Ghalyan
Ghalyan (घाल्याण), Gahlan (गहलान), Galiyan (गलियान), Ghalan (घालान)[1], Ghalan (घालाण)[2], Gahlyan, Gallan (गाल्लान) [3], Galan (गाल्लान)[4] [5], Gallan (ग़ल्लान)[6], Gala (गाला) Ghalan (घालान)[7][8] is a gotra of Jats found in Haryana and Uttar Pradesh.
Origin
History
According to Bhim Singh Dahiya, they are mentioned in the Markandeya Purana as Galava (गालव). The original name is Gall and the suffix ‘an’ or ‘va’ is added to it. The Gauls of Europe are their brothers.[10]
The Gauls, the old name of the French, are the same as the Gallan of India, with the suffix 'an' added to the clan name under Panini's rule.[11]
1. श्रीपत सिही अर्थात इन्द्रप्रस्थ, आज का दिल्ली - कहीं-कहीं श्रीपत और कहीं-कहीं इन्द्रप्रस्थ का उल्लेख मिलता है। मौजूदा समय में दक्षिण दिल्ली के इस इलाके का वर्णन महाभारत नामक ग्रंथ में इन्द्रप्रस्थ के रूप में है। पांडवों और कौरवों के बीच जब संबंध खराब हुए, तो धृतराष्ट्र ने यमुना के किनारे खांडवप्रस्थ क्षेत्र को पांडवों को देकर अलग कर दिया था। यह क्षेत्र उजाड़ और दुर्गम रहा था, परन्तु पांडवों ने मयासुर और कड़ी मेहनत से इसे आबाद कर दिया। इसी खांडव क्षेत्र को आबाद कर पांडवों ने मयासुर से यहां एक किला और उसमें महल बनवाया। इस क्षेत्र का नाम इन्होंने इन्द्रप्रस्थ रखा। 2. व्याघ्रप्रस्थ, आज का बागपत - इसे महाभारत काल में व्याघ्रप्रस्थ कहा जाता था। व्याघ्रप्रस्थ यानी बाघों के रहने की जगह। यहां सैकड़ों वर्ष पहले से बाघ पाए जाते रहे हैं। मुगल काल से इसको बागपत के नाम से जाना जाने लगा। यह उत्तर प्रदेश का एक जिला है। बागपत ही वह जगह है जहां बरनावा (वर्णुव्रत) है, जहां कौरवों ने लाक्षागृह बनवाकर उसमें पांडवों को जलाने की कोशिश की है। 3. स्वर्णप्रस्थ, आज का सोनीपत - को पहले स्वर्णप्रस्थ कहा जाता था, बाद में यह सोनप्रस्थ होकर सोनीपत हो गया। स्वर्णप्रस्थ अर्थात सोने का शहर, यहां पर सोने का काम हुआ करता था। 4. पांडुप्रस्थ, आज का पानीपत - को पांडुप्रस्थ कहा जाता था क्योंकि पांडु सबसे ज्यादा यहीं पर आते रहते थे। जाट इतिहास में यह जगह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पर ३ बड़ी लड़ाइयां भी लड़ी गई हैं। इसी पानीपत के पास थानेसर आज का कुरुक्षेत्र है, जहां कौरव-पांडवों के बीच लड़ाई हुई है। पानीपत राजधानी नई दिल्ली से ९० किमी उत्तर में है। इसे सिटी ऑफ वीवर अर्थात बुनकरों का शहर भी कहा जाता है। यही पानीपत के गांवों में पांडव वंशी गाहल्याण जाट वीरों के सात गांव हैं, जिनमें एक गांव पावटी है। इस पावटी की पावन धरा पर गवर्नर अर्थात राज्यपाल आचार्य देवव्रत गाहल्याण 🙏 उर्फ सुभाष गाहल्याण 🙏 व लेखक चौधरी कृष्ण सिंह गाहल्याण 🙏 अध्यक्ष जाट संगठन। चंद्रवंश की एक शाखा पांडववंश में ६७वीं पीढ़ी में कुन्ती पुत्र धनुर्धारी अर्जुन का जन्म हस्तिनापुर में हुआ है। इसी पांडव वंश में चंद्रवंश की ३०८वीं पीढ़ी में और कुन्ती पुत्र अर्जुन से आगे चलकर २४१वीं पीढ़ी में पावटी गांव की स्थापना से १८वीं पीढ़ी में लेखक चौधरी कृष्ण सिंह गाहल्याण 🙏 का जन्म पांडुप्रस्थ आज का पानीपत के एक गांव पावटी की पावन धरा पर हुआ है। 5. तिलप्रस्थ, अर्थात तिलपत - को पहले तिलप्रस्थ कहा जाता था। यह हरियाणा के फरीदाबाद जिले का एक कस्बा है। जय जाट, विजय जाट। लेखक चौधरी कृष्ण सिंह गाहल्याण 🙏 अध्यक्ष जाट संगठन। ऐसे और पोस्ट देखने के लिए और JAT Sangathan से जुड़ने के लिए क्लिक करें - https://kutumbapp.page.link/8oNdxebk4at175Nz8?ref=OG0UM
गाहल्याण गोत्र का इतिहास
भलेराम बेनीवाल[12] के अनुसार यह अति प्राचीन गोत्र है। इस गोत्र का भाईचारा खटकड़, सूरा व सिन्धु लोगों से रहा होगा। इस गोत्र का प्रमाण रामायण और महाभारत में मिलता है। इस समय इस गोत्र के जाटों को युद्ध में गालया गया था। लेखक भगवती चरण ने फ़ारस घाटी की लड़ाई में इसका वर्णन किया है। कसं कर गालणों के कारण इस गोत्र की उत्पत्ति हुई। ई.पू. जाटों के जो ६ गोत्र हरिवर्ष (यूरोप) गए थे उनमें यह गालण गोत्र के जाट भी थे। जब हरिवर्ष में जाकर सभी गोत्र फैल गए तो गालण लोगों ने अपना मुंह फ़्रांस की तरफ़ किया। वहां पर इन्होंने सत्ता स्थापित की और शक्तिशाली प्रशासन दिया। गालण के नाम पर ही वहां का नाम गाल देश पड़ा। समयानुसार ये लोग पुनः आर्यावर्त को लौटे। सिन्ध तथा राजस्थान को पार कर ये हरियाणा में पानीपत तथा उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और बिजनौर में कुछ गांवों में आबाद हुए।
Relationship with Talan
According to regional oral traditions, the Ghalyan and Talan (also rendered as Taliyan, Tahlan, or Tehlan) Jat clans share a close historical, social, and direct fraternal lineage. Local narratives and traditional genealogists (*Bhats*) regard both groups as biological brother lineages (*sagge bhai*) descending directly from two real brothers of a common ancestor.
Community traditions link the early heritage of both Ghalyan and Talan with regional tribal networks, including the Baliyan khap, Desh Khap, and historical ties to the Tomar confederation. Over time, localized migrations across Haryana, Western Uttar Pradesh, and Delhi NCR led to the descendants of the two brothers establishing distinct settlements, which evolved into separate clan names while maintaining strong social cohesion and strict marital prohibition (*exogamy*).
While the precise historical documentation between Ghalyan, Talan, Baliyan, and Desh Khap continues to be recorded, their mutual brotherhood remains a deeply preserved aspect of regional Jat folklore and khap traditions.
Distribution in Haryana
Villages in Panipat district
Atta, Chhajju Garhi, Dahar, Dikadla, Jurasi Khalsa, Jurasi Saraf Khas, Kewal Garhi, Pawati,
Villages in Karnal district
Distribution in Uttar Pradesh
Villages in Bijnor district
Notable persons
- Professor Ranbir Singh - Vice-Chancellor of the National Law University, Delhi.
- Jasbir Singh Numberdar - District President, Haryana Numberdar Association.
- Acharya Devvrat (Subash Ghalyan) - Arya Samajist and Governor.
- Advocate Kanwar Pal Galiyan - Practising at Muzaffarnagar District Court; belongs to Mandor.
- Chaudhary Babloo Galiyan - Ex-Navy person presently working at the State Bank of India, Muzaffarnagar; belongs to Behra Assa.
- लेखक चौधरी कृष्ण सिंह गाहल्याण - लेखक चौधरी कृष्ण सिंह गाहल्याण 🙏 की कलम से जाट वीरों व जाट विंग्राणियों। बागपत अर्थात व्याघ्रप्रस्थ तोमर जाट वीरों के देश में तोमर जाट वीरों के प्रसिद्ध गांव: 1. बड़ौत नगर पालिका - तोमर जाट वीरों के देश की राजधानी; 2. बावली - एशिया का जाट वीरों का सबसे बड़ा गांव; 3. बिजरौल - 1857 के महान क्रांतिकारी जाट राजा बाबा शाहमल तोमर जाट वीर का गांव; 4. किसनपुर बराल - तोमर जाट वीरों का प्राचीन गांव; 5. मलकपुर - पहलवानों का गांव; 6. जोहड़ी - निशानेबाज जाट वीरों का गांव; 7. बामनोली - प्राचीन नाग मंदिर; 8. सिरसली - 1857 ई. की क्रांति का तोमर जाट वीरों का गांव; 9. शिकोहपुर - कवि जाट वीरों का गांव; 10. सूप - लठैत जाट वीरों का गांव।
External Links
See also
References
- ↑ Dr Ompal Singh Tugania: Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu, p. 36, sn-678.
- ↑ Dr Ompal Singh Tugania: Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu, p. 36, sn-680.
- ↑ Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. ग-92.
- ↑ Dr Pema Ram: Rajasthan Ke Jaton Ka Itihas, 2010, p. 299
- ↑ Dr Ompal Singh Tugania: Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu, p. 35, sn-574.
- ↑ B S Dahiya: Jats the Ancient Rulers (A clan study), p. 238, s.n. 70
- ↑ Adhunik Jat Itihas, VI, p.241, sn-37
- ↑ Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. घ-25
- ↑ Adhunik Jat Itihas, VI, p.239, sn-79
- ↑ Bhim Singh Dahiya, Jats the Ancient Rulers (A clan study), p. 282.
- ↑ Bhim Singh Dahiya: Jats the Ancient Rulers (A clan study)/Porus and the Mauryas, p. 154.
- ↑ भलेराम बेनीवाल: जाट योद्धाओं का इतिहास, पृ. ७१३.
Back to Jat Gotras