तेजपाल जी पिलानिया
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तेजपाल जी (1200 – 1229 ई.) पिलानिया गोत्र के जाट समुदाय के लोक देवता थे। वे शेखावाटी, राजस्थान में पूजे जाते हैं।
इतिहास
तेजपाल जी और उनके भाई लक्ष्मी नामक महिला की गायों की रक्षा करते हुए मवेशी चोरों से लड़ाई में शहीद हो गए। 1229 ईस्वी में पिलानी के पास।
सन् 1229 ईस्वी में पिलानी के पास, एक परिवार के मवेशी ही उनकी आजीविका का साधन थे। गाँव वालों में तेजपाल और उनके भाई भी थे, जो अपने कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। एक धूल भरी दोपहर, लक्ष्मी नाम की एक स्थानीय महिला रोते हुए उनके दरवाजे पर आई। डाकुओं ने उसके चरागाह पर हमला कर दिया था और उसके मवेशियों को रेगिस्तान की ओर भगा रहे थे। गायों के बिना लक्ष्मी और उसका परिवार भुखमरी के कगार पर था। बिना सोचे-समझे, तेजपाल और उनके भाई घोड़ों पर सवार होकर झुलसा देने वाले थार रेगिस्तान की ओर चल पड़े। वे एक पथरीली पहाड़ी पर हमलावरों से जा भिड़े। संख्या में कम होने के बावजूद, भाइयों ने भयानक गति से हमला किया। तेजपाल दुश्मन की सेना को चीरते हुए आगे बढ़े, जबकि उनके भाइयों ने मवेशियों को डराकर झुंड को गाँव की ओर वापस भगा दिया। गायें तो बच गईं, लेकिन अपमानित हमलावरों ने फिर से संगठित होकर भाइयों को घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। उड़ती धूल में एक-दूसरे की पीठ से पीठ मिलाकर खड़े होकर, भाइयों ने अपनी अंतिम सांस तक बहादुरी से लड़ाई लड़ी और हार मानने से इनकार कर दिया। भाइयों के भयंकर प्रतिरोध से टूटकर, बचे हुए डाकू बंजर भूमि में भाग गए। उस शाम, मवेशी सुरक्षित रूप से लक्ष्मी के बाड़े में लौट आए, लेकिन वीर नहीं लौटे। उनके सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देने के लिए, ग्रामीणों ने रेगिस्तान की रेत में स्मारक पत्थर (गोरधर) स्थापित किए। आठ शताब्दियों बाद भी, तेजपाल और उनके भाइयों की कहानी साहस और रक्षा के एक शाश्वत प्रतीक के रूप में याद की जाती है।[1][2][3]
नोट्स
- तेजपाल जी पिलानिया पिलानिया वंश के सम्मानित पूर्वज के रूप में याद किए जाते हैं जिनकी विरासत पिलानिया गोत्र की ऐतिहासिक स्मृति में समाहित है।
- उनकी कहानी शेखावाटी क्षेत्र की लोककथाओं का हिस्सा है।
- उनकी वीरता, बलिदान और नेतृत्व की कहानियां समुदाय में प्रेरणा का स्रोत हैं।
- तेजपाल जी पिलानिया की स्मृति पिलानिया की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण तत्व बनी हुई है और वंश परंपराओं और सामुदायिक स्मरण के माध्यम से इसे लगातार याद किया जाता है।
संदर्भ
- ↑ Chundawat, T. S., Verma, N., & Vaya, D. (2021). Development in synthesis and coating applications of polyurethane. Journal of the Chilean Chemical Society, 66(2), 5142–5148.
- ↑ Ghosh, S., Goda, J. S., Chatterjee, A., Shetty, P., Sahay, A., Dasgupta, A., Epari, S., Sahu, A., Singh, V., Gupta, T., Moyiadi, A. A., & Jalali, R. (2024). Patterns of care in craniopharyngioma: Clinical outcomes after surgery and radiation therapy in a real-world setting. World Neurosurgery, 181, e809–e819.
- ↑ Dhakal, M. (2020). Nexus between dream and reality in Tarun Tejpal's The Alchemy of Desire. Journal of English Faculty, 11(3), 45–58. Cited by: 0