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Kak River

From Jatland Wiki
(Redirected from Kakni River)
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Kak River Jaisalmer, Rajasthan

Kak River (काक नदी) is a small seasonal river located in Jaisalmer district of Rajasthan, India. It is the smallest river among the inland rivers of Rajasthan.

Variants

Origin

It originates approximately 27 km in the hills south of the village of Kotari and flows for a few kilometres before draining into the Bhuj lake.[1]

Bhuj lake

Bhuj lake, situated in Jaisalmer, is primarily formed by the waters of the Kakni River.

Geography

The hilly mound on which Kuldhara is situated lies to the north of Masurdi Nadi and to the west of the dry bed of the old Kakni river, which has now turned into a nullah.[2]

Jat Gotras Namesake

  • Kak (काक) (Jat clan) → Kak River (काक नदी) is a small seasonal river located in Jaisalmer district of Rajasthan, India.

लोद्रवा ग्राम

जैसलमेर से 15 कि.मी. दूर काक नदी के किनारे बसा लोद्रवा ग्राम व यहां के कलात्मक जैन मंदिर तो देखते ही बनते हैं। ऐसा माना जाता है कि लोद्रवा ग्राम को लोद्रवारोद्रवा नामक जातियों ने बसाया था। प्राचीन काल में लोद्रवा अत्यन्त ही हरा-भरा कृषि क्षेत्र था। लोद्रवा एक सुन्दर स्थान तो था ही, इसके साथ-साथ यहां के लोग भी समृद्ध थे।

काक नदी

काक नदी का बहाव क्षेत्र व उसके केचमेंट क्षेत्र को देखा जाए तो यह विश्वास करना मुश्किल साबित होता है कि यह किसी रेगिस्तानी व सरहदी जिले का दृश्य है। चारों तरफ फैली पहाडिय़ों से बहता हुआ पानी इस काक नदी को जीवंत बनाता है। काक नदी अपने साथ बहते पानी को संजोकर यहां के लोगों को जीने की राह दिखाती है। इतिहाकारों की मानें तो मरुस्थली क्षेत्र के जैसलमेर की गंगा नदी से काम नदी किसी भी लिहाज से कम नहीं है। मुख्य तौर पर काक नदी गांव भोपा, सोडा, कोटडी, गोरेरा, सत्ता, धउवा के पास बहती हुई 14 कोस की दूरी तय करते हुए गांव कुलधरा से पश्चिम में ढाई से 5 किलोमीटर खाभा बुझ में मिल जाती है।

काक ऋषि के कारण पड़ा नाम: इतिहावेत्ता ऋषिदत्त पालीवाल बताते हैं कि काक नदी के बारे में बताया जाता है कि ब्रह्माजी के पुत्र काक ऋषि ने मरुस्थल में आकर जिस नदी के किनारे तपस्या की वह काकनयी नदी से जानी जाती हैं। मौजूदा समय में मूलसागर के मगरों से तीन कोस की दूरी से बारिश का पानी लुद्रवा के पास काकनय नदी में मिल जाता है। काकनी नदी या काक नदी, जिसे स्थानीय लोग इसे मसूरी नदी या काकनेय नदी के नाम से भी जानते है, जो कि जैसलमेर जिले की एक मौसमी नदी है। कोटड़ी गांव के दक्षिण में पहाडिय़ों में लगभग 27 किमी यानी 17 मील की दूरी पर निकलते हुए खाभा गांव के पास बुझ झील, जो करीब बीस वर्ग किमी क्षैत्र मे फैली है,उसमें गिरने से पहले कुछ किलोमीटर तक बहती है। जैसलमेर जैसे मरुस्थली क्षेत्र, जहां वर्षा सबसे कम होती है उसके लिए वरदान से कम नहीं हैं। काक नदी की तीन धारायें बताई गई है। एक धार कुलधर होकर बुझ झील में मिल जाती हैं। दूसरी धार काक नदी की गांव कुलधरा से पहले गांव काहला व लौद्रवा होकर रिण में मिल जाती है। तीसरी धार संवत 13 में जैसलमेर शहर से दक्षिण में तीन कोस की दूरी पर तत्कालीन राज परिवार की ओर से धन राशि खर्च कर निकाली गई। तीनों धाराएं आज भी मरूस्थल में पानी की आवश्यकता को पूरा करती है।

कुलधरा से करीब 20 किमी आगे बुझ झील जो बीस वर्ग किमी के विशाल क्षेत्र में फैली है। पालीवाल समाज के लोगों ने काक नदी के पानी को बुझ झील में खडीन रूपी बांधों में समेटकर नौ विशाल खड़ीन बनाए। हर ख ड़ीन मे पालीवाल जाति के किसान हजारों मन गेहूं, चने के बीज बोकर लाखों मण फसल की पैदावार लेते थे। सैकड़ों वर्ष पहले पालीवाल जाति के लोगों ने पानी के महत्व को समझा।

Source - patrika.com, 8.8.2024, Deepak Vyas

External links

References

  1. Khan, Aakib. Complete Rajasthan GK (English). SI Publication. p. 20.
  2. Shrimali, Krishna Mohan (1996). Indian Archaeology Since Independence. Association for the Study of History and Archaeology. p. 151.

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