Jump to content

Balla Ram Arya

From Jatland Wiki
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Balla Ram Arya (Jakhar) (1920-29.12.1996) was a freedom fighter and social worker.[1] He was active Worker of Rajgarh Kisan Sabha.[2] He was from village Gudanin Rajgarh tahsil of Churu district in Rajasthan.

स्वतन्त्रता सेनानी चौधरी बल्लाराम आर्य

सादुलपुर तहसील के नवां ग्राम पंचायत के छोटे गांव गुडाण के लोगों ने बीकानेर रियासत क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. प्रोफेसर केदारचौधरी कुमाराम आर्य ने यहीं से बीकानेर रियासत में स्वतंत्रता संग्राम की रणभेरी बजाई थी. उनकी प्रेरणा से गांव गुडाण निवासी चौधरी बल्लाराम आर्य व उनके तीन भाइयों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया. अपने पूरे परिवार को दांव पर लगाया कर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे. चौधरी बल्लाराम आर्य का जन्म सन 1920 में हुआ था. उनके पिता का नाम हुणता राम था तथा उनके तीन बड़े भाई दयाराम आर्य, सुगनाराम आर्य व यादराम आर्य भी स्वतंत्रता सेनानी थे. उनके बड़े भाई यादराम आर्य ने सन 1939 में दक्षिणी हैदराबाद के निजाम के विरुद्ध आर्य समाज के सत्याग्रह में भाग लिया था. उनको 19 माह की कारावास से दंडित किया गया.

हैदराबाद की जेल से रिहा होने के बाद चौधरी बल्लाराम आर्य ने चांदगोठी में धारा 144 तोड़कर जुलूस निकाला. जिसके कारण उन्हें फिर 9 माह की सजा सुनाई गई. 15 अप्रैल 1946 को बीकानेर रियासत में एक बहुत बड़े प्रदर्शन का आयोजन किया गया. इसके प्रमुख संचालक चौधरी बल्लाराम आर्य के बड़े भाई याद राम आर्य थे. 9 मई 1946 को सादुलपुर शहर के शीतला बाजार में हुई लाठी प्रहर में उनको गंभीर चोटें आई.

नौ सपूतों ने आजादी का दिया नारा: बीकानेर रियासत की जनता को राह दिखाने के लिए 9 मई 1946 को 13 वीर सपूतों ने बीकानेर में 'हम आजादी चाहते हैं' नारे का जय-घोष कर दिया. चौधरी बल्लाराम आर्य ने इसका नेतृत्व किया था. बीकानेर शहर में ऐतिहासिक जुलुस छबीली घाटी से शुरू होकर शहर के बीच से गुजरता हुआ पुलिस लाइन रोशनी घर के पास पहुंचा. यहां पुलिस ने आंदोलन कारियों पर लाठियां बरसाईं. जिसमें प्रदर्शनकारी लाठियों से घायल हो गए.


परिवार का रहा योगदान: स्वतंत्रता आंदोलन में बल्लाराम आर्य के पूरे परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

देहांत: 29 दिसंबर 1996 को हृदय गति रुकने से उनका देहांत हो गया चौधरी के पुत्र हवा सिंह आर्य वर्तमान में आर्य समाज के प्रवक्ता हैं. उन्होंने बीकानेर रियासत के स्वतंत्रता संग्राम की मुंह बोलती कहानी नामक पुस्तक 1984 में प्रकाशित की थी.

बल्लाराम आर्य की प्रतिमा स्थापित: 28 दिसंबर 2017 को को चौधरी बलराम आर्य के पुत्र हवासिंह आर्य ने अपने पिता की प्रतिमा का निर्माण करवाया. इसका लोकार्पण गांव गुडाण में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के भतीजे सरदार किरणजीत सिंह ने किया. उनकी याद में 29 दिसंबर को गांव गुडाण में पुण्यतिथि मनाई जाएगी.

स्रोत: लेखक: भंवरसिंह राजपूत, राजस्थान पत्रिका, सीकर, 28.12.2025,

स्वतन्त्रता सेनानी चौधरी बल्लाराम आर्य की मूर्ति का अनावरण

28.12.2025: आज ही के दिन 28 दिसंबर 2017 को स्वतन्त्रता सेनानी चौधरी बल्लाराम आर्य की मूर्ति का अनावरण पैतृक गांव गुडाण में शहीदे आज़म भगत सिंह के भतीजे सरदार किरणजीत के पावन हाथो से हुआ।

Source - Vedpal Arya's Post, 28.12.2025

स्वतंत्रता सेनानी चौधरी बलराम आर्य चेरिटेबल ट्रस्ट

इरादा पक्का और नेक हो तो कोई काम नामुमकिन नहीं होता, ऐसा ही कुछ कर दिखाया है गांव गुडाण के स्वतंत्रता सेनानी चौधरी बलराम आर्य चेरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक हवासिंह आर्य ने। जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों का एक दुर्लभ संग्रहालय का निर्माण किया है। जिसमें उनको 40 वर्ष लगे।

आर्य ने बताया कि उनका लक्ष्य था कि देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले एवं शहादत देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा भावी नौजवान पीढिय़ों को मिले।

जिसके लिए उन्होंने गत चालीस वर्षों के अथक प्रयास से लगभग डेढ़ सौ स्वतंत्रता सैनानियों की आप बीती कहानी एवं स्वतंत्रता सेनानियों की जुबानी कैसेट रिकॉर्ड कर आंदोलन में घटित घटनाओं का उल्लेख किया है। तहसील एवं शेखावाटी क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज रिकॉर्ड कर आंदोलन में उनके साथ घटित घटनाओं की जानकारी ली है। उन्होंने बताया कि बीकानेर रियासत के सैनानियों का अभूतपूर्व संग्रहालय तैयार किया है।

स्रोत: Vishwanath Saini, Rajasthan Patrika, Dec 23, 2017

External links

Gallery

References

  1. Sanjay Singh Saharan, Dharati Putra: Jat Baudhik evam Pratibha Samman Samaroh Sahwa, Smarika 30 December 2012, by Jat Kirti Sansthan Churu, pp.11-12
  2. Ganesh Berwal: 'Jan Jagaran Ke Jan Nayak Kamred Mohar Singh', 2016, ISBN 978.81.926510.7.1, p.169

Back to The Freedom Fighters