Jump to content

Himmata Ram Bhambhu

From Jatland Wiki
Author:Laxman Burdak IFS (R)
Himmata Ram Bhambhu
Himmata Ram Bhambhu with President of India

Himmata Ram Bhambhu is a social worker, nature lover, conservationist and environmentalist from Nagaur district in Rajasthan. He has been awarded with Padmashri on Republic-day 26 January 2020 by the President of India. He may be contacted at Phone No:01582-243490, Mobile No. 9414241601

Early life

He was born at village Sukhwasi in Nagaur district, Rajasthan on 14.2.1956. His father's name is Shri Chatara Ram Bhambhu and mother Smt Madi Devi Godara from village Gudha Bhagwandas (Nagaur, Rajasthan). He did his Primary education from school in his own village Sukhwasi in Nagaur district. He passed 6th standard from middle school Gogelao but could not continue his education due to adverse family conditions.

Achievements in Brief

He has been involved in Planting and preserving trees and motivating people for nature conservation in forest deficit districts like Nagaur, Jodhpur, Jaisalmer, Barmer, Sikar, Ajmer etc. since 1975. He is associated with Mahavir International Sansthan Nagaur for Green India Mission since 2013.[1]

He has developed a unique integrated agro-forestry plantation and biodiversity conservation centre. The green patch he has created at village Harima in Nagaur in an area of 6 ha has become unique rehabilitation center for Peacocks, Chinkaras and other various rare wild birds and animals. His efforts have been widely appreciated and he has been awarded with many awards. He has been associated with People for Animals programe run by Menka Gandhi.

He was an instrument in getting declared Gogelao and Rotoo as conservation reserves.

He has been awarded about 700 National, International and by hundreds of NGOs. List of awards include:

  • 1997 : People for Animals Award by Menka Gandhi.
  • 1999 : Rajasthan State Sarvottam Van Prahari Award by Governor of Rajasthan
  • 1999 : UNESCO award for environment protection.
  • 2001 - UNESCO Federation Rajasthan Paryavaran Ratna Award by CS ML Mehta at Ajmer
  • 2000-2016: He has been appointed as honorary Wild Life Warden from 2000-2016 by the State
  • 2003: Rajasthan State Amrita Devi Vishnoi award for 2003.
  • 2005 - Central Arid Zone Research Institute Award
  • 2005 - Rajasthan Patrika Karndhar Samman
  • 2007 - Green Olampiad Award New Delhi
  • 2008: Paryavaran Sanrakshan Award by Veer Amar Singh Rathor Sansthan Nagaur.
  • 2010 - Kalyan Sahay Sharma Smriti Shreshtha Krishak Puraskar of Haldhar Times by CM Rajasthan Ashok Gahlot.
  • 2011 - Agrani Navachari Kisan Samman by Agriculture Minister of Rajasthan Harji Ram Burdak
  • 2012 - Green Ideal Award by Dainik Bhaskar Jaipur
  • 2013 - Paryavaran Samvardhan Puraskar by Rajasthan Patrika Chief Gulab Kothari
  • 2013 - Vriksh Bandhu Puraskar by Adhyatmik Kshetra Paryavaran Sansthan Jodhpur
  • 2014 : Rajasthan State Rajiv Gandhi Paryavaran Sanrakshan Award by CM Rajasthan
  • 2016 : Veer Durgadas Rathor Paryavaran Sanrakshan Puraskar
  • 2019 - Green Warrior Award
  • 2019 - Sant Ishwar Samman 2019 : Rs 1,00,000/-
  • 2020 : Life Time Achievement Award by Forest Research Institute Dehradun.
  • 2020 : Padmashri for his social service on Republic-day 26 January 2020 by the President of India.

हिम्मताराम भांभू का जीवन परिचय

हिम्मताराम भांभू की दादी द्वारा वर्ष 1975 में लगवाया गया पीपल का पेड़ जिसने उनके जीवन की दिशा मोड़ी और उन्होने अपना जीवन पेड़ों और जीव-जंतुओं के लिए समर्पित कर दिया

जन्म: हिम्मताराम भांभू का जन्म राजस्थान के नागौर जिले में स्थित गाँव सुखवासी में दिनांक 14.2.1956 को हुआ। इनके पिता का नाम श्री चरतराम भांभू तथा माता का नाम श्रीमति माड़ी देवी था जो गुढ़ा भगवनदास गाँव के गोदारा परिवार से थी।

शिक्षा: हिम्मताराम ने बचपन में खेती किसानी की तमाम कठिनाइयों से निबटने के स्थानीय उपायों को देखते हुये गोगेलाव गाँव की स्कूल में छठी तक पढ़ाई की। उसके बाद स्कूल छोड़ना पड़ा और गायें चराने की ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ी।

व्यक्तित्व: भांभू जी का व्यक्तित्व सम्पूर्ण मानव मात्र के लिए प्रेरक है। भांभूजी ने यह सिद्ध कर दिया है कि इच्छा शक्ति हो तो कोई काम मुश्किल नहीं होता। हिम्मताराम भाम्भू के सरल प्रतीत होने वाले व्यक्तित्व में विराट जटिलताएँ कई बार अंजान व्यक्ति को चकरा देती हैं। ... दाद देनी पड़ेगी कि नितांत सूखे जलवायु में धरती की कोख से निकले खारे जल में अपनी मेहनत का पसीना मिलाकर हजारों-लाखों नन्हें पौधों को बेटे की तरह दुलारा-पाला-पौसा, ताकि वे वृक्ष बड़े होकर लाखों मूक पशु-पक्षियों और सभ्य इन्सानों को और अधिक उन्नत जीवन जीने के लिए मूल संसाधन देते रहें।

कुशल मिस्त्री: हिम्मताराम ने खेती के मशीनीकरण के प्रारम्भिक दौर में स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को समय-समय पर जरूरत अनुसार पुर्जे खोलने एवं मरम्मत में सहायता देकर अपना व्यावहारिक ज्ञान बढ़ा लिया। इससे हिम्मताराम को आस-पास के इलाके में कुशल मिस्त्री के रूप में पहचान मिली। हिम्मताराम ने वर्ष 1976 में नागौर में रहना शुरू किया और यहाँ ट्रैक्टर पार्ट्स की दुकान खोली। अपनी सरल सादगीभरी दिनचर्या और व्यवहार कुशलता के जरिये हिम्मताराम ने नागौर जिले के ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों से अंतरंग मित्रता स्थापित की। इन संपर्कों के माध्यम से हिम्मताराम ने पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया।

पर्यावरण संरक्षण को समर्पित: हिम्मताराम वर्ष 1986 में जापान सरकार की सहायता से संचालित परियोजना के अंतर्गत वनविभाग से जुड़ गए। तबसे उनका जीवन पूर्ण रूप से वन और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित रहा है।

संत शिरोमणी भक्त फूलांबाई

स्वयं सेवी संस्थाओं से जुड़ाव: वे नागौर जिले में 25 स्वयं सेवी संस्थाओं से जुड़े हुए हैं. श्री भांभू द्वारा ग्राम मांझवास में संत सिरोमणी भक्त फूलाबाई की जीवित समाधि पर संवत 2040 में मंदिर बनाकर, हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि मनाकर समाज में श्रद्धाभाव का संदेश पहुंचाया है.

हिम्मताराम भांभू की उपलब्धियां

हिम्मताराम भांभू वर्ष 1986 में जापान सरकार की सहायता से संचालित परियोजना के अंतर्गत वनविभाग से जुड़ गए। तबसे उनका जीवन पूर्ण रूप से वन और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित रहा है। आपके द्वारा पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीव संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जैविक खेती, पशुपालन, नशा मुक्ति, समाज सेवा आदि के किए गए उल्लेखनीय कार्यों का विवरण नीचे दिया गया है।

  • हिम्मताराम भांभू जन्म से ही प्रकृति की रक्षा, पर्यावरण, वन्य जीव संरक्षण, वृक्षारोपण, वन संरक्षण आदि कार्यों में 1975 से आज तक लगातार कार्य करते आ रहा हैं। आपने राजस्थान में लगभग 7 लाख पौधे लगाए और अब तक इनमें से 5 लाख पौधे पूर्ण विकसित पेड़ बन गए हैं। आपकी प्रेरणा से भारत में 10 लाख से ज्यादा पौधे लगे हैं व पेड़ बन गए है व 772 छोटे-मोटे गार्डन भी आमजन ने पर्यावरण प्रेमियों ने बना दिया गए हैं। आपने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत शिकारियों के खिलाफ 28 मुकदमे दर्ज करवाए व कई बार संघर्ष किया। कई बार गोलियाँ भी चली। कई बार शिकारियों से मुठभेड़ भी हुई परन्तु हिम्मत नहीं हारी। अब तक 14 शिकारियों को जेल भिजवाया। पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए 8 मामले दायर कराए व उनको भी सजा दिलवाई।
  • 14 फरवरी 1956 को राजस्थान के नागौर जिले के सुखवासी गाँव में एक गरीब किसान परिवार में जन्म लिया। आपका दादी स्व. नैनी देवी से बहुत लगाव था और उनके प्रोत्साहन व प्रेरणा से वर्ष 1975 में अपने गाँव में एक पीपल का पेड़ लगाया तथा उस पेड़ की देखभाल करने लगे। पीपल का पौधा लगाते समय आपकी दादी ने कहा कि हिम्मत पेड़ लगा और जंगली जीवों की रक्षा कर क्योंकि पेड़ों और निरीह जंगली जीवों की सेवा ही भगवान की सेवा है। कुछ समय बाद जब पीपल का पेड़ बड़ा हो गया तब आपने पेड़ों और जंगली जीवों और पर्यावरण के लिए काम करने का प्रण ले लिया व अपनी पूरी बचत व कृषि बचत व पुरूस्कार राशि और अपने इकलौते पुत्र से प्राप्त पैसे वनीकरण और जंगली जीवों की सेवा में लगा दिए।
  • आपने जंगली जीवों को बचाने के लिए घायल अवस्था में ईलाज कराकर के स्वस्थ जंगल में छुड़वाए। 3 हजार से ज्यादा घायल चिंकारा, राष्ट्रीय पक्षी मोर, काले हिरण, नीलगाय, लोमड़ी व छोटे पक्षियों को घायल अवस्था में सरकारी डॉक्टरों से ईलाज करवाकर जंगल में छोड़ा।
  • आपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य वृक्ष खेजड़ी के पेड़ के तीन लाख 66 हजार से अधिक उपजारित बीज का मुफ्त वितरण किया और इसमें से 1 लाख 82 हजार 366 पौधे अंकुरण के बाद पूर्ण विकसित हर पेड़ बन गए व राज्य वृक्ष खेजड़ी बचाने का आंदोलन चलाया। यह कार्य संस्था महावीर इण्टरनेशनल के सहयोग से किया गया व पण्डित जवाहरलाल नेहरू अस्पताल नागौर व इनके अलावा महिला महाविद्यालय नागौर, ग्रामोत्थान विद्यापीठ, दरगाह रोड़ नागौर, हवाई पट्टी के पास अमृता देवी उद्यान, सशस्त्र वन, खुन्दा माता मंदिर गोगेलाव, नागौर स्टेडियम, पांचौड़ी, आईटीआई व मेला मैदान, डेह रोड़ आदि नागौर शहर में कई जगहों पर 25 हजार से ज्यादा पौधे लगाए और उनको पेड़ बना दिया। और नागौर जिले में ऐसा कोई गाँव नहीं बचा जहाँ आपने पौधारोपण नहीं किया हो। एक-एक गाँव, ग्राम पंचायत, शमसान भूमि, कब्रिस्तान में पौधे लगाकर पेड़ बनाए हैं।
  • आपने आज तक 3272 लोगों को नशे के आदि को नशा छुड़ाकर प्रेरित किया। सरकारी और निजी विद्यालयों में जाकर 3 लाख 66 हजार बच्चों को दीपावली से पहले जाकर प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने व पटाखे नहीं जलाने की प्रतिज्ञा दिलवाई है। 2030 तक 10 लाख बच्चों को पटाखे नहीं जलाने, जल बचाने, जीव बचाने व पर्यावरण संरक्षण, जन्मदिन पर एक पौधा लगाकर के एक पेड़ बनाने, जीवन में कभी नशा नहीं करने, पढ़ाई के अलावा मोबाईल का कम उपयोग करने, ध्वनि प्रदूषण नहीं फैलाने, मूक जीवों की सेवा करने व स्वच्छ भारत अभियान में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देने की ही प्रतिज्ञा दिलवाई जाने का संकल्प दिलाया गया है और 2030 तक जन-जन में पर्यावरण बचाने के लिए जागृति पैदा करते रहने की योजना है।
  • आपने 1998 में 6 हेक्टेयर रेतीली जमीन खरीदी ताकि उसे अपने सपने को साकार करने के लिए विकसित कर सकें। इस जमीन में अलग-अलग प्रकार के 14 हजार पौधे लगाए जो अब नागौर को छोटे से हिस्से में बेहतर वातावरण दे रहे हैं। सभी स्कूली बच्चों, किसानों व अन्य लोगों को प्रशिक्षण और अनुभव प्रदान करने के लिए अपनी निजी खातेदारी जमीन में हरिमा पर्यावरण प्रशिक्षण केन्द्र, नागौर नाम से एक जागरूकता केन्द्र भी स्थापित किया। उन केन्द्र में लगभग 300 मोर तथा हजारों से ज्यादा दूसरे पक्षी और पशु रहते हैं और उनका भरण पोषण करते हैं। अपनी जमीन में रहने वाले पक्षियों और जंगली पशुओं के खाने के लिए 20 किलोग्राम अनाज हर रोज उनको भोजन कराते हैं और वहाँ प्रशिक्षण केन्द्र में पक्षियों की और राजस्थान के वन्य प्राणियों की एक प्रदर्शनी भी लगवाई गई है जहाँ हजारों बच्चे उसे देखकर प्रेरणा ले चुके हैं और वहाँ पर पर्यावरण भवन बनाया हुआ है। समय-समय पर वहाँ पर्यावरण के लिए जागरूकता कैम्प भी लगाते हैं और वहां से प्रेरणा लेकर के आज पर्यावरण को बचाने के लिए लाखों लोगों जुड़ चुके हैं। पीने के पानी के लिए एक छोटी तलाई बना रखी है व 300 पानी के कटोरे प्रतिदिन उपलब्ध कराये गए हैं।
  • आपने वन विभाग व शिक्षा विभाग व अन्य किसानों के साथ आज तक 5328 वन महोत्सव और 8592 पर्यावरण संगोष्ठी और 176 राज्य स्तरीय पर्यावरण चेतना सम्मेलन और 1472 किलोमीटर पद यात्राओं द्वारा पूरे राजस्थान राज्य विशेष कर नागौर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, सीकर, बीकानेर, अजमेर, सवाई माधोपुर, टोंक, झुंझनूं, ब्यावर, सिरोही जिलों में पर्यावरण, वन संरक्षण, वनों के बचाने के लिए, जंगली जीवों को बचाने के लिए और कृषि वानिकी और जैव विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम किया है।
  • आप सात ज पर काम कर रहे हैं - सबसे पहले जल, जंगल, जीव, जमीन, जैविक, जलवायु, जीवन, जनसंख्या व जम्भेश्वर । इन विषयों पर हमेशा काम करते रहते हैं। आप भारत के 14 स्टेटों में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन व पर्यावरण सम्मेलनों में भाग ले चुके हैं। जिसमें राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली, मध्यप्रदेश, नोयडा, अहमदाबाद, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, अहमदनगर व पूना आदि में पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाया और पर्यावरण बचाने के लिए भाग लिया और वहाँ पौधारोपण भी किया गया है।
  • नागौर के पास गोगेलाव कन्जर्वेशन रिजर्व 2012 में अथक प्रयास करके घोषित करवाया। इस रिजर्व फॉरेस्ट में 358 हैक्टेयर जमीन मूक वन्य जीवों के लिए आरक्षित करवाई व सरकार से सम्पर्क कर घायल वन्य जीवों के लिए 2016 में एक रेस्क्यू सेन्टर बनवाया। जिसमें घायल वन्य जीवों को ईलाज करके स्वस्थ विचरण के लिए जंगल में छोड़ा जाता है।
  • नागौर के हवाई पट्टी के पास 3 हैक्टेयर जमीन पर कई भू-माफियों से लड़ाई लड़ के संघर्ष करते-करते राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री से मिलकर के 2020 में अमृता देवी उद्यान घोषित करवाया। जिला प्रशासन से प्रयास करके 15 लाख रूपये मंजूर कराकर के बाउण्ड्री बनवाई व एक हजार पौधे लगवाकर बड़ा किया व पौधों को पानी पिलाने के लिए आपने खुद ने 1 लाख रूपयों का टैंकर खरीद करके वन विभाग को सुपुर्द किया ताकि उन पौधों को समय-समय पर पानी पिलाया जा सके। गोगेलाव कन्जर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट में सरकार से एक नर्सरी 2018 में मंजूर करवाई ताकि किसानों को समय-समय पर पौधे उपलब्ध हो सके। कन्जर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट में लव कुश वाटिका 2022 में मंजूर करवाई जो बन गई है। 2018 राज्य सरकार वन विभाग से 75 लाख रूपये मंजूर करवाकर कन्जर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट के बॉउण्ड्री भी बनवाई गई है।
  • आप से प्रेरणा लेकर के नागौर, बीकानेर, अजमेर, ब्यावर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर आदि जगहों पर 782 छोटे-छोटे उद्यान पर्यावरण प्रेमियों ने बना दिए हैं। जहाँ समय-समय पर आप गये हैं। इनके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, पूना, सिग्नापुर, भीमाशंकर, अहमदनगर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, मुम्बई, हैदराबाद, अहमदाबाद, भाव नगर, सूरत, अम्ब्रेली, दिल्ली, गुड़गाँव, माउण्ट आबू, आनन्द आदि जगहों पर पर्यावरण कार्यक्रमों में आप भाग ले चुके हैं। इनके अलावा राजस्थान के चुरू, झुंझुनूं, सीकर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, अजमेर, ब्यावर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़ आदि जिलों में पर्यावरण संगोष्ठियों में और वन महोत्सवों में भी आप भाग ले चुके हैं।
  • आप से प्रेरणा लेकर राजस्थान भर में व राष्ट्रीय लेवल पर लाखों लोगों में वन, वन्य जीव, पर्यावरण बचाने में जागृति पैदा हुई है। भारत सरकार के सूचना एवं जन सम्पर्क मंत्रालय द्वारा आपके जीवन पर आधा घण्टे की डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म हिन्दी व अंग्रेजी में बनवाई जा रही है जो आने वाले दिनों में रिलीज होगी। इतना ही नहीं आप को 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति भवन में चर्चा के लिए बुलाया व 22 मिनट तक आप से अकेले में पर्यावरण और वन्य जीव और वन बचाने पर चर्चा की और बाद में थैंक्स लेटर राष्ट्रपति भवन से आपके नाम भेजा गया।
  • सम्मान: 1975 से लेकर के आज तक लगातार रात दिन एक करके आप अमूल्य समय निकाल कर पर्यावरण बचाने, जंगल बचाने, जीव बचाने व जमीन बचाने व जैविक बचाने व जल बचाने के लिए काम कर रहे हैं। आपको अभी तक 700 से ज्यादा राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय और सैकड़ों स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा अवार्ड मिल चुके हैं। आपको राष्ट्रीय सेवा भारती और संत ईश्वर फाउंडेशन नई दिल्ली द्वारा ईश्वर सेवा सम्मान 2019 प्राप्त हुआ। आप को 1999 में श्रीमती मैनका गाँधी द्वारा पीपुल फॉर एनीमल्स का अवार्ड प्राप्त हुआ और मैनका ने यह कहा कि भारत में आप जैसे लोगों की बहुत जरूरत है। राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य स्तरीय सर्वोच्च पुरस्कार राजीव गाँधी पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार 2014 भी प्राप्त हुआ है। आप को राज्य स्तरीय सर्वोत्तम वन प्रहरी पुरस्कार राज्यपाल द्वारा 1999 में प्राप्त हुआ। आप को राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव से पर्यावरण रत्न पुरस्कार प्राप्त हुआ। युनेस्को फेडरेशन का पर्यावरण पुरूस्कार प्राप्त हुआ। राजस्थान के वीर दुर्गादास राठौड़ पुरस्कार 2016 में भी प्राप्त हुआ। वर्ष 2003 में राज्य स्तरीय अमृता देवी विश्नोई अवार्ड भी मिला है। वर्ष 2020 में भारतीय अनुसंधान संस्थान देहरादून द्वारा लाईफ टाईम ऐचीवमेंट अवार्ड पर्यावरण रत्न पुरस्कार प्राप्त हुआ। राजस्थान विवेकानन्द गौरव अवार्ड प्राप्त हुआ। राजस्थान पत्रिका द्वारा कर्णधार सम्मान प्राप्त हुआ। दैनिक भास्कर समाचार पत्र द्वारा ग्रीन आइडियल अवार्ड प्राप्त हुआ व जिला स्तर पर वन विभाग, जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग, जल विभाग आदि द्वारा पुरूस्कार प्राप्त हो चुके हैं व अपने नेक सपने को साकार करने के लिए अनवरत और धैर्य के साथ काम कर रहे हैं। इसके बाद भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा 2020 में पदमश्री अवार्ड दिया गया।
  • वनों की सुरक्षा - आप के द्वारा समय-समय पर कटते वनों को रोका व आम लोगों को जागरूक किया व जगह-जगह राज्य वृक्ष खेजड़ी व नीम की गिली लकड़ी ट्रकों में भरी हुई ले जाकर के प्लास्टर ऑफ पेरिस के भट्टों से 1 लाख 72 हजार क्विंटल गिली लकड़ी पकड़वाई जिससे पेड़ काटने वाले लोगों में भय पैदा हो गया व वन विभाग द्वारा लाखों रूपयों का जुर्माना कराया गया व समय-समय आंदोलन चलाकर लोगों को जागरूक कर कटते वनों को बचाया व लकड़ी माफियों पर भारी जुर्माना वसूला गया।
  • अवैध आरा मशीन - जिले में अवैध आरा मशीनों को जप्त कराने के लिए वन विभाग व जिला पुलिस प्रशासन का सहयोग लेकर के आरा मशीनें जप्त करवाई।
  • पर्यावरण, वृक्षारोपण अभियान को गति देने के लिए पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने में भारत में भ्रमण करने लगे और धन की आवश्यकता पर स्वयं को अलोट नहरी भूमि जैसलमेर के मोहनगढ़ क्षेत्र में थी उनको 10 लाख रूपयों में बेच दी परन्तु वनों का संरक्षण, पर्यावरण बचाने, पौधारोपण करने व वनों का संरक्षण का अभियान निरंतर चलाए रखा।
  • आप ने आज तक किसी व्यक्ति या सरकारी धन या मुआवजा आदि तक नहीं लिया है। सारा खर्च पक्षियों के लिए प्रत्येक वर्ष 60 क्विंटल चुग्गा (अन्न) खरीद करके उन मूक जानवरों को हर रोज भोजन करा रहे हैं।
  • सबके लिए यह खुशी की बात है कि आपके द्वारा लगवाए हुए पौधे 5 लाख जो वृक्ष बन चुके हैं व प्रत्येक वर्ष वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार 15 अरब रूपयों की प्राणवायु ऑक्सीजन हवा में मानव मात्र को उत्सर्जन कर रहे हैं।
  • आपके द्वारा प्रचार प्रसार के लिए इतने वर्षों में 25 हजार फोल्डर, पर्दे, किताबें, कविताएं, पेम्पलेट आदि छपवाकर पर्यावरण जागरूकता के लिए जन-जन तक पहुँचाया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए आपके जीवन पर वर्ष 2014 में एक पुस्तक छपी जिनका विमोचन भारत सरकार के संसद भवन के सेण्ट्रल हॉल में 15 सांसदों व केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के हाथों से किया गया था।
  • आपके काम और वृक्षों के रूप में किये गए योगदान को आगामी 500 से 700 वर्ष तक मानव मात्र व प्राणी मात्र को प्राणवायु ऑक्सीजन व अन्य अनगिनत लाभ पहुँचाते रहेंगे व पशु पक्षी आप को जीवन भर व पीढ़ियों तक याद करते रहेंगे। वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट में रखी एक रिपोर्ट में एक पेड़ यदि 100 वर्ष का है तो उस पेड़ की कीमत 1 करोड़ रूपयों की आंकी गई है। हम कल्पना कर सकते हैं आपके द्वारा लगवाए हुए 5 लाख पेड़ों की कीमत न जाने कहाँ पहुँच जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण को समर्पित

हिम्मता राम भांभू ने 1975 से लेकर आज तक लगातार वन, वन्य जीव, पर्यावरण, वृक्षारोपण आदि कार्यों में अपना जीवन समर्पित कर दिया है. आपने राजस्थान भर में जगह-जगह घूम-घूम कर वृक्षारोपण करवाकर लगभग 5 लाख से भी ज्यादा पौधे लगा चुके हैं जिसमें से 3.5 लाख से ज्यादा पौधे आज पेड़ बन चुके हैं. आपने नागौर, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, सीकर आदि जिलों में वृक्षारोपण कर पौधे लगाए हैं. नागौर जिले में जिला हेडक्वार्टर सहित पूरे नागौर जिले में आज 3 लाख पौधे पेड़ बन चुके हैं. इतना ही नहीं उन्होंने खुद की निजी भूमि नागौर से 12 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-65 पर 6 हेक्टर में हरिमा गांव के पास 11,000 पौधे लगाकर पेड़ बना दिए. यहाँ कतार बंद पौधे जैसे खेजड़ी, रोहिडा, बेर, सेव बेर, अनार, जाल, कुमठा, सरेस, करंज, नीम, मेहंदी और करौंदा आदि के पेड़ हैं. इनमें तीन सौ से ज्यादा राष्ट्रीय पक्षी मोर, हजारों की संख्या में अन्य पक्षी और रेंगने वाले वाले जानवर यथा सांप, गोह, गोपट, नेवले, गिरगिट आदि अनेकों जीव-जन्तु इस वृक्षारोपण में विचरण करने लगे हैं.

इन कार्यों की प्रेरणा इनकी दादी नैनी देवी से मिली. 1975 में इनकी स्वर्गीय दादी नैनी देवी ने इनके पुश्तैनी गांव सुखवासी में एक पीपल का पौधा इनके हाथ से लगवाकर कहा था कि हिम्मताराम रूंख पनपावन सै मोटो दूजो कीं पून कोनी हुवे. तुम तो जाओ, हजारों पेड़ लगाओ, पेड़ों की रक्षा करो, मूक पशु पक्षियों की सेवा करो. अपनी दादी से यह प्रेरणा लेकर इन्होंने लाखों पेड़ लगवाए और उन्हें बड़े किए. हजारों की तादाद में वन्यजीवों की जान बचाई और उनकी सुरक्षा व संरक्षण किया. उनके साथ अत्याचार करने वाले शिकारियों के खिलाफ अपने खर्चे से जंग लड़ कर उन्हें न्याय दिलवाया.

प्रोत्साहन और उत्साह-वर्धन

  • इनके कार्यों को देखते हुए वन विभाग के कई निवेशकों, वन और पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, द्वारा राजस्थान सरकार के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा राज्य में 20 से ज्यादा विश्वविद्यालय के कुलपतियों, भारतीय मौसम विभाग के पूर्व डीजीपी-संयुक्त राष्ट्र कृषि मौसम विभाग के उपाध्यक्ष-राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एवं विश्वबैंक सलाहकार डॉ. लक्ष्मण सिंह राठौड़, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल, जयपुर घराने की महारानी पद्मिनी देवी, पूर्व सांसद रामसिंह कस्वा, पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, पूर्व सहकारिता मंत्री अजयसिंह किलक, पूर्व सार्वजनिक निर्माण मंत्री यूनुस खान, पूर्व प्रतिपक्ष के नेता एवं बीकानेर सांसद रामेश्वर डूडी, पूर्व वन मंत्री रामलाल जाट, डेगाना के पूर्व विधायक रिछपालसिंह मिर्धा द्वारा एवं राज्य के 50 से ज्यादा विधायकों द्वारा इनके कार्यों को सराहा व उत्साह वर्धन किया.
  • पूर्व मंत्री बृजकिशोर शर्मा, योग गुरु बाबा रामदेव, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी, राजस्थान 'पीपल फॉर एनिमल्स' प्रभारी बाबूलाल जाजू भीलवाड़ा, पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री कल्याणसिंह कालवी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व सांसद नागौर स्वर्गीय भंवरसिंह डांगावास, पूर्व सांसद स्वर्गीय राम रघुनाथ चौधरी, पूर्व मंत्री हरेंद्र मिर्धा, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा, बाड़मेर पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम, पूर्व मंत्री परसराम मोरदिया, पूर्व ऊर्जा मंत्री जितेंद्र सिंह, राज्य धरोहर संरक्षण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला, पूर्व विधायक रामदेव चौधरी, पूर्व विधायक स्वर्गीय मोहनलाल बारूपाल, पूर्व विधायक स्वर्गीय उदय सिंह राठौड़, जायल विधायक मंजू मेघवाल, जायल विधायक मंजू बाघमार, अनेक साधु-संतों, पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान, पूर्व मुख्य सचिव एम एल मेहता, अतिरिक्त मुख्य सचिव, मणिपुर के सेवानिवृत डीजीपी के. राम बागड़िया, राजस्थान लोकसेवा आयोग सदस्य डॉ. कालूराम बागड़िया, श्री संस्थान जयपुर के सुरेन्द्र सिंह लखावत, भारतीय पुलिस सेवा के डी जी, आई जी, ए डी जी स्तर के 1990 से आए हुए सैकड़ों अधिकारियों, समस्त जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों के साथ पौधारोपण किया. उन्होंने इनके कार्यों को सराहा और उत्साह वर्धन किया.
  • पूर्व विधायक रूपाराम डूडी, विधायक महेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक श्री राम भींचर, पूर्व विधायक सुखराम नेतड़िया, पूर्व विधायक रामचंद्र जारोड़ा, गोगेलाव विवेक टेक्नो स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रीति ढल एवं संचालक श्री डूंगरराम खिलेरी, जिला रायफल्स शूटिंग के सचिव मदनलाल मिर्धा, जिले के प्रधानों, प्रमुखों, सरपंचों व अनेक समाजसेवी संगठनो, कॉलेजों के प्राचार्यों, साधु-संतों, 1990 से लेकर आज तक जिले में आए हुए उप वन संरक्षकों, सहायक वन संरक्षकों, रेंजरों, विश्नोई समाज के वन्यजीव प्रेमियों, पत्रकारों, नेशनल चैनल DD1, राजस्थान दूरदर्शन केंद्र व नागौर आकाशवाणी केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, नवज्योति आदि सभी ने इनके कार्यों को सराहा, उत्साह वर्धन किया और पूर्ण सहयोग किया.
  • महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल, राजसमन्द सांसद दिव्याकुमारी, राष्ट्रीय संत ईश्वर सेवा सम्मान के अध्यक्ष कपिल खन्ना, राष्ट्रीय सेवा भारती के पदाधिकारियों, वर्तमान वनमंत्री सुखराम विश्नोई और वर्तमान कलेक्टर नागौर दिनेशकुमार यादव ने इनके कार्यों को सराहा और उत्साह वर्धन किया.

पुरस्कार और सम्मान

महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा समाज सेवा के लिए पद्मश्री पुरस्कार-2020 प्रदान किया गया
राजीव गांधी पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार-2014 प्राप्त करते हुये हिम्मताराम भांभू
  • विगत 40 वर्षों में इनका जीवन पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीव संरक्षण, वृक्षारोपण आदि के लिए पुरस्कार दिया है. इनको राजस्थान सरकार का अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार 2003 में दिया गया है. इनके अलावा राज्य स्तर पर सर्वोत्तम वन प्रहरी पुरस्कार, वृक्ष वर्धक पुरस्कार, वृक्ष मित्र पुरस्कार, वन विस्तारक पुरस्कार राज्य सरकार वन विभाग द्वारा दिये गये हैं.
  • राज्य स्तरीय हलधर टाइम्स, कृषि गोल्ड लाइन, अंबेडकर फैलोशिप, दलित साहित्य अकादमी, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, दो बार जिला प्रशासन जिला कलेक्टर द्वारा, दो बार जिला उपखंड अधिकारी द्वारा, अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा द्वारा, तत्कालीन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्रीमती मेनका गांधी द्वारा पीपल फॉर एनिमल का सर्वोच्च पुरस्कार दिया गया है. जिलेभर की सैकड़ों स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रशंसा पत्र व पुरस्कार दिये गए हैं.
  • 1993 - वनविस्तारक पुरस्कार , नागौर वनविभाग की ओर से
  • 1997 - राष्ट्रीय पर्व पर नागौर जिला कलक्टर द्वारा सम्मान
  • 1997 - केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं 'पीपल फॉर एनिमल्स' की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती मेनका गांधी द्वारा सम्मान
  • 1998 - वनविभाग द्वारा जिलास्तर पर 'वृक्ष वर्द्धक पुरस्कार'
  • 1999 - मुख्य वनसंरक्षक जोधपुर द्वारा संभाग स्तर पर सम्मान
  • 1999 - राज्यस्तरीय प्रश्नोतारी परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर सीकर में वनमंत्री द्वारा सम्मान
  • 1999 - सेठ वल्लभ रामदेव पित्ती द्वारा पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार
  • 1999 - महामहिम राज्यपाल अंशुमान सिंह द्वारा राजयसतार पर सर्वोत्तम वन प्रहरी पुरस्कार
  • 2000: हिम्मताराम भांभू को 2000-2016 तक राज्य सरकार ने मानद वन्य जीव प्रतिपालक की उपाधि से नवाजा
  • 2001 - वन्यजीव प्रतिपालकों की तीन दिवसीय बैठक में सहभागिता पर वनमंत्री द्वारा प्रमाण-पत्र
  • 2001 - यूनेस्को फेडरेशन राजस्थान द्वारा पर्यावरण रत्न पुरस्कार, पूर्व मुख्य सचिव एएम एल मेहता द्वारा अजमेर में दिया गया
  • 2002 - अखिल भारतीय विषनोई महासभा, मुकाम, बीकानेर द्वारा सम्मान
  • 2003 - वनमंत्री लक्ष्मी नारायण दवे द्वारा राज्यस्तरीय अमृतदेवी विषनोई पुरस्कार
  • 2005 - शुष्क वन अनुसंधान जोधपुर द्वारा पुरस्कार
  • 2005 - राजस्थान पत्रिका द्वारा कर्णधार सम्मान.
  • 2007 - ग्रीन ओलम्पियाड अवार्ड नई दिल्ली में
  • 2007 - पशुपालन विभाग की ओर से सम्मान
  • 2008: वीर अमर सिंह राठौड़ संस्थान नागौर द्वारा वीर अमरसिंह राठौड़ की जयंती पर पर्यावरण संरक्षण का पुरस्कार-2008 दिया गया.
  • 2010 - 'हलधर टाइम्स' द्वारा 'कल्याण सहाय शर्मा स्मृति श्रेष्ठ कृषक पुरस्कार - हलधर रत्न' मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा
  • 2011 - मारवाड़ मुस्लिम एजूकेशनल एंड वेल्फेयर सोसायटी एवं सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन, नई दिल्ली द्वारा प्रगतिशील किसान सम्मान समारोह में 'प्रथम कृषि वानिकी सम्मान' जस्टिस एच आर पँवार द्वारा
  • 2011 - कृषि विभाग राजस्थान द्वारा अग्रणी नवाचारी किसानों के सम्मान समारोह में कृषि मंत्री हरजी राम बुरड़क द्वारा सम्मान
  • 2012 - दैनिक भास्कर जयपुर द्वारा ग्रीन आइडल अवार्ड
  • 2013 - पत्रिका ग्रुप के प्रधान गुलाब कोठारी द्वारा पर्यावरण संवर्द्धन पुरस्कार
  • 2013 - आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान जोधपुर द्वारा वृक्षबंधु पुरस्कार
  • 2015 - 23 मार्च 2015 को राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमति वसुंधरा राजे द्वारा राजीव गांधी पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार - 2014 प्रदान किया गया. पुरस्कार स्वरूप उनको दो लाख रुपये और रजत कमल ट्राफी भेंट की गई. समारोह में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री राजकुमार रणवा भी थे.
  • 2015 - राजस्थान दिवस समारोह के अवसर पर अजमेर संभाग का पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार संभागीय आयुक्त धर्मेंद्र भटनागर और शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी द्वारा दिया गया.
  • 2016 - में राष्ट्रीय स्तर के वीर दुर्गादास राठौड़ पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार मारवाड़ म्यूजियम ट्रस्ट जोधपुर द्वारा महाराजा गज सिंह एवं केंद्रीय कानून मंत्री पी.पी. चौधरी द्वारा दिया गया.
  • 2019 - ग्रीन वारियर अवार्ड
  • 2019 - संत ईश्वर सम्मान 2019 : रु. 1,00,000/-
  • 2019 - जायल विधायक मंजू देवी मेघवाल के जन्मदिन पर धन्ना भगत सम्मान पुरस्कार स्वरूप ₹5000 मानपत्र वह प्रशंसा पत्र दिया गया.
  • 2020: महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा 26.1.2020 को इनकी समाज सेवा के लिए पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया.
  • भारत सरकार की शुष्क अनुसंधान संस्थान “आफरी” जोधपुर द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने पर दो बार प्रशंसा पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया.
  • कबीर आश्रम बड़ी खाटू द्वारा दो बार पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने पर प्रशंसा पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया.
  • पीपल फॉर एनिमल की ओर से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जसवंत सिंह बिश्नोई द्वारा भीलवाड़ा में पुरस्कार दिया गया.
  • पुरस्कारों की लाइन में 100 से ज्यादा प्रशंसा पत्र व स्मृति चिन्ह विभिन्न जिलों की स्वयंसेवी संस्थानों द्वारा पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीव संरक्षण, नशा मुक्ति, वृक्षारोपण आदि कार्यों के लिए उल्लेखनीय योगदान देने पर सम्मानित किया गया.
  • जिला प्रशासन वन विभाग, पशुपालन विभाग और अनेक स्वयं सेवी संस्थाओं से प्रशंसापत्र प्राप्त हो चुके हैं।

पाठ्य पुस्तकों में स्थान

पर्यावरण संरक्षण को समर्पित पद्मश्री हिम्मताराम भांभू का नाम गुजरात के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है। अंग्रेजी की पुस्तक General Knowledge Times with Online Support में से उनका विवरण यहाँ उद्धृत है

हिम्मताराम भांभू पर पुस्तक

हिम्मताराम भांभू पर पुस्तक

हिम्मत के धनी ... हिम्मताराम - यह शीर्षक है श्री हिम्मताराम भांभू पर श्री मोईनूद्दीन चिश्ती द्वारा लिखी गई पुस्तक का. लेखक एवं संपादक: मोईनूद्दीन चिश्ती, RBS मंजिल, 532, संजय सी कालोनी, प्रतापनगर, जोधपुर 342004 (राज), Email: chishty.moin@gmail.com, rbsmoin@gmail.com, सह-संपादक: राकेश रामावत, प्रथम संस्करण: जुलाई 2015, प्रकाशक: प्रज्ञा प्रकाशन

नागौर जिले के प्रतिष्ठित किसान, पर्यावरणविद्, 'पीपल फॉर एनिमल्स' संस्था के जिलाध्यक्ष और समाज सेवी श्री हिम्मताराम भांभू के जीवन आदर्शों एवं उनके अमूल्य कार्यों को संकलित कर लेखन-सम्पादन करने की महती ज़िम्मेदारी का कार्य सुप्रसिद्ध एवं अनुभवी लेखक श्री मोईनूद्दीन चिश्ती द्वारा इस पुस्तक में किया गया है।

‘हिम्मत के धनी ... हिम्मताराम’ पुस्तक लोकार्पण में प्रकाश जवाडेकर, सीआर चौधरी

इनके जीवन पर ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर के वंशज मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा लिखित ‘हिम्मत के धनी ... हिम्मताराम’ पुस्तक का विमोचन 2016 में संसद भवन के सेंट्रल हाल में नागौर सांसद सी.आर. चौधरी व सैकड़ों वन्य जीव और पर्यावरण प्रेमियों की उपस्थिति में राजस्थान के 10-12 सांसदों सहित केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा किया गया. यह पुस्तक पढ़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सी.आर. चौधरी और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की.


हिम्मताराम पर 'नागौर जिले के हिम्मताराम ने खारे पानी में दस हजार पेड़ों के बीच ली सवाई उपज' शीर्षक से राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका 'शरद कृषि' के नवंबर 2010 के अंक में पृष्ठ 31-32 पर लेखक और संपादक का लेख छपा था। हिम्मताराम के अद्भुत और अनूठे कार्यों को देखकर उनके जीवन वृत पर आधारित लेखक की यह सातवीं किताब है।

इस पुस्तक में श्री भांभू के आदर्शों एवं कार्यों का सरल, सुपाठ्य एवं तार्किक प्रस्तुतीकरण लेखक द्वारा किया गया है। लेखक ने अपनी पैनी दृष्टि से श्री भांभू के हर पल को उजागार करने का सफल एवं सटीक प्रयास किया है। इस पुस्तक से आने वाली पीढ़ियों को वन संरक्षण, वन्य प्राणी संरक्षण और पर्यावरण संतुलन कायम करने की प्रेरणा मिलेगी। पुस्तक पढ़ने पर ज्ञात होता है कि भांभूजी बातों में कम और काम में ज्यादा विश्वास करते हैं।अपना पैसा खर्च करके वृक्ष लगाना, वन्य जीवों की रक्षा करना, वृक्ष काटने वालों के खिलाफ मुकदमें कायम करना आदि कार्य साधारण व्यक्ति के वश की बात नहीं है। पुस्तक में हिम्मता राम भांभू द्वारा की जा रही समस्त गतिविधियों का सचित्र वर्णन दिया गया है।

'खेजड़ी बचाओ अभियान' अध्याय में हिम्मताराम ने खेजड़ी को मरुस्थल की जीवनरेखा माना है और इसे किसान की जीवनधारा कहा गया है। हिम्मताराम का खेजड़ी को विलुप्त होने से बचाने का प्रयास न केवल सराहनीय है बल्कि मरुस्थल की आर्थिक दशा सुधारने के लिए अनिवार्य है। मरुस्थल में खेजड़ी ने ही मानव की भूख छप्पनिया अकाल (1899-1900) में शांत की थी - खेजड़या खोखाल्यां, थारौ एक-एक पान अमोल। मानव भूखां पेट भरै, छोड्डा थारा छोल॥

'सरकारी अनुदान से सदैव किया परहेज' में यह सपष्ट किया गया है कि हिम्मताराम ने क्यों सरकारी अनुदान का लेना उचित नहीं समझा। वे सरकारी अनुदान को एक प्रकार का नशा मानते हैं। यह स्वावलंबी भावना को कमजोर करता है। हिम्मताराम का मानना है कि शासकीय व्यवस्था में अनुदान सही और पात्र व्यक्ति को नहीं मिलपाता है जिससे इन योजनाओं का हस्र बुरा ही होता है। एक राजस्थानी कहावत के माध्यम से हिम्मताराम सरकारी मजबूरी का बयान करते हैं - बहुवां कनै चोर मरावे, चोर बहुवां रा भाई। इस अध्याय में कृषि-वानिकी का अर्थशास्त्र भी समझाया गया है जो साधारण किसानों के लिए बहुत उपयोगी है।

'जलग्रहण विकास में रही सहभागिता' में बताया गया है कि भारत सरकार की जलग्रहण विकास योजना में नागौर जिला प्रशासन ने इस कार्य हेतु हिम्मता राम को सर्वाधिक उपयुक्त व्यक्ति मानते हुये दो परियोजनाओं मांझवास और सुखवासी में इनकी सहायता ली। हिम्मताराम ने बिना सरकारी अनुदान के ही अपने खेत को एक आदर्श जलग्रहण विकास का प्रतीक बनाया।

'मारवाड़ फिलाटेलिक सोसाइटी ' जोधपुर के संस्थापक अध्यक्ष जगत किशोर परिहार द्वारा उपलब्ध कराये गए पर्यावरण एवं वन्य जीवों से जुड़े देश-विदेश के संग्रहणीय दुर्लभ डाक-टिकट भी इस पुस्तक में प्रकाशित किए गए हैं।

'विजिटर्स बुक से' अध्याय के अंतर्गत विभिन्न आगंतुकों की हिम्मतराम के कार्यों और गतिविधियों पर की गई टिप्पणियाँ अत्यंत रोचक और उपयोगी हैं।

भांभू जी का व्यक्तित्व सम्पूर्ण मानव मात्र के लिए प्रेरक है। भांभूजी ने यह सिद्ध कर दिया है कि इच्छा शक्ति हो तो कोई काम मुश्किल नहीं होता। भांभूजी ने हरित राजस्थान के अंतर्गत मारवाड़ के स्कूलों, कालेजों व सार्वजनिक स्थलों में वृक्ष लगाने में सहयोग किया। आपके ही प्रयास से गोगेलावरोटू क्षेत्र कंजर्वेशन रिजर्व घोषित हो पाये। भांभूजी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए चेतना रेलियाँ, संगोष्ठियाँ आयोजित कर तथा लाखों की संख्या में इस विषयक फोल्डर वितरित कर अद्भुत कार्य किया है। ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय असंतुलन के इस युग में भांभूजी जैसी सोच और कार्य करने वाले व्यक्तित्वों की महती आवश्यकता है।

श्री भांभूजी द्वारा बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम की अलख जगाना सराहनीय कार्य है। उनका जीवन निस्संदेह जनसामान्य के लिए प्रेरणादाई परिचय है। उनको रजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार-2014 से सम्मानित कर सरकार ने भी समाज के प्रति अपना दायित्व पूर्ण किया है। पुस्तक में 'स्मृतियों के गवाह' के अंतर्गत सचित्र विवरण इसे संग्रहणीय बनाता है। लेखक ने उन आत्मीय सहयोगियों का विवरण और सूची भी पुस्तक में दी है जिनका योगदान हिम्मता राम के कार्यों को आगे बढ़ाने में रहा है।

पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है -

  • मेरे जीवन में रचे बसे भांभूजी:मोईनूद्दीन चिश्ती...3
  • हिम्मत की डगर पर हिम्मताराम:राकेश रामावत ...5
  • संदेश:सी आर चौधरी, अशोक गहलोत, लक्ष्मण सिंह राठौड़, के आर बगड़िया,महाराजा गजसिंह, कर्नल ए के गहलोत, राधेश्याम शर्मा, एल एन हर्ष, एन वी पाटिल, के राम, फ़ारूख अफरीदी, ए के पुरोहित, मोहम्मद अतीक,अरुण कुमार, बाबूलाल जाजू, अजयवर्धन आचार्य, श्यामसुंदर पालीवाल, प्रलयंकर जोशी, प्रसन्नपुरी गोस्वामी, श्यामलाल हर्ष, ज्ञानचंद मकवाना, संत माधवदास रामस्नेही, अनिल बांठिया ...6
  • सार्वजनिक जीवन की डगर पर...29
  • बचपन से अब तक सिर्फ पौधे ही पौधे...34
  • हरिमा... अर्थात् 'पर्यावरण की गरिमा'...39
  • खेजड़ी बचाओ अभियान... 44
  • सरकारी अनुदान से सदैव किया परहेज... 47
  • पशुओं के प्रति करुणा भावना में अव्वल... 51
  • मानद वन्य जीव प्रतिपालक के रूप में सराहनीए सेवाएं... 54
  • शिकारियों के भी शिकारी रहे... 58
  • राष्ट्रीय पक्षी मोर की रक्षा में रही विशेष रुचि...62
  • नशामुक्ति अभियान के अनूठे नायक भी...67
  • पटाखा प्रतिबंध की पावन पहल...70
  • जलग्रहण विकास में रही सहभागिता...72
  • अध्यात्म प्रेमी कृषक... 73
  • साहित्य प्रेमी भी हैं...75
  • सहयोगियों से मिली भरपूर आत्मीयता... 78
  • आत्मीय सहयोगियों की सूची...80
  • स्मृतियों के गवाह...81
  • विजिटर्स बुक से...98
  • साधना से उपजा सम्मान...103

पुस्तक से कुछ उद्धरण

Text
धरती को शृंगार कराते हिम्मत जी
जीवन का आधार बनाते हिम्मत जी
मोर, कबूतर, हिरण, फाख्ता, चिंकारा
सब जीवों के प्राण बचाते हिम्मत जी
सुबह से लेकर देर रात तक कुदरत का
हंस के हरदम भार उठाते हिम्मत जी
अपने धन से पौधे बंटवाकर देखो
हरियाली की शान बढ़ाते हिम्मत जी
सौ नावों की करके सवारी ऐ 'फानी'
सबकी नैय्या पार कराते हिम्मत जी
फानी जोधपुरी[2]

पुस्तक की ऊपर दी गई विषय सूची हिम्मता राम भाम्भू के कार्यों का एक दृष्टि में विहंगम अवलोकन कराती है जिसे पढ़कर स्वमेव पुस्तक पढ़ने की इच्छा जागृत होती है। छात्रों, किसानों, वन एवं पर्यावरण संरक्षण से संबन्धित व्यक्तियों के लिए यह एक उपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक है। पुस्तक से कुछ उद्धरण नीचे दिये गए हैं:

हिम्मताराम भाम्भू के सरल प्रतीत होने वाले व्यक्तित्व में विराट जटिलताएँ कई बार अंजान व्यक्ति को चकरा देती हैं। ... दाद देनी पड़ेगी कि नितांत सूखे जलवायु में धरती की कोख से निकले खारे जल में अपनी मेहनत का पसीना मिलाकर हजारों-लाखों नन्हें पौधों को बेटे की तरह दुलारा-पाला-पौसा, ताकि वे वृक्ष बड़े होकर लाखों मूक पशु-पक्षियों और सभ्य इन्सानों को और अधिक उन्नत जीवन जीने के लिए मूल संसाधन देते रहें। (राकेश रामावत: हिम्मत की डगर पर हिम्मताराम, पृ.5)

अपने पैतृक गाँव 'सुखवासी' के नामकरण के बारे में हिम्मता राम मारवाड़ राजघराने की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि पर प्रकाश डालते हैं - जोधपुर महाराजा बखतसिंह ने बीकानेर यात्रा के दौरान मार्ग में रात्री विश्राम हेतु जो स्थान चुना, वहाँ सिर्फ दो ही घर थे। श्री दरबार को पीठ दर्द की तकलीफ थी, लेकिन यहाँ उनको सुकून का अनुभव हुआ। तब उन्होने तत्कालीन राजस्व नक्शों में से चारों पड़ौसी गांवों की 4999 बीघा जमीन निकाल कर नए गाँव का सीमा निर्धारण किया और नाम रखा 'सुखवासी'। (सार्वजनिक जीवन की डगर पर,पृ.29)

हिम्मताराम ने बचपन में खेती किसानी की तमाम कठिनाइयों से निबटने के स्थानीय उपायों को देखते हुये गोगेलाव गाँव की स्कूल में छठी तक पढ़ाई की। उसके बाद स्कूल छोड़ना पड़ा और गायें चराने की ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ी। हिम्मताराम ने खेती के मशीनीकरण के प्रारम्भिक दौर में स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को समय-समय पर जरूरत अनुसार पुर्जे खोलने एवं मरम्मत में सहायता देकर अपना व्यावहारिक ज्ञान बढ़ा लिया। इससे हिम्मताराम को आस-पास के इलाके में कुशल मिस्त्री के रूप में पहचान मिली। हिम्मताराम ने वर्ष 1976 में नागौर में रहना शुरू किया और यहाँ ट्रैक्टर पार्ट्स की दुकान खोली। अपनी सरल सादगीभरी दिनचर्या और व्यवहार कुशलता के जरिये हिम्मताराम ने नागौर जिले के ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों से अंतरंग मित्रता स्थापित की। इन संपर्कों के माध्यम से हिम्मताराम ने पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया। हिम्मताराम वर्ष 1986 में जापान सरकार की सहायता से संचालित परियोजना के अंतर्गत वनविभाग से जुड़ गए। उन्होने वनविभाग के ट्रकों मैं पौधे भरकर गाँव-ढाणियों में निशुल्क पौधे बांटने का बीड़ा उठाया। हिम्मताराम ने सार्वजनिक जीवन में अत्यंत स्वच्छ छवि वाले लोकसेवक की ख्याति अर्जित की। उनके पर्यावरण के प्रति समर्पण को देखते हुये युनेस्को के प्रदेश संयोजक बाबूलाल जाजू ने हिम्मताराम को युनेस्को पर्यावरण प्रकोष्ठ का जिला संयोजक मनोनीत किया। (सार्वजनिक जीवन की डगर पर,पृ.30-33)

पिछले पचास-पचपन सालों से पौधे लगाते रहने के दौरान हिम्मताराम ने कई स्थानीय प्रजातियों पर प्रयोग कर उनके संबंध में व्यावहारिक ज्ञान हासिल किया। उन्हें ज्ञात हुआ कि नए रोपित पौधों में शीशम की मृत्यु दर बहुत ज्यादा है और उनका पुनरुद्धार अथवा रिपलेसमेंट भी बहुत कठिन है। इस भूभाग में स्थानीय पौधे नीम, पीपल, बड़, खेजड़ी और रोहिड़ा आदि पनप सकते हैं लेकिन शीशम या गुलमोहर में शूला रोग ज्यादा लगने की समस्या है। सरकारी भूमि पर पौधे लगाना और वितरण करना हिम्मताराम का शौक नहीं है। वह एक आदर्श किसान और वृक्षप्रेमी के रूप में अपने निजी खेतों में सफल पर्यावरण प्रेमी नजर आते हैं। (बचपन से अब तक सिर्फ पौधे ही पौधे, पृ.37)

पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र हरिमा

पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र हरिमा

नागौर से 12 किमी दूर सरासनी ग्राम पंचायत के हरिमा गाँव में हिम्मताराम भाम्भू की निजी तपोभूमि के रूप में पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र विकसित हो चुका है। इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानना आवश्यक है।

हिम्मताराम बचपन से ही धार्मिक भक्ति-भावना से ओतप्रोत थे। उन्होने मूल पुस्तैनी गाँव सुखवासी की पैतृक भूमि के अलावा नागौर के नजदीक हरिमा गाँव को अपने पर्यावरण संरक्षण अभियान की केंद्र-स्थली के रूप में चुना। वर्ष 1998 में हिम्मताराम ने 6 हेक्टर कृषि भूमि हरिमा गाँव में खरीदी। पहले इस खेत की बाड़ लगाई, फिर तारबंदी कराई और नलकूप खुदवाया। नलकूप में 260 फीट गहराई पर खारा पानी निकला। शुरुआती दिनों में गाँव के लोग हिम्मताराम के खेत में पारंपरिक बाजरा, मोठ, तिल, ज्वार आदि की फसलों के बजाय कतारों में पौधे रोपते देख हँसते थे परंतु हिम्मताराम ने धैर्य नहीं खोया। बाद के वर्षों में भी कतारबद्ध पेड़ों के बीच की समतल भूमि पर जुताई, बुआई, बिजाई, निराई आदि कार्यों में अधिक खर्च होता था जिसका घाटा उसे उठाना पड़ा।

जलग्रहण विकास

खारे पानी में पेड़ लगाना या खेती करना संभव नहीं था। इसलिए हिम्मताराम ने उपलब्ध पानी के साथ ही और विकल्प की तलास शुरू की। यहीं से उनके मन में जलग्रहण विकास योजना लागू करने का विचार आया। वरसात के दिनों में पड़ौसी लोग अतिरिक्त पानी को फालतू बहने देते थे । हिम्मताराम ने उस अतिरिक्त पानी को अपने खेत में रोकना शुरू किया। पानी के दीर्घकालीन ठहराव से बरसाती फसलें गल जाती जिसका घाटा उसे प्रारम्भ में झेलना पड़ा। लेकिन अतिरिक्त पानी आखिर तो जमीन में ही जा रहा था। इससे खेत में कतारबद्ध पौधे लगाने में फायदा मिला। फसल भले ही गली पर वह हरी खाद का फायदा दे गई। जमीन में अब नमी बनी रहने से केंचुये पनपने लगे और इससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार हुआ। पौधे बढ़कर पेड़ के रूप में बनने लगे। हरिमा गाँव के अन्य 30 नलकूप जहां सूखे पड़े हैं वहीं हिम्मताराम के प्रयासों से खारे पानी के बावजूद उपलब्ध बरसाती पानी के बूंद-बूंद के सदुपयोग से सूखे हरिमा गाँव में ही अपने खेत में वृक्षाच्छादित हरा आवरण खड़ा करने के भागीरथी प्रयास में सफल हुये। अब न केवल वृक्ष आवरण तैयार हो गया है बल्कि बम्पर फसल भी ली जा सकती है। पेड़ों द्वारा आच्छादित भूमि के अतिरिक्त पड़ी आस-पास की भूमि पर पहले से अधिक फसल का उत्पादन होता है। यहाँ जल स्तर भी ऊपर आ गया है। पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र हरिमा को अब कृषि-वानिकी के एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। आसपास के सरकारी और निजी स्कूलों के छात्र यहाँ प्रेक्टिकल ट्रेनिंग के लिए आते हैं। करीब 5 हजार से अधिक किसान भाई भी यहाँ भ्रमण करके सीख चुके हैं।

पर्यावरण प्रदर्शनी-स्थल

पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र हरिमा में आगंतुकों में पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत करने के लिए एक प्रदर्शनी-स्थल भी बना रखा है। प्रवेश द्वार के पास ही वर्ष 1730 में जोधपुर रियासत के खेजड़ली गाँव में खेजड़ी पेड़ों के कटाई के विरोध में अमृतदेवी विश्नोई सहित 363 पर्यावरण शहीदों को समर्पित जीवंत तस्वीर लगाई गई हैं। दीवार के जोड़ों पर राजस्थान के वन्य जीवों के रंगीन चित्र भी लगाए गए हैं। (हरिमा... अर्थात् 'पर्यावरण की गरिमा', पृ.39-43)

महामहिम राष्ट्रपति ने बुलावा भेजा

हिम्मताराम भांभू को महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा चर्चा दिनांक 3.1.2020 के बाद सराहा और धन्यवाद दिया

पर्यावरण प्रेम ने नागौर के हिम्मताराम भांभू को इतनी शोहरत दिला दी कि खुद महामहिम राष्ट्रपति ने उनके पास बुलावा भेजा. राष्ट्रपति ने उनसे न केवल मुलाकात की बल्कि उनके काम को सराहा भी और भविष्य की चिंताओं पर चर्चा भी की.

नागौर के रहने वाले पर्यावरण प्रेमी हिम्मताराम भांभू ने कभी यह नहीं सोचा था कि उनकी जिंदगी में कभी ऐसा भी पल आएगा कि खुद भारत के प्रथम नागरिक उनको मिलने को बुलाएंगे. महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर लौटे भांभू राष्ट्रपति महोदय से मुलाकात के बाद से गदगद हैं.

19 साल की उम्र में उनकी दादी ने सबसे पहले उनके हाथ से एक पीपल का पौधा लगवाया था. उसके बाद पर्यावरण के प्रति उनका प्रेम इतना प्रगाढ़ हो गया कि वो अब तक साढ़े पांच लाख से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं, जिनमें से साढ़े तीन लाख से ज्यादा पौधे अब पेड़ बन चुके हैं और यह क्रम लगातार जारी है.

महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास उनकी जानकारी कैसे पहुंची यह तो भांभू नहीं जानते लेकिन उनका कहना है कि यह मूक प्राणियों और पर्यावरण की सेवा का ही नतीजा है कि राष्ट्रपति ने उनको बुलाया.

भांभू के अनुसार राष्ट्रपति ने उनके सात 'ज' की थ्योरी जानी और साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए किस प्रकार से प्रयास किए जा सकते हैं, विषय पर मूल रूप से चर्चा की साथ ही गोपालन को मनरेगा से जोड़ने की बात पर भी चर्चा की.

हिम्मताराम भांभू इस उम्र में भी पूरी तरह से पर्यावरण के लिए दृढ़ संकल्पित हैं और उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति से यह वादा किया है कि अगर सब कुछ सही रहा तो आने वाले 1 दशक में वो दो लाख पौधे और लगाएंगे. जरूरत इस बात की है कि सरकार भी उनके इस पर्यावरण रक्षा के प्रण में उनका साथ दे.

संदर्भ: हनुमान तंवर, नागौर, जी-न्यूज राजस्थान 7.1.2020

महामहिम राष्ट्रपति से चर्चा 3.1.2020

नागौर से पर्यावरण प्रेमी हिम्मताराम भांभू राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ चर्चा करते हुये
राष्ट्रपति भवन दिल्ली में हिम्मताराम भांभू

नागौर से पर्यावरण प्रेमी हिम्मताराम भांभू की नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आमंत्रण पर शुक्रवार दिनांक 3 जनवरी 2020 को उनसे मुलाकात हुई. इस मुलाक़ात के दौरान हिम्मताराम भांभू ने महामहिम राष्ट्रपति को कई अहम सुझाव दिए. राष्ट्रपति भवन में देश भर से उनके बुलावे पर आये प्रमुख लोगों के साथ चाय पर चर्चा करते हुए हिम्मताराम भांभू ने सुझाव दिया कि पृथ्वी पर मनुष्य के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और वन्य प्राणी संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने राष्ट्रपति को देश में घटती पानी की मात्रा, घटते वन्य क्षेत्र व वन्य-जीव आदि के कारणों के बारे में सुझाव दिये. उन्होंने इस मौके पर खेजड़ली बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि 290 साल पहले पेड़ों के लिए जान देने वाले 363 लोगों के बलिदान से भी अवगत कराया.

पद्मश्री सम्मान - 2020

हिम्मताराम भांभू द्वारा तैयार जंगल का दृश्य

हिम्मताराम भांभू द्वारा पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीव संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जैविक खेती, पशुपालन, नशा मुक्ति, दलित उद्धार आदि के संबंध में किए गए समाज सेवा के उल्लेखनीय कार्यों के लिए महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा गणतन्त्र दिवस 26 जनवरी 2020 पर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

राजस्थान के ट्री-मैन हिम्मताराम की मेहनत और हिम्मत को मिला है पद्मश्री सम्मान: राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले हिम्मताराम भांभू 1975 से अब तक साढ़े पांच लाख पौधे रोप चुके हैं। यही नहीं, इनमें से साढ़े तीन लाख पेड़ बन चुके हैं। इसमें छह एकड़ में 11 हजार वृक्षों वाला एक जंगल भी शामिल है। पर्यावरण को समर्पित इस अहम योगदान के लिए उन्हें हाल ही में 26 जनवरी 2020 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया।

पर्यावरण के प्रति प्रेम उन्हें संस्कारों के रूप में मिला। नागौर जिले के सुखवासी गांव के रहने वाले हिम्मताराम जब 18 साल के थे तो उनकी दादी ने उनसे पीपल का एक पौधा लगवाया था और इस पौधे का पूरा ध्यान रखने के लिए कहा था। उस दिन दादी से मिली प्रेरणा का नतीजा यह है कि 1975 से अब तक हिम्मताराम राजस्थान के कोने-कोने में करीब साढ़े पांच लाख पौधे रोप चुके हैं।

हिम्मताराम ने नागौर के नजदीक हरिमा गांव में छह एकड़ जमीन खरीदी और उस पर 11 हजार पौधे रोपकर एक समृद्ध जंगल तैयार कर दिया। यहां 300 मोर और पशु-पक्षी प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं। जागरण समूह के प्रकाशन नईदुनिया से बातचीत में हिम्मताराम ने कहा, इंसान की जिंदगी अधिक से अधिक 100 वर्ष होती है, लेकिन पेड़ सैकड़ों साल तक रहते हैं। बस इसी सोच और दादी से मिली प्रेरणा ने मुझे यह काम करने के लिए प्रेरित किया। मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने जो कुछ किया, उससे आज सैकड़ों पशु-पक्षियों को रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण मिल पाया और मैं पर्यावरण को बचाए रखने में भी एक छोटा सा योगदान दे पाया।

69 साल के हिम्मताराम भांभू का गृह जिला नागौर रेगिस्तानी इलाके की शुरुआत का जिला माना जाता है। अधिकांश इलाके में पानी खारा है। खुद हिम्मताराम जब जंगल बसा रहे थे और इसके लिए नलकूप खुदवाया तो 250 फीट की गहराई पर खारा पानी आ गया। हिम्मताराम ने इस खारे पानी का इस्तेमाल तो किया ही साथ ही बारिश के पानी को खेत में रोककर जमीन में नमी पैदा की और इससे पेड़ उगाए। आज उनका उगाया-बसाया जंगल पर्यावरण का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए एक संस्थान की तरह है। हिम्मताराम कहते हैं कि खारे पानी में भी पौधे पनप सकते हैं। यह हमने यहां किया है। इस जंगल में हर तरह के पेड़ हैं।

हिम्मताराम बताते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी किया अपनी पूंजी और पुरस्कारों के रूप में प्राप्त धनराशि से किया। कहते हैं, वन विभाग से पौधे खरीदकर लोगों को देता था और उनसे संपर्क में रहता था। जो पौधे लगाए गए, उनकी वृद्धि के बारे में पूछता रहता था, इसीलिए पौधे पेड़ बन पाए। पर्यावरण के साथ ही पशु-पक्षियों से भी प्रेम बढ़ा। वे मेनका गांधी की संस्था पीपल फॉर एनिमल से भी जुड़े हैं और अब तक 13 शिकारियों को जेल पहुंचा चुके हैं। उनके काम को राज्य और केंद्र सरकार ही नहीं विभिन्न संस्थाओं ने भी सराहा है।

संदर्भ: दैनिक जागरण,6.2.2020

हिम्मताराम भांभू को 8.11.2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया

मीडिया में हिम्मता राम भांभू

वृक्ष होते हैं धरती का श्रृंगार : भांभू:

खेजड़ी (शमी वृक्ष)

डेगाना पंचायत समिति में महावीर इंटरनेशनल संस्थान नागौर की ओर से खेजड़ी के बीज वितरण किए गए। मुख्य अतिथि वन्यजीव प्रतिपालक एवं वन एवं वन्यजीव सुरक्षा समिति जिलाध्यक्ष हिम्मता राम भांभू ने कहा कि महावीर इंटरनेशनल संस्थान नागौर की ओर से जिले में दो लाख खेजड़ी के कल्पवृक्ष के पौधों का निशुल्क बीज वितरण करने का कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि पेड़ मानव मित्र होते हैं। पौधों से मनुष्य को शुद्ध हवा मिलती हैं। महावीर इंटरनेशनल संस्थान नागौर के अध्यक्ष रिखबचंद नाहटा ने कहा कि वृक्ष के बिना मानव का जीवन किसी भी काम का नहीं है, मानव को हर जरूरत में पेड़ की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम में सहायक अभियंता महावीर बांगड़ा, विमल चंद नाहटा, नरेन्द्र सुखलेचा, सुभाष कोठारी, पर्यावरण प्रेमी व गोसेवा संघ के परमा राम कड़वा, पंचायत प्रसार अधिकारी भरत सिंह यादव, एईएन सुनील कुमार जैन ने विचार व्यक्त किए। पर्यावरण के प्रति जागरूकता व प्रचार-प्रसार के लिए प्रचार सामग्री का वितरण किया गया। इस मौके पर इड़वा सरपंच शिवप्रताप सिंह, पूनास सरपंच छैलू सिंह पूनास, युवा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बंशी लाल चोयल, पूर्व सरपंच छोटू सिंह झगड़वास, लंगोड़ सरपंच मूल सिंह, मदनलाल मातवा, कैलाश खत्री, अलतवा सरपंच मोहन राम विश्नोई आदि उपस्थित थे।[3]

पौधे लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण संवर्धन का संदेश:

बरगद का पेड़

जिलेके पर्यावरण प्रेमी पिपुल फॉर एनीमल्स के जिला अध्यक्ष हिम्मता राम भांभू ने रविन्द्र नाथ टैगोर सीनियर सेकंडरी स्कूल में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। भांभू ने कहा कि मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए धरती को खोखला कर दिया है। पर्यावरण के साथ की गई इस छेड़छाड़ का खामियाजा आने वाली पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा।

पर्यावरण की रक्षा के लिए हर व्यक्ति को आगे आकर कार्य करना होगा। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में नीम के 80 पौधे लगाए गए। भांभू ने राजेन्द्र भींचर को पिपुल फॉर एनीमल्स का तहसील अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस अवसर पर दीपपुरा के पूर्व सरपंच भंवरा राम कड़वा, ईश्वर राम किलका, ज्ञाना राम रणवां, श्रवण राम खाण्डोटिया, रामेश्वर अंवला, हीरा राम जाखड़, दाना राम राठी, संस्था निदेशक अर्जुन राम कड़वा, सह निदेशक जगदीश कड़वा आदि मौजूद थे।[4]

मौलासर|स्थानीयदेवा की ढाणी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को वन विभाग द्वारा वन महोत्सव मनाया गया जिसके तहत जिला अध्यक्ष पीपुल फॉर एनीमल एवं जिला वन एवं वन्य जीव सुरक्षा समिति नागौर के हिम्मतराम भांभू की अगुवाई में नीम, सीरस आदि के पौधे लगाए गए। इस दौरान पर्यावरण प्रेमी शिवराम बलारा, वन विभाग के वनरक्षक रतनाराम, पुरखाराम, प्रधानाध्यापक नरपत सिंह, मोहम्मद फारूख, हीराराम, मानाराम, भंवरलाल महला आदि मौजूद थे। [5]

पर्यावरण प्रेमी 100 गांवों में बांटेंगे पीपल और वट के पौधे:

पीपल वृक्ष

पीपुल फॉर एनीमल्स संस्था अब प्रत्येक गांव में एक पीपल और एक वट वृक्ष के साथ ट्री गार्ड देगी। इन पौधों की जिम्मेदारी गांव के ही एक व्यक्ति को सौंपी जाएगी। पर्यावरण प्रेमी हिम्मता राम भांभू ने बताया कि एक वट वृक्ष की उम्र एक हजार वर्ष होती है। वहीं पीपल की उम्र भी इससे ज्यादा होती है। दोनों पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देते हैं। प्रत्येक गांव में एक पीपल तो एक वट वृक्ष के पौधे बांटे जाएंगे। जो व्यक्ति तीन वर्ष तक इनकी जिम्मेदारी संभालेगा, उन्हें यह फ्री में दिए जाएंगे। पौधे को सात फीट तक बड़ा करने पर पर्यावरण सम्मेलन में व्यक्ति को एक हजार रुपए, प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। पर्यावरण जागृति के लिए संस्था पंचायत समिति स्तर पर संगोष्ठी भी करेगी। [6]

मीडिया में हिम्मताराम भांभू की गैलरी

हिम्मताराम भांभू पर लेख

मप्र पहुंचे पद्मश्री हिम्मताराम भांभू 16.02.2023

पर्यावरण संरक्षण पर विचार किये साझा: भोपाल। अपने जीवन में करीब 5 लाख पौधे रोपने वाले राजस्थान के पद्मश्री हिम्मताराम भांभू 16.02.2023 से मप्र की यात्रा पर हैं। राजधानी भोपाल में आयोजित पर्यावरण गतिविधि कार्यशाला में उन्होंने पर्यावरण में वृक्षों के महत्व को साझा किया। एक निजी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पौधरोपण को परोपकार से जोड़ते हुए बताया कि उनके द्वारा लगाये गये वृक्षों से अनुमानत: 12 अरब रूपये की ऑक्सीजन प्राप्त हो रही है। इस दौरान वर्तमान परिदृश्य मे प्रकृति का अधिक मात्रा मे किऐ जा रहे उपभोग को लेकर चिंता भी जताई है। महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार का सूचना प्रसारण मंत्रालय भांभू पर वृत्तचित्र *द ट्रीमैन ऑफ राजस्थान* भी बना रहा है। इसका फिल्मांकन रायसेन के भीमबैठका के पास किया जा रहा है। इसमें भी शामिल होने के बाद वह 19 फरवरी को राजस्थान लौट जाएंगे। (https://ekhulasa.com/padmashree-himmataram-bhambhu-arrived-in-mp/ )

भारत सरकार सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा श्री हिम्मताराम जी भामू पर बनाई जा रही फिल्म 'ट्री मैन ऑफ राजस्थान' की शूटिंग के लिए 16.02.2023 को वे भोपाल और भीमबेटका पधारे। दिनभर भीमबेटका में शूटिंग की। विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका देखकर हिम्मताराम भांभू बहुत प्रभावित हुये। भीमबेटका में शूटिंग के बाद शाम को पर्यावरण संरक्षण पर आपकी अध्यक्षता में एलएनसीटी भोपाल में कार्यशाला रखी गयी।

भीमबेटका से नीचे का विहंगम दृश्य

भीमबेटका: भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त के रायसेन जिले में स्थित एक पुरापाषाणिक आवासीय पुरास्थल है। यह आदि-मानव द्वारा बनाये गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रों को पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल के समय का माना जाता है। ये चित्र भारतीय उपमहाद्वीप में मानव जीवन के प्राचीनतम चिह्न हैं। यह स्थल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 45 किमी दक्षिणपूर्व में स्थित है। भीमबेटका क्षेत्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मंडल ने अगस्त 1990 में राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल घोषित किया। इसके बाद जुलाई 2003 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। यहाँ पर अन्य पुरावशेष भी मिले हैं जिनमें प्राचीन किले की दीवार, लघुस्तूप, पाषाण निर्मित भवन, शुंग-गुप्त कालीन अभिलेख, शंख अभिलेख और परमार कालीन मंदिर के अवशेष सम्मिलित हैं। ऐसा माना जाता है कि यह स्थान महाभारत के चरित्र भीम से संबन्धित है एवं इसी से इसका नाम भीमबैठका (कालांतर में भीमबेटका) पड़ा। ये गुफाएँ मध्य भारत के पठार के दक्षिणी किनारे पर स्थित विन्ध्याचल की पहाड़ियों के निचले छोर पर हैं। इसके दक्षिण में सतपुड़ा की पहाड़ियाँ आरम्भ हो जाती हैं।

पर्यावरण संरक्षण कार्यशाला भोपाल , 16.02.2023

पर्यावरण संरक्षण कार्यशाला : शाम को LNCT group of institute में पद्मश्री हिम्मताराम भाम्भू का आगमन हुआ। एल. एन. सी. टी. सभा गृह, भोपाल में नागौर (राज) से पधारे वृक्ष मित्र (Tree man) पर्यावरण प्रेमी पद्मश्री हिम्मताराम भांभू जी का व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ। पद्मश्री हिम्मताराम भाम्भू ने पर्यावरण संरक्षण पर स्वरचित कविता का पाठ किया, जिसका शीर्षक था - पेड़ काटने वालों को सब मिल कर डाटो। आज की महती आवश्यकता पर्यावरण पर संगोष्ठी हुई। पर्यायवरणविदों द्वारा पर्यावरण पर बहुत ही अच्छा मार्गदर्शन मिला। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा किऐ और उपस्थित छात्र-छात्राओं व गणमान्य लोगों को संकल्पबद्ध करवाया कि आप सभी अपने जन्म दिवस पर एक वृक्ष अवश्य लगाऐंगे। उन्होंने इस दौरान जल, जंगल, जीव, जैविक, जैव विविधता पर भी चर्चा की और वर्तमान परिदृश्य में प्रकृति के अत्याधिक दोहन को लेकर चिंता जाहिर की। पर्यावरण के प्रति उनकी चिंता और पर्यावरण की रक्षा पर जागरूकता उनके विचारों से मिली।

एल एन सी टी भोपाल में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फोंरेस्ट मैनेजमेंट के प्रोफेसर डॉ अमिताभ पाण्डेय ने की जिन्होने बताया कि हमें मानव क्रियाकलाप और प्रकृति के बीच समन्वय स्थापित करना होगा। एल एन सी टी समूह के सचिव डॉ अनुपम चौकसे ने कहा कि हमें सस्टेनेइबल डेवलपमेंट को अपनाना होगा और विद्यार्थियों के माध्यम से समाज को उत्तरदाई बनाना होगा। डॉ शिवपूजन पांडे, विभाग संयोजक - पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, ने प्रदूषण के कारणों पर प्रकाश डाला। एल एन सी टी समूह के क्वेस्ट नेचर क्लब के संयोजक प्रो. (डॉ) अमितबोध उपाध्याय ने क्लब द्वारा पिछले 20 वर्षों में पर्यावरण संरक्षण के बारे में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। डॉ एके सिंह तथा डॉ अमित श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में एल एन सी टी कालेज के प्रोफेसर, विद्यार्थी, जाट सभा भोपाल के वरिष्ठ समाज सेवी, पदाधिकारी गण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इस अवसर पर अरविंद सिंह संस्थान के डायरेक्टर, योगेन्द्र भाम्भू, हरदा, संतोष ठाकुर, पूर्व अध्यक्ष जाट सभा भोपाल, हरिकिशन डागर, होडेल सिंह, मोहन लाल गोदारा, श्रीमती अजुद्या गोदारा, पूर्व अध्यक्ष जाट सभा भोपाल, श्रीमती संतोष ठाकुर, एआईएमएस के रामनिवास भांभू, आर्किटेक्ट अमित बुरड़क, भूराराम खोजा (नागोर) तथा LNCT के faculty और students उपस्थित रहे।

पर्यावरण संरक्षण कार्यशाला भोपाल दिनांक 16.02.2023 के चित्र
जाट समाज भोपाल द्वारा पद्मश्री हिम्मताराम जी भांभू का स्वागत और रात्रिभोज, 16.02.2023

जाट समाज भोपाल द्वारा स्वागत और रात्रिभोज: पर्यावरण संरक्षण कार्यशाला के पश्चात समाज के सभी वरिष्ठ जन श्री मोहनलाल जी गोदारा के निवास स्थान, अरेरा कॉलोनी में एकत्रित हुए । यहां पर पद्मश्री हिम्मताराम जी भांभू का पगड़ी पहनाकर, शाल ओढ़ाकर तथा पुष्पहारों से स्वागत/सम्मान किया गया । इसी दौरान पद्मश्री भांभू जी द्वारा जाट समाज के संबंध में विस्तार से चर्चा की । उन्होंने अपने कर्मक्षेत्र के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि सब लोगों को अपने और अपने परिवार के सदस्यों के जन्मदिवस के अवसर पर एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए और उसकी सुरक्षा, उसके बड़े होने तक सुनिश्चित करना चाहिए । केवल पेड़ लगाकर भूलना नहीं चाहिए जो कि आजकल हो रहा है । उन्होंने जाट समाज के आराध्य देव सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज तथा भक्त शिरोमणि कर्मा बाई , फूलाबाई, धन्ना भगत आदि के पदचिन्ह पर चलने की सीख दी । इसके पश्चात अतिथियों को सुस्वादू भोजन श्रीमती अयोध्या गोदारा जी द्वारा उनके निवास पर कराया गया । तत्पश्चात कार्यक्रम का समाप्त हुआ । कार्यक्रम में जाट सभा के पूर्व अध्यक्ष सर्वश्री संतोष ठाकुर, मोहनलाल गोदारा, हरिनारायण जी माली, जाट सभा के वरिष्ठ समाजसेवी श्री भूपेंद्र सिंह चौधरी, श्रीमती ज्योति चौधरी, श्रीमती संतोष ठाकुर, श्री हरि कृष्ण डागर, श्री होडल सिंह, श्री रामनिवास भांभू, श्री भूराराम जी खोजा (नागौर), श्री राजेंद्र आर्य, श्री भुजराम जाट ,श्री राकेश वर्मा, श्री सुरेंद्र पटेल आदि समाज सेवी उपस्थित थे ।

हिम्मताराम भांभू की चित्र गैलरी

Gallery-A

Gallery-A

Gallery-B

Gallery-B

Gallery-C

Gallery-C

Gallery-D

Gallery-D

Gallery-E

Gallery-E

हिम्मताराम भांभू के समाचारों की चित्र गैलरी

हिम्मताराम भांभू के सम्मान और अभिलेखों की चित्र गैलरी

बाहरी कड़ियाँ

संदर्भ


Back to The Environmentalists