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Riri

From Jatland Wiki
(Redirected from Ridi)
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Location of Riri village in Bikaner district

Riri (रीड़ी) is an old town in tahsil Dungargarh of Bikaner district in Rajasthan.

Location

Origin

The Founders

It was capital of Jakhar Jats. Bigga Ji Jakhar (1301 - 1336) from this village rose to the status of folk-deity of Jangladesh area of Rajasthan.

History

Bigga Ji Jakhar

जाखड़ जाटों का ठिकाना बिग्गा, तहसील डूंगरगढ़ में था । इनका गोत्र पड़िहार बतलाया गया है । कहते हैं कि कोलियोजी पड़िहार पहले पहल मंडोर से आकर ग्राम केऊ तहसील डूंगरगढ़़ में बसा था । इसका बेटा जक्खा हुआ जिसने अपने नाम पर जाखासर बसाया । कहते हैं उसने अपने परिवार के रिश्ते वहां बसे जाटों में करने आरंभ कर दिए थे तथा 'नए जाट गोत्र' जाखड़ का जनक कहलाया । उसकी एक लड़की का नाम रिड़ी था, जिसके नाम पर रिड़ी गाँव बसाया । जक्खा का बेटा मैहन था, जिसका बेटा बिग्गा बड़ा शूरवीर हुआ । कहते हैं की बिग्गा ने गायों की रक्षा के लिए राठ मुसलमानों से युद्ध किया जिसमें गौरक्षार्थ वह संवत 1393 (1336) में काम आया । पाऊलेट ने बीकानेर गजेटियर में बिग्गा की म्रत्यु का समय 1315 दिया है । बिग्गाजी का जन्म विक्रम संवत 1358 (1301) में रिड़ी में हुआ रहा । बिग्गा और उसके आसपास के एरिया में बिग्गा गौरक्षक लोकदेवता के रूप में पूजे जाते हैं । [1] गाँव बिग्गारिड़ी में जाखड़ जाटों का भोमिचारा था और लंबे समय तक जाखड़ों का इन पर अधिकार बना रहा ।[2]


Bigga Ji Jakhar (1301 - 1336) (also called Bigga Ji or Biggaji) is a folk-deity of Jangladesh area of Rajasthan. He was a Jat ruler of Jakhar gotra of a small democratic republic state. He was born in the year 1301 AD at place called Riri, which was capital of Jakhars and is in present tahsil Dungargarh of the Bikaner district in Rajasthan, India. His great grandfather was Rao Lakhoji Chuhad and father was Rao Mehandji. His mother was Sultani daughter of Chuhadji Godara chieftain of Kapoorisar. He was a great warrior, protector of Hindu religion and cows. He was killed in war with Rath Muslims in the year 1336.

बुरड़क और ढाका की लड़ाई: 1252

सरनाऊ-कोट के बुरड़क और गनोडा के मोमराज ढाका के बीच लडाई के दो कारण सामने आते है. पहला कारण पदमसिंह बुरड़क को मामराज ढाका की पत्नी सुखी देवी द्वारा भला-बुरा कहा जाना है. यह बडवे के अभिलेख में पाया जाता है. दूसरा कारण बुरडक बुजुर्गों और स्थानीय बुजुर्ग लोगों द्वारा बताया गया जो बुरडक के कुए से ढाका औरत द्वारा पानी भरने को लेकर हुआ मनमुटाव है.

बडवे के अभिलेख अनुसार एक दिन पदम सिंह 84 गाँवों में घूमकर गानोडा गाँव से सरनाऊ कोट घोड़े पर आ रहे थे. उस समय मोमराज ढाका की पत्नी सुखी देवी घोड़ा आते देख कर खड़ी हो गयी और पदम सिंह को देखने लगी. उस समय औरतों ने उसे भला बुरा कहा. जब पदम सिंह की घोडी पास आ गयी तो औरतों ने पदम सिंह को भला-बुरा कहा. यह बात पदम सिंह को बुरी लगी . उसने सुखी देवी को घोड़ी पर बैठाया और सरनाऊ ले गया. मामराज ढाका के लोगों ने यह सूचना दिल्ली भेजी. मोमराज ढाका ने गुस्से में कहा कि वह 7 बुरड़क औरतों को उठाकार लायेगा तभी दम लेगा. तनाव बढ़ गया. चौधरी कालूराम दिल्ली गए और बादशाह से चर्चा की. बादशाह ने दोनों पक्षों में समझोता कराया. लेकिन मोमराज ढाका नहीं माना तो चौधरी कालूराम ने ललकारा कि जिस वक्त वह आयेगा तो ईंट का जवाब पत्थर से दिया जायेगा. इस बात पर नाराज होकर मोमराज ढाका ने सरनाउ-कोट पर 6 बार हमला बोला.

दूसरी लडाई (1252) - सरनाउ-कोट पर दूसरी लडाई काती सुदी 13 संवत 1309 को हुई. मोमराज ढाका के साथ 15000 आदमी थे. लडाई में 800 आदमी काम आये. इनमें से पदम सिन्ह के 200 तथा मोमराज ढाका के 600 लोग काम आये. नसरूदीन महमूद बादशाह के समय संवत 1309 (1252 AD) को इसके सेनापति रिडी -बिग्गा के रिड़मल जाखड थे.

Jat Gotras

Population

Notable Persons

See also

External Links

References

  1. पाऊलेट, बीकानेर गजेटियर, p. 90
  2. Dr Pema Ram, The Jats Vol. 3, ed. Dr Vir Singh,Originals, Delhi, 2007 p. 206

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