). During full moon of this month thousands of devotees of the Sankhya philosophy gather to take a dip in Kapil Sarovar. Devotees believe the lake has the power to wash away their sins. A livestock fair, mainly for the trading of camels is part of the festivities. [1]
Mineral Exploration Corporation Limited (MECL) had an office at Kolayat, functioning until 1997.It was wound up after the end of mineral exploration activities in the surrounding areas.
ग्राम पंचायत कोलायत
कोलायत बीकानेर से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है. बीकानेर से जैसलमेर रेल लाइन का यह प्रमुख स्टेशन है. कोलायत में से राष्ट्रीय उच्च मार्ग संख्या 11, जो बीकानेर से जैसलमेर का प्रमुख सड़क मार्ग है, निकलता है. यह कस्बा धार्मिक स्थल होने के कारण पर्यटकों की संख्या वर्ष पर्यन्त बनी रहती है. इसमें कपिल मुनि का आश्रम तथा कपिल सरोवर व अन्य प्रमुख धार्मिक मंदिरों एवं गुरुद्वारा के कारण यात्रियों का आवागमन सदैव बना रहता है. कपिल सरोवर पर कार्तिक पूर्णिमा को प्रतिवर्ष मेला भरता है. दूसरी और सिक्ख धर्म का एक बड़ा गुरुद्वारा है जिसमें इसी तिथि कार्तिक पूर्णिमा को मेला भरता है. बिश्नोई व सिद्ध समाज के धार्मिक स्थल भी हैं.
इस कस्बे में विभिन्न धर्मों के धर्मावलंबी होने के कारण विभिन्न जातियों के धर्मशाला हैं जैसे जाट धर्मशाला (16 बीघा भूमि में 415 कमरे), सुथार, प्रजापत, कुम्हार, बिश्नोई , ब्राह्मण, राजपूत, माली, सुनार, दर्जी, सारस्वत, अग्रवाल, सिक्ख, मेघवाल, सिद्ध आदि अनेक जातियों की धर्मशालाएं हैं.
इस क्षेत्र का मुख्य व्यवसाय खेती है. पशुपालन , खनन, ट्रांसपोर्ट सौर ऊर्जा आदि अन्य प्रमुख रोजगार के क्षेत्र हैं. कोलायत गांव में लगभग 1500 घर हैं. यह ग्राम पंचायत स्तर का गांव है. लेकिन राजनीतिक रूप में बड़ा विधानसभा क्षेत्र है. इसकी पाकिस्तान से सीमा लगती है. इसमें उप जिला अस्पताल, ट्रोमा सेंटर, पशु चिकित्सालय, गर्ल्स बॉयज सरकारी महाविद्यालय, सरकारी आईटीआई कॉलेज, बॉयज व गर्ल्स राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, विभिन्न बैंकों की शाखाएं आदि सभी मूलभूत सुविधाएं इस कस्बे में पाई जाती हैं.
इस कस्बे में हिंदू, मुस्लिम और सिक्ख धर्म के लोग रहते हैं. हिंदुओं में कई जातियां निवास करती है जैसे जाट, राजपूत , मेघवाल , कुम्हार , सुथार, बणियां, ब्राह्मण , लुहार, सुनार , नाई, दर्जी , माली , सिद्ध, बिश्नोई. जाटों में कई प्रकार की गोत्र पाई जाती हैं जिसमें प्रमुख जिसमें थालोड़ (60 घर) हैं. यह साजनवासी नोखा से यहां लगभग 40 वर्ष पहले रोजगार के लिए आये थे. सारण (20 घर), गोदारा (10 घर), बेनीवाल (3 घर), बाना (2 घर), सियाग (15 )
कपिलायतन
विजयेन्द्र कुमार माथुर[2] ने लेख किया है ...कपिलायतन राजस्थान राज्य के बीकानेर ज़िले में रेल स्टेशन कौलायत के निकट कपिल मुनि का मंदिर है। कहा जाता है कि कपिलायतन प्राचीनकाल में कपिल का आश्रम था। कपिलायतन का उल्लेख तीर्थ के रूप में पुराणों में भी है। इस स्थान पर महाराष्ट्र के संत ज्ञानेश्वर और नामदेव भी आए थे।
कोलायत झील (कपिल सरोवर)


कोलायत में इसी नाम से प्रसिद्ध एक तालाब है, जिसके किनारे कपिल मुनि का आश्रम माना जाता है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ मेला लगता है जिसमें लोग कपिल मुनि के आश्रम के दर्शनाथ आते हैं। पास ही धुनी नाथ का एक अन्य मंदिर है। पुष्कर के समान यहाँ के तालाब के किनारे बहुत से घाट और मंदिर बने हुए हैं, जो सघन पीपल के वृक्षों की शीतल छाया से आच्छादित हैं। कोलायत जी में बीकानेर का सबसे अच्छा एकीकृत टाउनशिप कपिलमुनी वाटिका जहाँ पर आधुनिक जीवन शैली की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। कपिल मुनि वाटिका के अंदर पार्क, क्लब हाउस जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध है। यहाँ पर पीने का शुद्ध पानी और ड्रेनेज की अच्छी व्यवस्था है। यहाँ पर ग्रामीण क्षेत्र निर्माण संघ का प्रदेश कार्यालय भी है। यहाँ पर कई धर्मशालाएँ एवं देव मंदिर भी विद्यमान हैं।
कोलायत झील (कपिल सरोवर) बीकानेर जिले के कोलायत कस्बे में स्थित है। इस कपिल सरोवर की उत्पत्ति वैदिक ऋषि कपिल मुनि ने अपनी मां देवहुति के मुक्ति के लिए की थी। उनकी मां के लिए उन्होंने भारत के सभी 68 तीर्थो और चार धामों के जल को मिलकर इस झील का निर्माण किया ताकि उनकी मां को एक ही स्थान पर सभी तीर्थ यात्राओं का फल मिल सके ।यह स्थान कपिल मुनि से जुड़ा है और इसलिए कोलायत झील के नाम को कपिल मुनि के नाम पर जाना जाता है। कपिल मुनि जो सांख्य दर्शन के रचयिता थे इस स्थान पर कपिल मुनि का आश्रम स्थापित किया गया है।
कोलायत झील का कपिल मुनि द्वारा निर्माण किया गया। यह विभिन्न तीर्थ स्थलों का संगम है। इसमें 52 घाट हैं । प्रतिवर्ष कोलायत का मेला कार्तिक पूर्णिमा को लगता है जो लगभग पांच दिन तक चलता है। कपिल मुनि के मंदिर में (कपिल मुनि, गंगा नदी व राजा सगर) की मूर्तियां लगी हुई है । कोलायत झील के चारों ओर पीपल के पेड़ हैं तथा यह मीठे जल का यह एक प्राकृतिक जलाशय है ।जिसकी लंबाई 1.4 किलोमीटर है और इसकी अधिकतम चौड़ाई 2.2 किलोमीटर है औसत गहराई 19 मी (62फीट) गहरी है चारों तरफ के घाट बलूई पत्थर तथा संगमरमर से बना हुआ है कपिल मुनि के मंदिर के पीछे की ओर एक प्राचीन जाल का वृक्ष है। इसको काफी वर्षों से संरक्षित व सुरक्षित किया गया है । यहां पर झील में दूर-दूर तक पानी ही पानी दिखाई देता है। इसके सभी मुख्य घाटों पर निर्मल, शीतल व स्वच्छ जल है । प्रतिदिन लोग इसमें स्नान करते हैं। कुछ लोग आचमन करके आत्म शुद्धि करते हैं।
लंबे समय तक इसकी सफाई नहीं करने पर इसमें जलकुंभी जैसे खरपतवार का साम्राज्य हो जाता है । इस समय इसके उत्तरी छोर के जल भाग में कमल की बेल हैं। ऐसी जलोद्भिद पादप (Hydrophytic plants) खरपतवार (Weeds) को समय-समय पर स्थानीय निकाय व मंदिर प्रबंध कारिणी इस खरपतवार को हटाकर इसके जलीय पर्यावरण को साफ करते हैं ।
यह कपिल सरोवर ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, पर्यावरणीय, स्थापत्य कला व आस्था का बेजोड़ नमूना है।
कपिल मुनि मंदिर



कपिल मुनि मंदिर के बारे में बताया गया है कि यह प्राचीन में बहुत छोटा मंदिर था। कहा जाता है कि लगभग 611 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण हुआ। पहले यह मंदिर बहुत छोटा था। कपिल मुनि में आस्था के कारण इनके अनुयायियों व भक्तों के द्वारा तथा राजाओं और सेठ साहूकारों की मन्नतें पूरी होने पर इसके वर्तमान स्वरूप को बलुई पत्थर व संगमरमर से बनवाया। कालांतर में यह कपिल सरोवर सरस्वती नदी के किनारे पर अवस्थित था। सरस्वती नदी जब लुप्त हो गई तो वर्तमान में कपिल सरोवर में पानी की आवक झझू नदी से होती है। इस नदी का उद्गम झझू गांव से है जो कोलायत से दक्षिण पूर्व दिशा में स्थित है। यहां की भूमि की ऊपरी सतह में बजरी की मात्रा अधिक होने से यह पथरीली है तथा इसकी ढलान व पानी का बहाव कोलायत की ओर है। कई बार इस नदी में बहाव क्षेत्र में अधिक पानी आने से मंदिर तक पानी पहुंच जाता है तथा इसकी मूर्तियां भी डूब जाती हैं । सरोवर में बरसात के समय अधिक अतिवृष्टि होने पर कपिल सरोवर में नदी के पानी को नियंत्रित करने का सबसे पहला प्रयास महाराजा गंगा सिंह ने सन् 1918 ई.में किया। उन्होंने सरोवर तक आने वाली नदियों के रास्ते में चैनल गेट बनाए गए ताकि ज्यादा पानी आने पर इसको दूसरी ओर डायवर्ट किया जा सके । इस सरोवर को कई बार खरपतवार (Weeds) बढ़ने पर साफ किया गया है । पिछले वर्षों में 2004-5 में ग्राम पंचायत सरपंच श्री फतेह सिंह भाटी द्वारा इस सरोवर को साफ करवाया गया था ।तत्पश्चात 2018 में तात्कालिक प्रधान श्री जयवीर सिंह भाटी के नेतृत्व में जन सहयोग से इसको एकदम साफ किया गया तथा इसका गाद व कचरा निकला गया ।उसी रात को बहुत तेज वर्षा होने पर यह पवित्र सरोवर फिर पानी से भर गया।
हमारी शिक्षा संवाद व पर्यावरण जागरूकता अभियान में दिनांक 10.9.2025 को कोलायत झील के पवित्र संगम पर श्री गजानंद जी नेहरा अध्यापक (खारिया मल्लीनाथ) व श्री लालाराम जी थालोड़ व्याख्याता झझू का विशेष सहयोग व सानिध्य रहा आपक हार्दिक आभार।
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कोलायत में कपिल मुनि का मुख्य मन्दिर। (लेखक - मुकन्दाराम नेहरा सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य)
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कपिल मुनि के मंदिर के पीछे जाल का विशाल काय प्राचीन पेड़। (लेखक - श्री मुकन्दाराम नेहरा सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य व श्री गजानंद नेहरा अध्यापक)
कपिल मुनि का परिचय

कपिल प्राचीन भारत के एक प्रभावशाली मुनि थे। उन्हे प्राचीन ऋषि कहा गया है। इन्हें सांख्यशास्त्र (यानि तत्व पर आधारित ज्ञान) के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है जिसके मान्य अर्थों के अनुसार विश्व का उद्भव विकासवादी प्रक्रिया से हुआ है। कई लोग इन्हें अनीश्वरवादी मानते हैं लेकिन गीता में इन्हें श्रेष्ठ मुनि कहा गया है। कपिल ने सर्वप्रथम विकासवाद का प्रतिपादन किया और संसार को एक क्रम के रूप में देखा। "कपिलस्मृति"उनका धर्मशास्त्र है। सुखसागर में इन्हें भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों में से ही एक अवतार बताया गया है।
संसार को स्वाभाविक गति से उत्पन्न मानकर इन्होंने संसार के किसी अति प्राकृतिक कर्ता का निषेध किया। सुख दु:ख प्रकृति की देन है तथा पुरुष अज्ञान में बद्ध है। अज्ञान का नाश होने पर पुरुष और प्रकृति अपने-अपने स्थान पर स्थित हो जाते हैं। अज्ञानपाश के लिए ज्ञान की आवश्यकता है अत: कर्मकाण्ड निरर्थक है। ज्ञानमार्ग का यह प्रवर्तन भारतीय संस्कृति को कपिल की देन है। यदि बुद्ध, महावीर जैसे नास्तिक दार्शनिक कपिल से प्रभावित हों तो आश्चर्य नहीं। आस्तिक दार्शनिकों में से वेदान्त, योग दर्शन और पौराणिक स्पष्ट रूप में सांख्य के त्रिगुणवाद और विकासवाद को अपनाते हैं। इस प्रकार कपिल प्रवर्तित सांख्य का प्रभाव प्राय: सभी दर्शनों पर पड़ा है।
कपिल मुनि के समय और जन्मस्थान के बारे में निश्चय नहीं किया जा सकता। पुराणों तथा महाभारत में इनका उल्लेख हुआ है। श्रीमद्भगवत के अनुसार कपिल विष्णु के पंचम अवतार माने गए हैं। कर्दम और देवहूति से इनकी उत्पत्ति मानी गई है। बाद में इन्होंने अपनी माता देवहूति को सांख्यज्ञान का उपदेश दिया जिसका विशद वर्णन श्रीमद्भगवत के तीसरे स्कन्ध में मिलता है।
कपिलवस्तु, जहाँ बुद्ध पैदा हुए थे, कपिल के नाम पर बसा नगर था और सगर के पुत्र ने सागर के किनारे कपिल को देखा और उनका शाप पाया तथा बाद में वहीं गंगा का सागर के साथ संगम हुआ। इससे मालूम होता है कि कपिल का जन्मस्थान संभवत: कपिलवस्तु और तपस्याक्षेत्र गंगासागर था। इससे कम-से-कम इतना तो अवश्य कह सकते हैं कि बुद्ध के पहले कपिल का नाम फैल चुका था। यदि हम कपिल के शिष्य आसुरि का शतपथ ब्राह्मण के आसुरि से अभिन्न मानें तो कह सकते हैं कि कम-से-कम ब्राह्मणकाल में कपिल की स्थिति रही होगी। इस प्रकार 700 वर्ष ई.पू. कपिल का काल माना जा सकता है।
गंगासागर (AS, p.264) कपिल मुनि का तपस्याक्षेत्र है। गंगा सागर गंगा और सागर के संगम पर स्थित प्राचीन तीर्थ है। कपिल मुनि का, जिनके शाप से सगर के साठ सहस्त्र पुत्र भस्म हो गये थे। आश्रम इसी स्थान पर था- 'तत: पूर्वोत्तरेदेशे समुद्रस्य महीपते, विदार्य पातालमथ सगरात्मजा:, अपश्यंत हयं तत्र विचरंत महीतले, कपिलं च महात्मानं तेरोराशिमनुत्तमम्'। महाभारत वन पर्व 107, 28-29.[3]
गंगा सागर का पुन: उल्लेख इस प्रकार है- 'समासाद्य समुद्रं चगंगया सहितो नृप:, पूरयामास वेगेन समुद्रं वरुणालयम्'-महाभारत वन पर्व 109, 17-18 अर्थात् भगीरथ ने साथ समुद्र तक पहुंचकर वरुणालय समुद्र को गंगा के पानी से भर दिया। इस तरह सगर के पुत्रों के भस्मावशेष गंगा के जल से पवित्र हुए।[4]
गंगासागर, गंगा के डेल्टा का सुदूर पश्चिमी द्वीप है, जो पश्चिम बंगाल राज्य, पूर्वोत्तर भारत में हुगली नदी के मुहाने पर स्थित है, जिसकी एक शाखा इसे मुख्य भूमि से पूर्व दिशा में पृथक् करती है। यह द्वीप ऐसे बिंदु पर स्थित है, जहां कभी गंगा 'बंगाल की खाड़ी' में मिलती थी। 'गंगासागर' के नाम से विख्यात इस स्थान को विशेष तौर पर पवित्र माना जाता है। यह एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ केंद्र है। यहां प्रतिवर्ष तीन दिवसीय स्नानोत्सव व एक बड़ा मेला आयोजित होता है। सागर द्वीप पर भयंकर चक्रवात आते हैं। इसके दक्षिण-पश्चिम तट पर हुगली नदी में यातायात को निर्देशित करने के लिए एक प्रकाश स्तंभ स्थापित है। यहाँ कपिल मुनि मंदिर भी है जहाँ स्नान के बाद, तीर्थयात्री अक्सर हिंदू पौराणिक कथाओं में पूजनीय ऋषि कपिल मुनि के मंदिर में जाते हैं । यह मंदिर मेले में आध्यात्मिक महत्व की एक और परत जोड़ता है, जो चिंतन और श्रद्धा के लिए एक स्थान प्रदान करता है।[5]
जाट धर्मशाला कोलायत


कोलायत में कपिल मुनि का मंदिर व पवित्र कपिल सरोवर के नाम से पूरे देश में विख्यात है। इसमें विभिन्न जातियों और धर्मों की धर्मशालाएं हैं। जो भी तीर्थ यात्री या पर्यटक आते हैं वे विभिन्न धर्मशालाओं में ठहरते हैं। कोलायत में कपिल मुनि का सबसे बड़ा मेला कार्तिक पूर्णिमा को प्रतिवर्ष लगता है लेकिन फिर भी सत्र पर्यंत धार्मिक आस्था व पर्यटकों का आवागमन रहता है।
कोलायत की जाट धर्मशाला का निर्माण सन् 1946 ई. को प्रारम्भ हुआ। इसके पीछे एक विशेष कहानी है कि आज के श्री गंगानगर जिले से दो चौधरी नेतराम ताखर (गांव नेतेवाला श्री गंगानगर) व चौधरी चेतराम सांई (गोविन्दपुरा[6], श्री गंगानगर) बीकानेर राजा के दरबार में राशन या (कोटे) के सुविधा से जनता के लिए कपड़ा लेने गांव से आए थे। उस दिन राजा उपस्थित नहीं थे । तो वे रात्रि को पवित्र सरोवर में स्नान के लिए कोलायत आ गये। स्नान करने के पश्चात रात्रि विश्राम के पास में स्थित सुथारों की धर्मशाला में गए। सुथार धर्मशाला के मैनेजर ने उनको जाति पूछी तो उन्होंने अपनी जाति जाट बतायी तो उनको कमरे के लिए मना कर दिया तथा कुछ जाट जाति के लिए अपशब्द शब्द भी कहे। साथ ही उलाहना भी दिया कि इतनी संख्या में जाट होते हुए आप धर्मशाला नहीं बना सकते। यह बात उन दोनों चौधरियों को चुभ गई और वहीं बरामदे में जबरदस्ती बैठ गए । दूसरे दिन सुबह राजा के दरबार में गए । उन्होंने राजा से अनुरोध किया कि हमें एक मुरब्बा जमीन (मुरब्बा एक जमीन नापने की इकाई है।) कोलायत के पवित्र कपिल सरोवर के पास जाट धर्मशाला बनवाने के चाहिए। दोनों चौधरियों का राज दरबार में बड़ा सम्मान था। तत्काल ही राजा ने 16 बीघा जमीन उनको पवित्र सरोवर के पश्चिम दिशा में आवंटित कर दी । जिस जगह ज़मीन आवंटित की वह रेतीले टील्ले की थी। दोनों चौधरियों इसी कोलायत क्षेत्र में घूम-घूम कर कुछ चंदा किया। उस समय कोलायत का जाट समाज बरानी खेती व पशुपालन पर ही निर्भर था अतः आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। लेकिन दोनों चौधरियों की लगन व हिम्मत देखकर जाट समाज के स्थानीय लोगों ने उनका साथ दिया।सबसे पहले दोनो चौधरियों ने मिलकर दो छोटे कमरे बनाए । उसके बाद में बीकानेर क्षेत्र और अधिकांश तात्कालिक श्रीगंगानगर तथा पंजाब क्षेत्र से इन्होंने कहीं ज्यादा चंदा करके बहुत बड़ा जाट धर्मशाला का निर्माण करवाया।
चौधरी नेत राम ताखर के नाम पर नेतेवाला गांव श्री गंगानगर जिले में बसा हुआ है। प्रारम्भ में सन् 1946 ई.में चौधरी नेतराम ताखर व चेतराम सांई के बनाये हुए कमरे जीर्ण शीर्ण हो गये। अब उन दोनों के परिवारों ने उसी जगह दो छोटे कमरे पुनः सन् 2025 ई. बनवा दिये हैं। वर्तमान समय में जाट धर्मशाला कोलायत में कुल 415 कमरे हैं। इसके बीच में एक 60 x 30 फीट का बड़ा हाल है। जिसके आगे विधायक कोटे से बना हुआ बड़ा टीन सैड है। चौधरी नेतराम ताखर व चौधरी चेतराम के परिवार के दो कमरों के पास ठाकुर जी का मंदिर है । सम्पूर्ण भवन के पूर्वी भाग में ऊंचे मुख्य दरवाजे है। मुख्य भवन पूर्व दिशा में खुलता है। मुख्य द्वार के दोनों ओर आयताकार दो मंजिला भवन पर भव्य सफेद रंग की पुताई से भवन की छटा ही निराली है। इस परिसर में 20 परिवारों के रहने वाले क्वार्टर है। जिनमें शिक्षक, बैंक कर्मी, अन्य कर्मचारी व व्यापारी वर्ग स्थायी रूप में उचित किराया दर पर निवास करते हैं।
कोलायत की जाट धर्मशाला में आधार भूत सुविधाएं: पानी के लिए नहरी पानी के अलावा ज्यादा जल की आवश्यकता के लिए बड़ा ट्यूबवेल खोदा जा रहा है और लगभग 20 किलो वाट सोलर से बिजली का निर्माण किया जाएगा। इस धर्मशाला में यात्री सत्र पर्यंत आते हैं लेकिन कोलायत में कार्तिक पूर्णिमा का बड़ा मेला लगभग 5 दिन तक चलता है तथा रुणिचा में रामदेव जी के मेले के पदयात्री यहां रुकते हैं। यहां पर सोलर प्लांट्स काफी लगे हुए हैं। उनके लिए या कोलायत की बजरी प्रदेश के विभिन्न भागों में जाती है तो उसका व्यापार करने वाले व्यापारी यहां पर रुकते है। जाट धर्मशाला कोलायत का पूरा परिसर हरा भरा है । सभी कमरों पर या सामूहिक रूप लगभग सभी दानदाताओं की सूचियां उचित स्थान पर लगी हुई है । प्रवेश द्वार के पास ही दाहिनी ओर धर्मशाला की प्रबंधन समिति का कार्यालय है ।
कार्यकारिणी: वर्तमान में कोलायत जाट धर्मशाला की कार्यकारिणी निम्नानुसार है:
- अध्यक्ष - श्री अजय पाल जी ज्याणी सेवा निवृत्त अतिरिक्त जिला कलक्टर कटेहड़ा, फाजिल्का (पंजाब) हाल श्रीगंगानगर । मोबाइल नंबर 9413379500
- कोषाध्यक्ष - श्री बृजलाल जी कासनियां गांव जाखड़ा वाली तहसील पीलीबंगा (हनुमानगढ़) मोबाइल नंबर 9079810426
- मैनेजर - श्री ओम प्रकाश तर्ड गांव ढाकावाली ढाणी (श्रीगंगानगर) मोबाइल नंबर 9588293890
लेखक- श्री मुकन्दाराम नेहरा, सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य, गांव बीरमसर रतनगढ़, जिला चूरू (राजस्थान)
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जाट धर्मशाला कोलायत के संस्थापक सदस्य (1946) श्री नेतराम ताखर, श्री चेतराम सांई जिला श्री गंगानगर।
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जाट धर्मशाला कोलायत की दो मंजिला भवन।
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जाट धर्मशाला कोलायत का मुख्य द्वार।
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जाट धर्मशाला कोलायत के मुख्य भवन का दो मंजिला भवन की एक ओर की विंग।
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जाट धर्मशाला कोलायत की दो मंजिला भवन।
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जाट धर्मशाला कोलायत के बड़े हाल मय टिन शेड का दृश्य।
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जाट धर्मशाला कोलायत का बड़ा हाल का दृश्य।
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लेखक श्री मुकन्दाराम नेहरा के साथ जाट धर्मशाला कोलायत के सचिव श्री बृजलाल जी कासनियां, श्री गजानंद जी नेहरा अध्यापक, श्री लालाराम जी थालोड़ व्याख्याता गांव कोलायत
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जाट धर्मशाला कोलायत के सचिव श्री बृजलाल जी कासनियां के साथ लेखक श्री मुकन्दाराम नेहरा, श्री लालाराम जी थालोड़ व्याख्याता, श्री गजानंद जी नेहरा ( श्री ठाकुर जी के मंदिर के प्रवेश द्वार के पास)
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जाट धर्मशाला कोलायत के सचिव श्री बृजलाल जी कासनियां (खाट पर बैठे हुए)के साथ लेखक श्री मुकन्दाराम नेहरा धर्मशाला के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए।
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जाट धर्मशाला कोलायत के परिसर की हरितिमा।
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जाट धर्मशाला कोलायत के संस्थापक सदस्य (1946) श्री नेतराम ताखर
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जाट धर्मशाला कोलायत के संस्थापक सदस्य (1946) श्री चेतराम सांई
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जाट धर्मशाला कोलायत के दान दाताओं की सूची
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जाट धर्मशाला कोलायत कार्यकारिणी
Notable persons
- 1-श्री लालाराम थालौड़ व्याख्याता राजनीति विज्ञान जो इस समय झझू की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत है।
- 2-पूर्व सरपंच श्री फतेह सिंह भाटी राजनीति व समाज सेवा,
- 3-वर्तमान में बैंक कर्मी रामावतार सेन जो बैंकिंग सेवा के अलावा दिव्यांग व सामान्य खेल खेलने वाले खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर इन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है।
- 4-रामस्वरूप सियाग एयर फोर्स में टेक्निकल इंजीनियर में एक बड़े पद पर है
- 5-चौ. भंवरलाल खीचड़ पुत्र चौ. रामकरण मु.पो. जयसिंह देसर मगरा त. कोलायत जिला बीकानेर[7]
Gallery
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कपिल सरोवर कोलायत
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बिश्नोई धर्मशाला
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गुरुद्वारा कोलायत
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गुरुद्वारा कोलायत
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सिद्ध धर्मशाला श्री कोलायत
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सिद्ध धर्मशाला श्री कोलायत
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सिद्ध धर्मशाला श्री कोलायत
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सिद्ध धर्मशाला श्री कोलायत
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सिद्ध धर्मशाला श्री कोलायत
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कोलायत रेलवे स्टेशन
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कोलायत शिलालेख
External Links
References
- ↑ bikaner.nic.in
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.135
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.264
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.264
- ↑ भारतकोश-सागरद्वीप
- ↑ Got corrected by Vinod Sai, Great Grandson of Chet Ram Sai, email: vinod18gg@gmail.com
- ↑ http://www.swamikeshwanand.com/Donors%20List.aspx sn 299
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