Kali Pahari Jhunjhunu


Kali Pahari (काली पहाड़ी) is village in Jhunjhunu tahsil & district in Rajasthan.
Founders
Jat Gotras
History
नरहड़ में पठान शासन
स्रोत: रतन लाल मिश्र:शेखावाटी का नवीन इतिहास, मंडावा, 1998, पृ.60-61
बहलोल लोधी सन 1451 (1508 विक्रम) में गद्दी पर बैठा था. अतः इसी समय के आसपास नागड़ों की नरहड़ पर विजय मानी जा सकती है.
सुल्तान बहलोल की मृत्यु के बाद उसका लड़का सिकंदर लोदी जुलाई 1489 को दिल्ली की गदी पर बैठा. [1] सुल्तान सिकंदर ने युनूसखां के मरने के बाद इस्माइलखां को दिल्ली बुलाया एवं मोअतमदी के बाद अपनी खिदमत में 15 वर्षों तक रखा. सिकंदर ने दिलावर खां की वीरता से प्रसन्न
[पृ.61]: होकर उसे दिलावर खां का खिताब दिया. सन 1504 में सिकंदर ने सभी उमरावों को अपनी जागीर में लौटने का आदेश दिया. [2] इसी सिलसिले में दिलावर खां भी नरहड़ लौट आया.
दिलावर खां नरहड़ की जागीर का फरमान लेकर लौटा था. यहां उसका बड़ा भाई मलिक तहीम खां काबिज था. उसने इस पर ऐतराज किया तो संघर्ष की स्थिति बन गई. बुजुर्गों ने इस आपसी संघर्ष को अपने हितों के विपरीत माना और दोनों को समझाया. यह तर्क दी गई की दिलावर खां बादशाह का संबंधी है अतः अगर लड़ाई हुई तो बादशाह उसी का पक्ष लेगा. फलस्वरुप समझौता हो गया और दिलावर खां की पुत्री की शादी ताहिम खां के पुत्र से कर दी. दहेज में जागीर भी दी गई. इस दहेज में पांच गांव जेई पहाड़ी, काली पहाड़ी, बुडाना, गोठड़ा और कोली (कासिमपुर) दिए गए थे. [3]
रतन लाल मिश्र[4] ने लिखा है .... संभवत: नाहरखां की मृत्यु निसंतान होने पर उसका छोटा भाई बावनखां नरहड़ का नवाब बना. इसके पंच पुत्र थे- कुतुबखां, मुजफ्फरखां, हमीदखां, भीखनखां और लतीफखां. इनके वंशज बगड़, नूनिया गोठड़ा में बसे हुए थे. इनमें से कुछ फैजाबाद अवध में चले गए और कुछ दक्षिण में हैदराबाद में चले गए.
पठान नवाबों के नरहड़ क्षेत्र में कई गांवों को आबाद किया और उनकी सुरक्षा की. दिलावरखां की पुत्री जिया बीबी को दहेज में काली पहाड़ी, जयी पहाड़ी, बुडाना और गोठड़ा गांव मिले थे. अलाउद्दीनखां ने अपने भतीजे आदमखां को नारी, बारी, सारी गांव जागीर में दिए थे. नवाब कासिमखां ने अपने फजैन्द सिकंदर खां को खुडाना दिया और नरहड़ में जमीन दी. खाजूखां को सुल्ताना बतौर जागीर अता किया गया.
Population
Notable persons
External links
References
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